लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए विपक्ष लाया नो-कॉन्फिडेंस मोशन, TMC सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए
कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है. पार्टी ने कहा है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के दौरान बोलने का मौका नहीं दिया.

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस और विपक्ष ने नो-कॉन्फिडेंस मोशन दाखिल कर दिया है. कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी, DMK सहित विभिन्न विपक्षी दलों के कुल 119 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं.
कांग्रेस के चीफ व्हिप कोडिकुन्निल सुरेश और पार्टी व्हिप मोहम्मद जावेद अहमद ने ये नोटिस लोकसभा के सेक्रेटरी-जनरल उत्पल कुमार सिंह को सौंपा. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को कई बार बोलने नहीं दिया गया. ये समस्या कई विपक्षी पार्टियों को है.
उन्होंने बताया कि आज दोपहर 1:14 बजे नियम 94 (C) के तहत स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव दिया गया है. इस प्रस्ताव पर 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. इसमें DMK के टीआर बालू और SP की डिंपल यादव जैसे सांसद शामिल हैं.

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने इस नोटिस में हस्ताक्षर नहीं किए हैं. राहुल गांधी ने भी हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि उनमें से एक आरोप उनके खुद को बोलने न दिए जाने से जुड़ा है.
कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है. पार्टी ने कहा है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के दौरान बोलने का मौका नहीं दिया.
हाल ही में स्पीकर ने आठ विपक्षी सांसदों को सदन में शोर-शराबा करने के लिए निलंबित कर दिया था. जिनमें से सात कांग्रेस के थे. कांग्रेस के नोटिस में ये भी कहा गया है कि एक बीजेपी सांसद को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर व्यक्तिगत हमले करने की इजाजत दी गई, लेकिन विपक्ष की शिकायत के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई.
स्पीकर ने सदन में कहा था कि उन्हें इस बात की ठोस जानकारी है कि कई कांग्रेस सदस्य पीएम मोदी की सीट की ओर बढ़ सकते हैं और ‘कुछ अनहोनी’ कर सकते हैं. कांग्रेस ने इस बयान पर आपत्ति जताई और कहा है कि ये स्पीकर के संवैधानिक पद का दुरुपयोग दिखाता है.
इसके अलावा, 9 फरवरी को कांग्रेस की आठ महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखा था. उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो लगातार पीएम मोदी की जन-विरोधी सरकार के खिलाफ लड़ रही हैं और उनसे जवाबदेही मांग रही हैं.
14 दिन का नोटिस देना होता हैबता दें कि स्पीकर को हटाए जाने का नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(C) के तहत दिया जाता है. अनुच्छेद 94(C) के तहत लोकसभा स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को उनके पद से तब हटाया जा सकता है, जब ये प्रस्ताव (रेजोल्यूशन) लोकसभा में पास हो जाए. इस प्रस्ताव को पास करने के लिए लोकसभा के उस समय मौजूद कुल सदस्यों (सभी सदस्यों की कुल संख्या) में से बहुमत (आधे से ज्यादा) का समर्थन चाहिए.
इसमें कुछ महत्वपूर्ण शर्त भी हैं. मसलन, ऐसा प्रस्ताव लाने की मंशा की सूचना (नोटिस) कम से कम 14 दिन पहले देनी जरूरी है. यानी, स्पीकर को हटाने के लिए कोई भी सदस्य प्रस्ताव नहीं ला सकता, जब तक कि 14 दिन का नोटिस न दिया जाए.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: क्या स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहा विपक्ष?

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