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देश के सभी स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट जरूरी, राजस्थान की घटना के बाद शिक्षा मंत्रालय का निर्देश

Jhalawar में स्कूल की छत गिरने के बाद Education Ministry ने सभी स्कूलो में सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए हैं. मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इन निर्देशों पर तुरंत कदम उठाने के लिए कहा है.

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26 जुलाई 2025 (अपडेटेड: 27 जुलाई 2025, 10:06 AM IST)
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देश के सभी स्कूलों में अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए गए. (तस्वीर-इंडिया टुडे)
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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं. अब देश के सभी स्कूलों को अपनी बिल्डिंग का सुरक्षा ऑडिट करना होगा. इसके तहत अग्नि सुरक्षा, भवन मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था शामिल है. मंत्रालय की ओर से सुरक्षा को लेकर जानकारी शेयर की गई है, जिस पर तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.

शिक्षा मंत्रालय का यह निर्देश राजस्थान के झालावाड़ जिले में हुई घटना के एक दिन बाद आया है. 25 जुलाई को झालावाड़ में एक सरकारी स्कूल की छत गिर गई थी. हादसे के समय 35 से 40 छात्र स्कूल में मौजूद थे. इसमें से 7 बच्चों की मौत हो गई. इसके अलावा अन्य छात्र घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है. इस घटना के बाद शिक्षा मंत्रालय की ओर से X पर पोस्ट किया गया. इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छात्रों की सुरक्षा से जुड़े सुझाव दिए हैं.

1. स्कूल के लिए सुरक्षा उपाय

बच्चे और युवा जिन स्कूलों और सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं, उनका राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन नियमों के मुताबिक सुरक्षा जांच (सेफ्टी ऑडिट) कराना अनिवार्य है. इमारत की मजबूती, आग से बचाव के तरीके, आपातकालीन निकास रास्ते और बिजली की वायरिंग की अच्छी तरह से जांच होनी चाहिए.

2. जागरूकता और ट्रेनिंग

शिक्षकों और छात्रों को आपात स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. इसमें इवैक्यूएशन ड्रिल, फर्स्ट एड और सुरक्षा नियमों की जानकारी शामिल हो. इसके लिए स्थानीय विभागों जैसे NDMA, फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर ट्रेनिंग और मॉक ड्रिल समय-समय पर कराई जाएं.

3. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान

शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ छात्रों की मानसिक और भावनात्मक सेहत का भी ध्यान रखा जाए. इसके लिए काउंसलिंग सेवाएं, सहपाठी सहायता समूह, और सामुदायिक जुड़ाव कार्यक्रम शुरू किए जाएं.

4. चूक या नुकसान की सूचना

बच्चों या युवाओं को संभावित नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी खतरनाक स्थिति या घटना की सूचना 24 घंटे के भीतर राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंधित को दी जानी चाहिए. देरी, लापरवाही या कार्रवाई ना करने की स्थिति में सख्त जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

5. सार्वजनिक जिम्मेदारी

माता-पिता और अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए. सामाजिक नेता और स्थानीय संस्थाएं स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और बच्चों के आने-जाने की गाड़ियों की सुरक्षा पर नजर रखें. कहीं कोई असुरक्षित स्थिति दिखे तो तुरंत सूचना दें.

शिक्षा मंत्रालय ने सभी शिक्षा विभागों, स्कूल बोर्डों और संबंधित अधिकारियों से इन निर्देशों को बिना देर किए लागू करने के लिए कहा है. इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने की बात दोहराई, ताकि किसी भी बच्चे को जोखिम का सामना ना करना पड़े.

वीडियो: अग्निवीर पर स्पेशल डिग्री देने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने क्या घोषणा की है?

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