हरियाणा के इस गांव में स्मार्टफोन में लगाई जा रही आग, वजह साइबर क्राइम है
Nuh bans smartphones cybercrime: हरियाणा के नूंह जिले के सुखपुरी गांव में कई लोगों ने अपने-अपने स्मार्टफोन तोड़ दिए. युवाओं ने अपराध की दुनिया को छोड़ने का संकल्प लेते हुए सार्वजनिक रूप से कई मोबाइल फोन तोड़ दिए.

हरियाणा के नूंह जिले के सुखपुरी गांव में कई लोगों ने कथित तौर पर अपने-अपने स्मार्टफोन तोड़ दिए. युवाओं ने अपराध की दुनिया को छोड़ने का संकल्प लेते हुए 50-55 मोबाइल फोन तोड़ डाले. गांव की पहचान साइबर क्राइम के हॉटस्पॉट के रूप में हुई थी. इसी को बदलने के लिए ये फैसला लिया गया.
नूंह पुलिस अधीक्षक डॉ. अर्पित जैन के नेतृत्व में अपराध छोड़ने और कानून का पालन करने को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया था जिससे काफी युवा प्रेरित हुए.
युवाओं ने अपराध से जुड़े पुराने संपर्क और गतिविधियों से दूरी बनाने का संकल्प लेते हुए अपने फोनों में आग लगा दी. इंडिया टुडे से जड़े कासिम खान की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के समय डीएसपी अभिषेक खटकड़ और नगीना थाना प्रभारी सचिन कुमार भी मौजूद रहे. जिसका वीडियो भी सामने आया है. क्लिप में दिख रहा है कि लोग फोन पर ईंट मार रहे हैं.
डीएसपी ने युवाओं के इस फैसले की सराहना की. साथ ही कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उन्हें सुधार का अवसर देना भी है. उन्होंने कहा कि जो लोग अपराध का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं, पुलिस उनका हर संभव सहयोग करने के लिए तैयार है.
'साइबर ठगी से बदनामी हो रही थी'आमिर नाम के ग्रामीण ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा,
55-100 लोगों ने मिलकर जिम्मेदारी ली है. जो भी व्यक्ति साइबर ठगी का काम करता है. वो इसे छोड़ देगा. कोई अगर दोबारा से ये काम करता है, तो सबकी जिम्मेदारी होगी. साइबर ठगी से बदनामी हो रही थी. हमारी दुकान में जब कोई व्यक्ति आता, तो मैं उससे ये ही कहता कि भाई सही अकाउंट से डालना. तो हमें भी कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि अकाउंट वगैरा बंद हो जाते हैं.
एक अन्य ग्रामीण जुबैर ने कहा,
गांव की बदनामी ही हो रही थी. जो बालक 12वीं कर चुके वो 20 साल पीछे गए. जो बालक पढ़ रहे थे उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. तो शिक्षा को नुकसान हुआ. मैं बच्चों से कहूंगा, जो भी गलत कर रहा है उसे छोड़ दो.
ट्रिब्यून इंडिया ने मामले पर सुखपुरी के सरपंच कौसर से बात की. उनका कहना है कि स्मार्टफोन गांव में ‘जहर’ की तरह फैल रहा था. युवा लड़कों को फिशिंग, सेक्सटॉर्शन और फाइनेंशियल फ्रॉड के जाल में फंसा रहा था. गांव को ‘साइबर क्राइम का हॉटस्पॉट’ बता दिया गया. पुलिस यहां अक्सर आती-जाती है. बच्चों की शादियां नहीं हो पा रहीं. इस फैसला से हम संकेत देना चाहते हैं कि हमारा समुदाय अपराध की दुनिया की आसान कमाई के बजाय मेहतन और ईमानदारी को चुनता है.
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इस फैसले से कुछ युवा नाराज भी हैं. उनका कहना है कि ऐसे कदम से आर्थिक तरक्की रुक जाएगी. पूरा इलाका कई दशक पीछे चला जाएगा. वहीं छात्रों को इस बात की चिंता है कि अगर उन्हें बेसिक कीपैड फोन इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया गया, तो वे जरूरी पढ़ाई-लिखाई के साधनों, ऑनलाइन क्लास और स्कॉलरशिप पोर्टल से कट सकते हैं.
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