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भारत के फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्ट पर लगेगा ब्रेक? अमेरिका ने 3 गुना बढ़ाए इंजन के दाम

भारत अपने पहले स्टेल्थ फाइटर जेट AMCA पर काम कर रहा है. हालांकि, अब इसमें एक नई अड़चन आ गई है. जिस अमेरिकी इंजन के भरोसे भारत ने इसे बनाने की योजना बनाई थी उसके दाम सीधे 3 गुना बढ़ गए हैं.

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24 जून 2026 (अपडेटेड: 24 जून 2026, 04:59 PM IST)
drdo agency ada searching alternative options for amca engine as ge aerospace soared prices three times
AMCA के लिए GE के इंजन लगने का ही प्रस्ताव है (PHOTO-X)
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दुनिया पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की होड़ में है.भारत भी अपने पहले स्टेल्थ फाइटर जेट AMCA पर काम कर रहा है. लेकिन प्रोजेक्ट के पूरी रफ्तार पकड़ने से पहले ही एक बड़ी मुश्किल सामने आ गई है. मुश्किल है इस फाइटर जेट का इंजन. जिस अमेरिकी इंजन के भरोसे भारत ने शुरुआती योजना बनाई थी, उसकी कीमत अब तीन गुना तक बढ़ गई है. ऐसे में सवाल है कि क्या AMCA की टाइमलाइन पर असर होगा? और क्या भारत को इंजन के लिए नया पार्टनर तलाशना पड़ेगा?

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) के तहत आने वाली एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को पास इस जेट को डेवलप करने का जिम्मा है. प्लान के मुताबिक प्रोटोटाइप के लिए अमेरिकन कंपनी GE Aerospace से इंजन लिए जाने हैं. लेकिन GE ने अपने GE F414-INS6 इंजन के दाम तीन गुना बढ़ा दिए हैं. रक्षा सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में हर इंजन की कीमत 80 करोड़ रुपये के आसपास थी, लेकिन अब उसी एक इंजन की लागत 200 करोड़ रुपये से ज्यादा है. ऐसे में ADA अब इंजन के लिए दूसरे ऑप्शंस पर भी विचार कर रही है.

प्रोटोटाइप के लिए चाहिए 15 इंजन

बीते कुछ समय से सरकार ने AMCA प्रोजेक्ट पर ध्यान देना शुरू किया है. जेट्स की कमी को देखते हुए बीते कुछ समय से सरकार इस प्रोग्राम में तेजी लाने की कोशिश भी कर रही है. यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय ने सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की जगह प्राइवेट कंसोर्टियम (बिजनेस ग्रुप्स) को AMCA प्रोजेक्ट में शामिल करने का फैसला किया है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक इसके लिए तीन कंसोर्टियमों को शॉर्टलिस्ट किया है. ये तीन कंसोर्टियम हैं-

  • टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड 
  • लार्सन एंड ट्यूब्रो (L&T) + भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) 
  • भारत फोर्ज + BEML

इस फाइटर जेट के मामले में सरकार बहुत सोच-समझकर आगे बढ़ रही है. चूंकि भारत को ये जेट अगले कुछ सालों में चाहिए और क्वालिटी से समझौता करने का सवाल ही नहीं है. ऐसे में सरकार ने बिडिंग जीतने वाली कंपनी के लिए कुछ शर्तें रखी हैं. जिस भी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट के लिए चुना जाएगा उसे सारी शर्तों को पूरा करना होगा. जैसे-

  • चुनी गई कंपनी को विमान के ढांचे से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, इंजन से जुड़े सिस्टम, फ्यूल सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम तक सब तैयार करना होगा. 
  • कंपनी को टेस्टिंग के लिए जरूरी सुविधाएं और ग्राउंड सपोर्ट वाला इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना होगा. 
  • रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे प्रोग्राम के लिए सात साल का समय तय किया है. 
  • पहला प्रोटोटाइप, खरीद का आदेश मिलने के 30 महीने के भीतर उड़ान भरना चाहिए. 
  • 64 महीनों के अंदर सभी पांच प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार होने चाहिए. 
  • कंपनी को 84 महीनों के भीतर करीब 1800 टेस्ट उड़ानें पूरी करनी होंगी. 

AMCA प्रोटोटाइप बनाने की शर्तों को देखें तो ये पता चलता है कि इस विमान के कुल 5 प्रोटोटाइप बनने हैं. चूंकि ये एक ट्विन इंजन (डबल इंजन) वाला एयरक्राफ्ट होगा इसलिए हर विमान के लिए 2 इंजन चाहिए होंगे. साथ ही हर विमान के लिए एक इंजन स्पेयर के रूप में रखा जाता है जिससे किसी खराबी के दौरान इंजन को तुरंत रिप्लेस किया जा सके. कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक जिस भी कंपनी को यह प्रोजेक्ट मिलेगा, उसे 84 महीनों के भीतर पांचों प्रोटोटाइप्स के जरिए 1800 टेस्ट उड़ानें पूरी करनी होंगी.

(यह भी पढ़ें: प्राइवेट प्लेयर्स बनाएंगे भारत का स्टील्थ फाइटर जेट, HAL को इस वजह से सरकार ने किया आउट)

लागत बढ़ने से प्रोजेक्ट में बदलाव संभव 

अमेरिकन कंपनी GE Aerospace ने पहले भी LCA तेजस के इंजन डिलीवर करने में देरी की है. इस बार AMCA में लगने वाले इंजन के दाम बढ़ा दिए. तो जहां पहले 15 इंजनों की कुल लागत लगभग 1200 करोड़ आती, दाम बढ़ने के बाद अब वो लागत 3 हजार करोड़ से ज्यादा हो जाएगी. इसके अलावा, F414-INS6 टर्बोफैन इंजन को AMCA Mk1 के लिए शुरुआती इंजन के तौर पर इस्तेमाल करने की भी योजना है. जब तक एक पावरफुल स्वदेशी इंजन नहीं बन जाता, तब तक यही इंजन AMCA Mk1 के शुरुआती 2-4 स्क्वाड्रंस को पावर देगा.

इस प्रोग्राम में देरी का असर सीधे-सीधे इंडियन एयरफोर्स की ऑपरेशनल क्षमता पर पड़ सकता है. यही वजह है कि ADA अब इंजन के लिए दूसरे ऑप्शंस जैसे फ्रांस की Safran और UK की रॉल्स रॉयस के नामों पर भी विचार कर रही है. रॉल्स-रॉयस, सैफरन और GE, सभी ने DRDO को प्रस्ताव दिए हैं.सैफरन ने तो पूरे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) के साथ 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) की पेशकश की है. साथ ही रॉल्स-रॉयस ने भी 100% ToT और पूरी IP ट्रांसफर का प्रस्ताव रखा है.

DRDO दूसरा इंजन क्यों नहीं लगाती?

अब सवाल ये है कि क्या DRDO और ADA के लिए ये संभव है, कि वो तुरंत इंजन बदल दें जिससे प्रोजेक्ट में देरी न हो. तकनीकी रूप से देखें तो ऐसा संभव है. लेकिन ये करना बिल्कुल भी आसान नहीं है. क्योंकि अगर अभी GE F414 इंजन हटाया गया तो DRDO को विमान के एयरफ्रेम का फिर से इंटीग्रेशन करना होगा. विमान के एयर इनलेट डिजाइन में भी बदलाव करने होंगे. इसके अलावा  सॉफ्टवेयर और फ्लाइट कंट्रोल में बदलाव के साथ-साथ नए टेस्ट और सर्टिफिकेशन करवाने होंगे. ऐसे में इस प्रोजेक्ट में 3-4 साल की देरी हो सकती है जो एयरफोर्स के लिए अच्छा नहीं होगा.

(यह भी पढ़ें: सैटेलाइट तस्वीरों में पहली बार दिखा भारत का स्टेल्थ फाइटर AMCA; DRDO कर रही 'गायब' होने वाला टेस्ट

GE ने दाम क्यों बढ़ा दिए?

इंजन की कीमत में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. इनमें वैश्विक महंगाई, सप्लाई चेन में रुकावट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौतों की बदलती शर्तें, एयरोस्पेस ग्रेड कच्चे माल की कमी और जियोपॉलिटिकल रूप से संवेदनशील सप्लायर्स पर निर्भरता शामिल हैं. इसके अलावा GE Aerospace की मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है.

वीडियो: AMCA Fighter Jet Project में सरकार ने क्या बदलाव कर दिया?

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