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यूपी के गाजियाबाद में कोई पुलिसकर्मी अब आपसे 'तू-तड़ाक' नहीं करेगा, अगर की तो खैर नहीं!

Ghaziabad Police Commissioner जे रविन्दर गौड़ ने पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को जनता के साथ शालीन व्यवहार करने की ताकीद की है. अब जिले के थानों और चौकियों में पुलिसवाले जनता से 'आप' और 'जी' के साथ पेश आएंगे.

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30 अप्रैल 2025 (पब्लिश्ड: 04:57 PM IST)
Ghaziabad police commissioner, J Ravinder Goud
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे रविन्दर गौड़.
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गाजियाबाद में पुलिस अब ‘तमीज से’ पेश आएगी, क्योंकि गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे रविन्दर गौड़ ने 'शिष्टाचार संवाद नीति' लागू कर दी है. सोमवार, 28 अप्रैल को पुलिस के ‘बदतमीजी भरे रवैये’ की शिकायतों के बाद पुलिस कमिश्नर ने ये बड़ा कदम उठाया है. मंगलवार, 29 अप्रैल को गाजियाबाद के सभी थानों और पुलिस ऑफिस में अफसरों को इस नई पॉलिसी की ब्रीफिंग दी गई. अब पुलिस को जनता से तहजीब और सम्मान के साथ पेश आना होगा. तो, आइए जानते हैं कि इस नई पॉलिसी में क्या-क्या खास है.

'तू-तड़ाक' को अलविदा, 'आप-जी' से होगी बात

गाजियाबाद में अब पुलिसवालों का लहजा बदलेगा. गाजियाबाद पुलिस की प्रेस रिलीज के मुताबिक, अब कोई पुलिसवाला ना 'तू' कहेगा, ना 'तुम' बोलेगा. पुलिसवाले जनता से ‘आप’ कह कर ही बात करेंगे और नाम के पीछे 'जी' लगाना भी जरूरी हो गया है.

'शिष्टाचार संवाद नीति' लागू करने का जिम्मा खुद पुलिस कमिश्नर गौड़ ने उठाया है. मकसद एकदम साफ है, पुलिस की छवि सुधारनी है और आम जनता से बात करते वक्त इज्जत और तहजीब के साथ पेश आना है.

जिले के पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियो को ब्रीफ करते हुए एसीपी प्रियाश्री पाल ने कहा,

“जब हमारे पास कोई आता है, तो हमें उसे छोटा-बड़ा नहीं समझना है. अक्सर देखा जाता है कि जब समाज का कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति आता है, तो उससे हम 'आप' कहकर बात करते हैं, लेकिन जब कोई गरीब व्यक्ति आता है, तो आमतौर पर सम्मान नहीं करते. हमारे लिए कानून की नजर में सब बराबर हैं, इसलिए सबके लिए 'आप' शब्द का ही इस्तेमाल करेंगे.”

महिलाओं और बच्चों का खास ख्याल
महिलाओं की शिकायतें अब सिर्फ महिला पुलिसकर्मी ही सुनेंगी, वो भी महिला हेल्प डेस्क पर. उनकी गोपनीयता का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा. सूरज ढलने के बाद किसी महिला को थाने नहीं बुलाया जाएगा. बच्चों, शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों, बुजुर्गों और ट्रांसजेंडरों के साथ भी सम्मान से पेश आना होगा. 'विकलांग' नहीं, 'दिव्यांग जन' बोला जाएगा.

थाने में पानी, कुर्सी, बच्चों के लिए टॉफी
थानों में अब जनता के लिए कुर्सियां और पानी का इंतजाम होगा. बच्चों के लिए टॉफी या चॉकलेट भी रखी जाएगी. थाने, पुलिस लाइन और दफ्तर की साफ-सफाई पर भी जोर है. पान-गुटखा खाकर दीवारों पर थूकने की मनाही रहेगी.

FIR में देरी नहीं, मुलजिम हवालात में
कोई मामला होने पर तुरंत FIR दर्ज होगी, पीड़ित को घंटों इंतजार नहीं करवाया जाएगा. मुलजिम के लिए स्पेशल ट्रीटमेंट की कोई जगह नहीं होगी. मुलजिम को थाने में कुर्सी पर नहीं, सीधे हवालात में जगह मिलेगी. थाने जाने वाले को चौकी नहीं भेजा जाएगा. थाने पर ही मामले का समाधान करना होगा.

पुलिसवालों के सोशल मीडिया चस्के पर लगाम
गाजियाबाद के पुलिसकर्मी अब रील बनाकर वायरल होने का शौक नहीं पाल सकेंगे. सोशल मीडिया पर सीनियर अफसरों को संबोधित करके शिकायत करना भी आचरण नियमों के खिलाफ होगा. संतरी ड्यूटी पर मोबाइल, ब्लूटूथ या ईयरफोन इस्तेमाल करने की सख्त मनाही है.

अगर कोई पुलिसवाला बदतमीजी करे, तो उसका ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड करके गाजियाबाद पुलिस में शिकायत दर्ज की जा सकती है. पुलिस कमिश्नर से लेकर डीसीपी तक, सबके नंबर खुले हैं. मसलन, पुलिस कमिश्नर का नंबर 9643322900 है, तो डीसीपी (हेडक्वार्टर) से – 9643321010 नंबर पर शिकायत की जा सकती है.

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