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'दलित छात्र ने लड़की को किया प्रपोज, मना किया तो UGC एक्ट लगाया', अब कॉलेज ने दावे का सच बताया

वायरल वीडियो में दावा किया गया कि Shri Ram College of Commerce के दलित छात्र ने एक छात्रा के खिलाफ UGC के नए 'Equity Regulations 2026' के तहत झूठी शिकायत दर्ज करा दी. अब कॉलेज ने इन दावों की सच्चाई बताई है.

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Dalit student alleges UGC Act on girl fact check
अब श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स कॉलेज ने वायरल वीडियो की सच्चाई बताई है. (फोटो: सोशल मीडिया)
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अर्पित कटियार
31 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 31 जनवरी 2026, 11:14 AM IST)
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UGC के नए नियमों को लेकर देश भर में बहस जारी है. इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के एक दलित छात्र ने एक छात्रा को प्रपोज किया. छात्रा ने जब मना किया, तो छात्र ने उसके खिलाफ UGC के नए 'इक्विटी रेगुलेशन्स 2026' के तहत शिकायत दर्ज करा दी. आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए 50 हजार रुपये दिए गए. अब कॉलेज ने इन दावों की सच्चाई बताई है.

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हैं, जिनमें SC/ST छात्रों को निशाना बनाते हुए कहा जा रहा है कि ये छात्र जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ UGC के नियमों का गलत इस्तेमाल करेंगे. इनमें ही श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स को लेकर भी दावा किया जा रहा है.   

कॉलेज ने क्या बताया?

श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) कॉलेज ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. कॉलेज ने साफ कहा है कि ऐसी कोई घटना कॉलेज में हुई ही नहीं है. SRCC के मुताबिक, ऐसी कोई घटना उनके संज्ञान में नहीं आई है और न ही कॉलेज को इस तरह की किसी शिकायत की जानकारी है. 

कॉलेज ने बताया कि सोशल मीडिया पर किए जा रहे सभी दावे और आरोप पूरी तरह निराधार हैं और जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी कॉलेज की नहीं, बल्कि आरोप लगाने वालों की है. यह बयान कॉलेज के डिजिटल इंटरफेस और मीडिया व जनसंपर्क विभाग के संयोजक हरीश कुमार ने जारी किया है.

Dalit student alleges UGC Act on girl fact check
(फोटो: SRCC)

यह वीडियो ऐसे समय में वायरल हुआ है, जब UGC के नए ‘इक्विटी रेगुलेशन्स 2026’ को लेकर देशभर में बहस चल रही है. ये नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए हैं. इन नियमों का मकसद शैक्षणिक संस्थानों से धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, नस्ल या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करना है. 

ये भी पढ़ें: 'सवर्ण विरोधी' बताए जा रहे UGC के नए नियमों की एक-एक बात जान लीजिए

लेकिन इन नियमों का कुछ छात्रों ने विरोध किया, खासकर जनरल कैटेगरी के छात्रों ने. उनका कहना है कि इन नियमों में झूठी या गलत शिकायतों से बचाव का कोई साफ इंतजाम नहीं है. कई यूनिवर्सिटीज में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए. इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने UGC के इन नियमों पर रोक लगाने का  फैसला किया.

वीडियो: संसद में आज: UGC के नए नियमों पर रोक के बाद सदन में क्या हुआ, क्यों भड़के स्पीकर?

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