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ईरान में भारत के 16 नाविक 1 महीने से हिरासत में, परिवारों ने पीएम मोदी से क्या गुहार लगाई?

ईरान का दावा था कि जहाज 60 लाख लीटर डीजल की तस्करी कर रहा था. लेकिन क्रू और कंपनी का कहना है कि कार्गो VLSFO था, जिसकी सैंपल रिपोर्ट भी थी.

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How 16 Indian sailors were taken hostage by Iran Mid sea chase gunfire
क्रू के सभी सदस्यों को जहाज के एक मेस रूम में बंद कर दिया गया. क्रू में 16 भारतीय, 1 श्रीलंकाई और 1 बांग्लादेशी नागरिक शामिल था. (फोटो- इंडिया टुडे)
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प्रशांत सिंह
16 जनवरी 2026 (Published: 02:25 PM IST)
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भारत के 16 नाविक (sailors) पिछले एक महीने से ज्यादा समय से ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की हिरासत में हैं. उनका जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में था. इसके बावजूद ईरानी फोर्सेस ने उसका पीछा किया, गोलियां चलाईं, जहाज को जब्त कर लिया और क्रू मेंबर्स को बंधक बना लिया. अब ईरान में हो रहे खूनी विरोध प्रदर्शनों के बीच इन नाविकों के परिवार वाले परेशान हैं और प्रधानमंत्री मोदी से तुरंत हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं.

इंडिया टुडे से जुड़े अभिषेक डे की रिपोर्ट के मुताबिक 8 दिसंबर 2025 को दुबई स्थित कंपनी ग्लोरी इंटरनेशनल FZ ALC द्वारा संचालित टैंकर वैलियंट रोअर (Valiant Roar) यूएई के दिब्बा पोर्ट के पास खड़ा था. जहाज में बहुत कम सल्फर वाला फ्यूल ऑयल (VLSFO) लदा हुआ था और ये तकनीकी खराबी के कारण पहले से ही वहां खड़ा था. जहाज के कप्तान विजय कुमार और क्रू मेंबर्स अपने साथी जहाज एमटी कोरल वेव (MT Coral Wave) के की मदद से वहां खड़े थे. ये जहाज रिपेयर के लिए खोर फक्कान जा रहा था. लेकिन अचानक ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की फोर्सेस ने उनका पीछा शुरू कर दिया.

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जहाज में बहुत कम सल्फर वाला फ्यूल ऑयल (VLSFO) लदा हुआ था.

कप्तान ने सुबह अपनी पत्नी से बात की थी, सब सामान्य था. लेकिन दोपहर करीब 3 बजे फोन आया, "ईरानी नेवी हमें चेज कर रही है." कुछ ही मिनटों में गोलियों की आवाज आई और फोन कट गया. परिवारों के अनुसार, IRGC ने बिना वजह जहाज पर फायरिंग की. गोलियां चलने से जहाज को नुकसान पहुंचा और कुछ क्रू मेंबर्स घायल हो गए. IRGC के जवान बोर्ड पर चढ़े, क्रू को असॉल्ट किया, हथियारों से डराया और जहाज पर कब्जा कर लिया. उन्होंने जहाज को जबरन बंदर-ए-जास्क (Bandar-e-Jask) पोर्ट की ओर खींच लिया. ये ओमान की खाड़ी में ईरान का महत्वपूर्ण बंदरगाह है.

ईरान ने तस्करी का दावा किया

ईरान का दावा था कि जहाज 60 लाख लीटर डीजल की तस्करी कर रहा था. लेकिन क्रू और कंपनी का कहना है कि कार्गो VLSFO था, जिसकी सैंपल रिपोर्ट भी थी. IRGC ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और जहाज को जब्त कर लिया. क्रू के सभी सदस्यों को जहाज के एक मेस रूम में बंद कर दिया गया. क्रू में 16 भारतीय, 1 श्रीलंकाई और 1 बांग्लादेशी नागरिक शामिल था. इन सभी के फोन, लैपटॉप और सभी डिवाइस छीन लिए गए. सिर्फ कप्तान को कभी-कभी सीमित कॉल करने की इजाजत थी. वॉशरूम जाने के लिए भी सिक्योरिटी फोर्स के साथ जाना पड़ता था. खाने-पीने की स्थिति भी खराब थी.

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वॉशरूम जाने के लिए भी सिक्योरिटी फोर्स के साथ जाना पड़ता था.

घटना के बाद परिवारों ने तुरंत एक्शन लिया. 12 दिसंबर को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) से संपर्क किया. 17 दिसंबर को तेहरान में भारतीय दूतावास ने परिवारों को बंदर अब्बास कांसुलेट से बात करने को कहा, लेकिन कांसुलर एक्सेस नहीं मिला. ईरान ने कांसुलर पहुंच से इनकार कर दिया. परिवार परेशान थे, क्योंकि ईरान में उस समय खूनी विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. खामनेई शासन के खिलाफ प्रदर्शन में हजारों मौतें हो चुकी थीं, इंटरनेट ब्लॉक था और हिंसा चरम पर थी.

10 क्रू मेंबर्स को जेल में डाला गया

1 जनवरी 2026 तक स्थिति जस की तस रही. फिर 6 जनवरी को 10 क्रू मेंबर्स (चीफ ऑफिसर अनिल सिंह, सेकंड इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर आदि सहित) को ईरान ले जाया गया. बयान दर्ज करने के नाम पर उन्हें गिरफ्तार कर बंदर अब्बास जेल में डाल दिया गया. चीफ ऑफिसर अनिल सिंह ने अपनी पत्नी गायत्री को सिर्फ एक मिनट की कॉल की.

जहाज पर सवार लोगों में जहाज के चीफ ऑफिसर अनिल कुमार सिंह भी शामिल थे. घटना के बारे में गायत्री ने बताया कि 8 दिसंबर को दोपहर करीब 3 बजे जब उन्होंने घबराकर उन्हें फोन किया तो उन्हें गोलियों की आवाज सुनाई दी. उन्होंने बताया,

"8 दिसंबर की सुबह जब मैंने अपने पति से बात की तो सब कुछ सामान्य था. बाद में, दोपहर लगभग 3 बजे, उन्होंने फिर से फोन किया और बताया कि ईरानी नौसेना उनके जहाज का पीछा कर रही है. कुछ समय बाद, मुझे गोलियों की आवाज सुनाई दी, और फिर फोन कट गया."

उसके बाद से गायत्री का अनिल से कोई संपर्क नहीं हुआ है. बाकी 8 क्रू मेंबर्स जहाज पर ही फंसे रहे. उनके पास चावल-दाल जैसे सीमित राशन थे, जो 2-3 दिनों में खत्म होने वाले थे. पानी ईरानी अथॉरिटी दे रही थी, लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित भी कर रही थी.

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6 जनवरी को 10 क्रू मेंबर्स (चीफ ऑफिसर अनिल सिंह, सेकंड इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर आदि सहित) को ईरान ले जाया गया. 

अब इन परिवारों ने दिल्ली हाई कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. परिवारों ने पीएम मोदी को 20-25 ईमेल भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

थर्ड इंजीनियर केतन मेहता की बहन शिवानी मेहता ने कहा,

"हमारे भाई ने सिर्फ अपना काम किया था. ईरान में बढ़ती अशांति की खबरें हमें और डरा रही हैं."

कप्तान विनोद परमार (कप्तान के भाई) ने बताया कि राशन खत्म होने वाला है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि वो स्थिति से अवगत है और नाविकों की रिहाई के लिए प्रयास जारी हैं. वो ईरान से फंसे भारतीयों के लिए इवैक्यूएशन फ्लाइट्स की तैयारी कर रहे हैं.

बता दें कि भारत और ईरान दोनों मैरीटाइम लेबर कन्वेंशन 2006 के सिग्नेटरी हैं, जो नाविकों के अधिकारों की रक्षा करता है. लेकिन ईरान ने अब तक कोई औपचारिक डिटेंशन ऑर्डर जारी नहीं किया और कोई ठोस आधार नहीं दिया है. ये घटना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास की अशांति को दर्शाती है, जहां ईरान अक्सर जहाजों को जब्त करता रहा है. परिवार अब उम्मीद कर रहे हैं कि भारतीय सरकार मजबूत कूटनीतिक दबाव बनाएगी.

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