टाक्सिंग में चीनी घुसपैठ की खबर झूठी! फिर भी क्यों चौबीसों घंटे सुलग रही अरुणाचल सीमा पर 'परसेप्शन की जंग'
India China LAC Dispute: अरुणाचल प्रदेश के टाक्सिंग में चीनी घुसपैठ के दावों को भारतीय सेना ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. जानिए आखिर क्यों एलएसी पर चीन बार-बार ऐसी अफवाहें उड़ाकर 'परसेप्शन की जंग' और 'सलामी स्लाइसिंग' की चाल चलता है, और कैसे भारत का 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' दे रहा है उसे मुंहतोड़ जवाब.

सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से तैरने लगती है. दावा किया जाता है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के टाक्सिंग क्षेत्र में एलएसी (LAC) के बेहद करीब नए कैंप बना लिए हैं. देखते ही देखते ये खबर चर्चा का विषय बन जाती है. इस तरह के दावों की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय को तुरंत सामने आना पड़ता है. सेना ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह 'गलत और भ्रामक' करार दिया.
सेना ने साफ किया कि भारतीय सीमा के भीतर कोई चीनी घुसपैठ या नए कैंप नहीं बने हैं और दोनों देशों की सेनाएं अपनी तय सीमाओं के भीतर ही हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने सोशल मीडिया पर चल रही तस्वीरों और दावों को जमीनी हकीकत से दूर बताया. लेकिन सवाल ये उठता है कि जब सेना खुद इस बात का खंडन कर चुकी है, तो फिर बार-बार अरुणाचल बॉर्डर को लेकर ऐसी खबरें क्यों आती हैं? जवाब है- 'परसेप्शन की जंग' यानी धारणा की लड़ाई, जो इस समय भारत-चीन सीमा पर बंदूकों से ज्यादा घातक हथियार बन चुकी है.
क्या है पूरा विवाद और सेना का आधिकारिक रुख?
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर कुछ सैटेलाइट तस्वीरें और दावे शेयर किए गए. इनमें कहा गया कि अरुणाचल के सुदूर टाक्सिंग सेक्टर में चीनी सेना ने नए कंस्ट्रक्शन कर लिए हैं. चूंकि सीमा पर तनाव की खबरें देश को सीधे प्रभावित करती हैं, इसलिए सेना ने बिना वक्त गंवाए स्थिति साफ की.
‘डेक्कन हेराल्ड’ ने भारतीय सेना के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि “एलएसी पर भारतीय सैनिक लगातार मुस्तैद हैं और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखते हैं.” रक्षा सूत्रों ने मीडिया को बताया कि चीन की तरफ अपनी सीमा के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जरूर चल रहा है, लेकिन वो भारतीय क्षेत्र से बाहर है. असल में, भारत और चीन के बीच सीमा पूरी तरह तय नहीं है. इसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी कहा जाता है. दोनों देशों के नक्शों और परसेप्शन (सोच) में अंतर होने की वजह से कई बार भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिसका फायदा उठाकर सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें फैलाई जाती हैं.
जियो पॉलिटिक्स: टाक्सिंग सेक्टर का इतिहास और संवेदनशीलता
अब समझते हैं कि ये टाक्सिंग सेक्टर आखिर है कहां और ये चीन के लिए इतना अहम क्यों है. टाक्सिंग अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले का आखिरी सीमावर्ती गांव है. ये इलाका बेहद दुर्गम पहाड़ियों, घने जंगलों और अनप्रेडिक्टेबल मौसम से घिरा हुआ है. रणनीतिक रूप से ये जगह भारत के लिए जितनी जरूरी है, चीन की नजरें भी इस पर हमेशा टिकी रहती हैं.
अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटें, तो 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भी ये पूरा सुबनसिरी और तवांग सेक्टर मुख्य युद्धक्षेत्र थे. चीन हमेशा से अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिण तिब्बत' का हिस्सा बताता रहा है, जिसे भारत ने हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह खारिज किया है. टाक्सिंग जैसे इलाकों में दोनों देशों की पेट्रोलिंग टीमें एक ही पॉइंट तक जाती हैं. जब सीमा का कोई परमानेंट डिमार्केशन (सीमांकन) नहीं है, तो चीन जानबूझकर ऐसे पॉइंट्स के पास अपनी एक्टिविटी बढ़ाता है ताकि वो भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना सके.
चीन की सोची-समझी चाल: 'सलामी स्लाइसिंग' और नया बॉर्डर कानून
चीन सीधे तौर पर बड़ा युद्ध लड़ने के बजाय एक खास रणनीति पर काम करता है, जिसे मिलिट्री की भाषा में 'सलामी स्लाइसिंग' (Salami Slicing) कहा जाता है. इसका मतलब होता है- धीरे-धीरे, छोटे-छोटे टुकड़ों में दुश्मन की जमीन पर कब्जा करना या वहां अपनी उपस्थिति मजबूत करना, ताकि सामने वाले को एक बड़े युद्ध की शुरुआत करने का मौका न मिले.
इस रणनीति को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए चीन ने 1 जनवरी 2022 से अपना 'नया लैंड बॉर्डर कानून' (Land Border Law) लागू किया था. इस कानून के तहत चीन अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए सीमावर्ती इलाकों में नागरिक बस्तियां बसाने को बढ़ावा देता है. चीन एलएसी के बिल्कुल करीब 'शियाओकांग' (Xiaokang Village) यानी 'मखमली या समृद्ध गांव' बसा रहा है.
इन गांवों में चीनी तिब्बतियों को बसाया जाता है, जिन्हें बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ मिलिट्री ट्रेनिंग भी दी जाती है. ये लोग चीन के लिए 'शारीरिक बफर' और जासूस दोनों का काम करते हैं. जब ये नागरिक बॉर्डर के पास रहने लगते हैं, तो चीन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा करता है कि ये उसकी पुरानी बस्तियां हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर काउंटर: भारत का 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम'
चीन के इस परसेप्शन और फिजिकल वॉरफेयर का मुकाबला करने के लिए भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. पहले की सरकारों की नीति थी कि बॉर्डर पर सड़कें न बनाई जाएं ताकि चीनी सेना अंदर तक न आ सके. लेकिन अब नीति है- 'बॉर्डर पर आखिरी गांव तक बेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर'. इसके लिए भारत सरकार ने 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' (Vibrant Villages Programme) शुरू किया है.
इस प्रोग्राम के तहत टाक्सिंग जैसे सीमावर्ती गांवों का कायाकल्प किया जा रहा है. वहां 4G कनेक्टिविटी, पक्की सड़कें, बिजली और पानी की सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, ताकि लोग पलायन न करें. भारतीय सेना के रिटायर्ड जेसीओ और अरुणाचल प्रदेश में एक एनजीओ चलाने वाले सतादल सरकार इस कदम की अहमियत समझाते हुए कहते हैं,
अगर सीमा पर भारतीय नागरिक रहेंगे, तो चीन के लिए जमीन हड़पना नामुमकिन हो जाएगा. इसके अलावा बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने अरुणाचल में सेला टनल (Sela Tunnel) जैसी बेहतरीन परियोजनाएं पूरी की हैं, जिससे भारतीय सेना तवांग और आगे के इलाकों तक हर मौसम में चंद घंटों में पहुंच सकती है.
उधर इंडियन आर्मी ने भी LAC पर अपनी सर्विलांस क्षमता को ड्रोन और एडवांस रडार की मदद से कई गुना बढ़ा दिया है. बाकी पहले के मुकाबले सैन्य टुकड़ियों की पेट्रोलिंग भी बढ़ाई गई है.
LAC पर 'परसेप्शन की जंग' के 4 मोर्चे
अब जरा समझने की कोशिश करते हैं कि चीन बॉर्डर पर किस तरह से दबाव बनाने की कोशिश करता है और भारत उसका क्या जवाब दे रहा है. इस टेबल के जरिए मुद्दे को आसानी से समजा जा सकता है.
| मोर्चा (Front) | चीन की रणनीति (China's Strategy) | भारत का जवाब (India's Response) |
| मनोवैज्ञानिक (Psychological) | सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें या वीडियो डालकर घुसपैठ का भ्रम फैलाना. | भारतीय सेना द्वारा तुरंत खंडन और जमीनी फैक्ट्स को सामने रखना. |
| डेमोग्राफिक (Demographic) | एलएसी के पास 'शियाओकांग' (समृद्ध गांव) बसाकर आबादी बढ़ाना. | 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के जरिए सीमावर्ती गांवों का विकास और पलायन रोकना. |
| इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) | तिब्बत रीजन में मिलिट्री बेस, हेलिपैड और रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार. | BRO द्वारा सेला टनल, फ्रंटियर हाईवे और ऑल-वेदर रोड्स का निर्माण. |
| कानूनी (Legal) | नया बॉर्डर लैंड कानून बनाकर विवादित क्षेत्रों पर अपना दावा मजबूत दिखाना. | LAC पर गश्त बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संप्रभुता पर अडिग रहना. |
आखिर क्यों जरूरी है सतर्कता?
टाक्सिंग सेक्टर में चीनी घुसपैठ की खबरों का सेना ने भले ही खंडन कर दिया हो, लेकिन ये साफ है कि एलएसी पर शांति सिर्फ एक परसेप्शन भर है. चीन बंदूक की गोली चलाए बिना भारत की मीडिया, सोशल मीडिया और जनमानस में एक डर का माहौल बनाना चाहता है. वो चाहता है कि भारत हमेशा डिफेंसिव मोड में रहे.
यही वजह है कि इस तरह की खबरों को लेकर देश के भीतर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है. सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर सैटेलाइट इमेज या दावा सच नहीं होता. भारतीय सेना जमीनी स्तर पर मजबूत है और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत अब चीन की आंखों में आंखें डालकर जवाब दे रहा है. परसेप्शन की इस जंग को जीतने के लिए जरूरी है कि हम अफवाहों पर ध्यान न दें और देश की सुरक्षा एजेंसियों के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें.
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