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एक्सीडेंट के नाम पर धंधा! यूपी के 13 पुलिसकर्मी सस्पेंड, जांच जारी

13 में 4 मामलों में हादसे वाली गाड़ी की जगह कोई दूसरी इंश्योर्ड गाड़ी दिखा दी गई. 8 मामलों में ड्राइवर का नाम या डिटेल बदल दी गईं. मसलन, अगर ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था, तो फर्जी रिकॉर्ड में लाइसेंस वाला ड्राइवर दिखाया गया.

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False road accident insurance settlement claims 13 UP police officers suspended, probe on
फर्जीवाड़े के इस मामले में आईजी अमित पाठक ने 13 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. (सांकेतिक फोटो- PTI)
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प्रशांत सिंह
2 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 12:41 PM IST)
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उत्तर प्रदेश पुलिस ने इंश्योरेंस के मामलों में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है. गोंडा जिले के देवीपाटन रेंज में रोड एक्सीडेंट के कई केसों में पुलिस अधिकारियों ने गड़बड़ी की. वो फर्जी इंश्योरेंस क्लेम बनाकर इंश्योरेंस कंपनियों से पैसा निकलवाने की कोशिश कर रहे थे. इस मामले में 13 पुलिस अधिकारियों सस्पेंड कर दिया गया है. तीन के खिलाफ जांच चल रही है.

क्या है मामला?

दरअसल, रोड एक्सीडेंट में जब कोई मौत हो जाती है, तो पीड़ित परिवार को इंश्योरेंस कंपनियों से मुआवजा (कंपेनसेशन) मिल सकता है. लेकिन नियम के अनुसार अगर गाड़ी का बीमा नहीं है या ड्राइवर के पास वैलिड लाइसेंस नहीं है, तो बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं होती. ऐसे में क्लेम नहीं मिलता है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोग और पुलिस के कुछ अधिकारी मिलकर ऐसे ही केसों में धोखाधड़ी कर रहे थे. वो किसी एक्सीडेंट में शामिल रही गाड़ी और ड्राइवर की डिटेल्स बदलकर फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनाते थे. और इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम मांगते थे.

जब एक मामले में बीमा कंपनी को जांच के दौरान शक हुआ, तो मामला खुला. उन्होंने कुछ क्लेम्स की जांच करी, और गड़बड़ी पाई. जिसके बाद मामले की शिकायत सीनियर अधिकारी को की गई. जांच के लिए देवीपाटन रेंज के आईजी अमित पाठक ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई. SIT ने ऐसे 20 हादसों से जुड़े केस की जांच करी.

जांच में क्या निकला?

20 में से 13 केस फर्जी निकले. इनमें से 9 केस बहराइच जिले के थे. 2 केस गोंडा जिले और 2 केस श्रावस्ती जिले के सामने आए. 7 मामलों में ऐसी कोई भी गड़बड़ी नहीं पाई गई. माने, इन मामलों में क्लेम सही फाइल किया गया था.

कैसे किया गया फर्जीवाड़ा?

रिपोर्ट के मुताबिक 13 में 4 मामलों में हादसे वाली गाड़ी की जगह कोई दूसरी इंश्योर्ड गाड़ी दिखा दी गई. 8 मामलों में ड्राइवर का नाम या डिटेल बदल दी गईं. मसलन, अगर ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था, तो फर्जी रिकॉर्ड में लाइसेंस वाला ड्राइवर दिखाया गया. एक केस में कुत्ते से टकराने वाले हादसे को मोटरसाइकिल हादसा बताकर फाइल कर दिया.

पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल की और उसे बीमा कंपनी को भेज दिया. कंपनी ने जांच की तो असलियत सामने आई. SIT ने पाया कि जांच करने वाले अधिकारियों ने जानबूझकर डॉक्यूमेंट्स में बदलाव किया.

कार्रवाई क्या हुई?

फर्जीवाड़े के इस मामले में आईजी अमित पाठक ने 13 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. इनमें एक इंस्पेक्टर और 12 सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं. बाकी 3 अधिकारियों का ट्रांसफर हो चुका था, इसलिए उनके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए संबंधित जिलों को पत्र लिखा गया है. कुल 16 अधिकारियों की पहचान हुई, लेकिन 13 को अभी सस्पेंड किया गया.

आईजी ने इन 13 फर्जी मामलों की आगे जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही देवीपाटन रेंज में एक्सीडेंट से जुड़े केसों की जांच फिर से कराने के आदेश दिए गए हैं, जिससे कि सभी मामलों की जांच की जा सके.

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