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10 लाख की घूस लेने के आरोपी IAS को बना दिया डिप्टी सेक्रेटरी, लोग पूछ रहे ये किस फॉर्मूले से हुआ

IAS Dhiman Chakma: IAS धीमान चकमा ने 2020 में UPSC सिविल सर्विस एग्जाम क्रैक किया था. उनकी पहली पोस्टिंग ओडिशा के धर्मपुर में हुई थी. इसी दौरान उनपर 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा. सरकारी विभाग में दोबारा नियुक्ति के बाद अब वे चर्चा में हैं. उनकी पोस्टिंग पर सवाल उठ रहे हैं.

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सचिन कुमार पांडे
| शुभम कुमार
8 जून 2026 (अपडेटेड: 8 जून 2026, 04:01 PM IST)
ias dhiman chakma
IAS धीमान चकमा पर पहली पोस्टिंग के दौरान 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप. (फोटो- इंडिया टुडे)
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एक IAS अधिकारी, नाम- धीमान चकमा. जिसने UPSC का सपना पूरा किया, समाज की सेवा करने की बातें कीं, और पहली ही पोस्टिंग में 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया. उसके घर से लाखों रुपये नकद बरामद हुए. मामला इतना चर्चित हुआ कि पूरे देश में उसकी चर्चा होने लगी. फिर उसे सस्पेंड कर दिया गया, भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ और लगा कि उसका प्रशासनिक करियर लगभग खत्म हो चुका है. लेकिन ठीक एक साल बाद कहानी में ट्विस्ट आया. 

जिस अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप है, उसे फिर से सरकारी सेवा में बहाल कर दिया गया है. इतना ही नहीं, उसे एक विभाग में नई जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है. इसी बात पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ी हुई है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचार के आरोपी अफसर को इतनी जल्दी दूसरा मौका मिलना चाहिए? आइए कहानी शुरू से शुरू करते हैं. 

IAS पर क्या आरोप लगे?

तारीख 8 जून 2025. जगह ओडिशा का कालाहांडी जिला. यहां धर्मगढ़ सब-डिवीजन में तैनात डिप्टी कलेक्टर धीमान चकमा को ओडिशा विजिलेंस की टीम ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा. आरोप था कि एक स्थानीय व्यापारी से किसी प्रशासनिक काम के बदले रिश्वत की मांग की गई थी. शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने जाल बिछाया और कार्रवाई की. 

इसके बाद अधिकारियों ने धीमान चकमा के सरकारी आवास की भी तलाशी ली. विजिलेंस विभाग का दावा था कि तलाशी के दौरान करीब 47 लाख रुपये नकद बरामद हुए. मामले ने तुरंत सुर्खियां बटोर लीं. वजह सिर्फ रिश्वत का आरोप नहीं था, बल्कि ये भी था कि धीमान चकमा एक युवा IAS अधिकारी थे और बतौर IAS उनकी ये पहली पोस्टिंग थी.

मामला सामने आने के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज हुआ और जांच शुरू कर दी गई. इसके बाद लंबे समय तक मामला कोर्ट और विभागीय जांच के दायरे में बना रहा. 

IAS को मिला सेकंड चांस

जून 2026 में ओडिशा सरकार ने धीमान चकमा की सेवा बहाल कर दी. उन्हें राज्य के रेवेन्यू एंड डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त किया गया है. यहीं से विवाद शुरू हो गया.

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, उसे दोबारा सेवा में क्यों लिया गया? कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि जब मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, तब उन्हें महत्वपूर्ण विभाग में जिम्मेदारी क्यों दी गई? कई यूजर्स ने सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए और अपनी नाराजगी जाहिर की. हालांकि सरकार की तरफ से इस पर अलग दलील दी जा रही है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि धीमान चकमा की बहाली किसी क्लीन चिट के आधार पर नहीं हुई है. बल्कि लंबे समय तक सस्पेंशन की स्थिति को लेकर बने सेवा नियमों के तहत ये फैसला लिया गया है. धीमान के खिलाफ चल रहा भ्रष्टाचार का मुकदमा अदालत में जारी रहेगा. इसके अलावा विभागीय जांच भी चलती रहेगी. और यदि आरोप साबित होते हैं तो आगे की कार्रवाई उसके हिसाब से होगी. 

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कौन है IAS धीमान चकमा?

धीमान चकमा मूल रूप से उत्तर-पूर्वी राज्य त्रिपुरा के रहने वाले हैं. उन्होंने साल 2019 में पहली बार UPSC परीक्षा पास की थी. उस समय उन्हें 722वीं रैंक मिली थी, जिसके आधार पर उनका चयन इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी IFS में हुआ. लेकिन उनका लक्ष्य IAS बनना था. इसलिए उन्होंने एक बार फिर तैयारी की और 2020 की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 482वीं रैंक हासिल की. इस बार उनका IAS बनने का सपना पूरा हो गया. बतौर IAS उनकी पहली पोस्टिंग ही धर्मगढ़ में होती है.

IAS बनने के बाद उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वे समाज के लिए काम करना चाहते हैं, खासकर उत्तर-पूर्व भारत के विकास और कल्याण के लिए. उन्होंने कहा था कि वो ऐसे तरीके से काम करना चाहेंगे, जहां रिसोर्सेज का बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो और क्षेत्र में एकता बने.

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