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लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू परिवार को बड़ा झटका, कोर्ट ने आरोप तय किए

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी जागीर की तरह इस्तेमाल किया था. अदालत ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक संगठित अपराधी गिरोह की तरह काम किया.

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Delhi court frames charges against Lalu Yadav, Rabri, Tejashwi, Tej Pratap, others in Railways land-for-jobs case
कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कुल 98 बचे हुए आरोपियों में से 46 लोगों (जिनमें लालू यादव और उनका परिवार शामिल है) के खिलाफ आरोप तय किए जा रहे हैं. (फोटो- PTI)
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प्रशांत सिंह
9 जनवरी 2026 (Published: 11:32 AM IST)
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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी को रेलवे में 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले के मामले में बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने ने ये अहम फैसला सुनाया.

कोर्ट ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. साथ ही IPC की अन्य धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक लालू यादव के परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगे हैं.

कोर्ट मेें जज विशाल गोगने ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक संगठित अपराधी गिरोह की तरह काम किया. ये लोग साजिश के तहत सार्वजनिक नौकरियों को सौदेबाजी का हथियार बनाकर संपत्तियां हासिल करते थे. चार्जशीट में साफ है कि लालू यादव के करीबी लोगों ने रेलवे में नौकरी और देशभर में दूसरी जगहों पर प्लेसमेंट के बदले जमीनें दिलवाईं. कोर्ट ने साफ कहा,

"लालू यादव और उनके परिवार के डिस्चार्ज की मांग बिल्कुल गलत और बेबुनियाद है."

इस मामले में CBI ने आरोप लगाया था कि जब लालू यादव 2004 से 2009 तक केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब उन्होंने कई लोगों को रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी दिलवाई. बदले में उन नौकरी पाने वालों या उनके रिश्तेदारों ने लालू यादव के परिवार और संबंधित कंपनियों को पटना व आसपास की जमीनें बहुत कम कीमत पर बेचीं या गिफ्ट कर दीं. जांच में दावा किया गया है कि कोई भी सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. ये सभी जमीन के लेन-देन और नौकरी का सौदा एक तरह का लेनदेन (quid pro quo) था. यानी नौकरी के बदले में लालू परिवार को फायदा पहुंचाया गया.

यादव परिवार ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों से हमेशा इनकार किया है और कहा है कि ये आरोप पूरी तरह राजनीति से प्रेरित हैं. दूसरी ओर, ED (Enforcement Directorate) इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है. ED ने अब तक 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियों को अपराध की आय बताकर जब्त कर लिया है.

कोर्ट ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी जागीर की तरह इस्तेमाल किया था. आखिरकार कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कुल 98 बचे हुए आरोपियों में से 46 लोगों (जिनमें लालू यादव और उनका परिवार शामिल है) के खिलाफ आरोप तय किए जा रहे हैं. जबकि मामले में 52 लोगों को बरी कर दिया गया है.

वीडियो: Land for Job में बुरी फंसी Lalu Family, gaushala में काम करने वाले का रिश्वत कनेक्शन!

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