'अमेरिका से डील पर इतनी क्या जल्दी थी?' एपस्टीन फाइल्स का नाम लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा
India US Trade Deal: कांग्रेस का सवाल है कि मोदी सरकार पर किसने दबाव डाला, जो इतनी जल्दबाजी में अमेरिका के साथ अंतरिम डील की गई? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद AAP ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के तमाम ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' करार दे दिया. ट्रंप ने भी कोर्ट के इस फैसले का तोड़ निकाला और एक अलग कानून के तहत सभी देशों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया. वाइट हाउस का कहना है कि नया 10 फीसदी टैरिफ भारत पर भी लागू होगा. इसे लेकर अब भारत की सियासत में हलचल तेज हो गई है. विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने टैरिफ को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया और जल्दबाजी में एक ऐसे सौदे में क्यों फंस गई, जिससे अमेरिका ने भारत से भारी रियायतें हासिल कीं?
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से टैरिफ को गलत ठहराते हुए कहा कि राष्ट्रपति को ऐसे बड़े टैक्स लगाने के लिए कांग्रेस की साफ मंजूरी चाहिए, जो ट्रंप के पास नहीं थी. इस फैसले से नाराज ट्रंप ने एक अलग कानूनी नियम के तहत नए 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया है.
विपक्ष ने साधा निशानाकांग्रेस के सीनियर नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा,
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा. X पर उन्होंने लिखा,
‘18 दिन और इंतजार कर लेते…’
2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे पहले ऐलान किया था कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील आखिरी रूप ले चुकी है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था,
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने ट्रंप की इस पोस्ट का जिक्र करते हुए ‘X’ पर लिखा,
आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा. पार्टी ने लिखा,
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10 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप ने एक अलग अमेरिकी कानून- ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया है. यह सेक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी देश पर 15 फीसदी तक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है, ताकि 'अमेरिका के बड़े और गंभीर बैलेंस-ऑफ-पेमेंट घाटे' को ठीक किया जा सके.
हालांकि, यह टैरिफ 150 दिनों से ज्यादा के लिए नहीं लगाया जा सकता. इसकी समयसीमा बढ़ाने के लिए अमेरिकी पार्लियामेंट 'कांग्रेस' की मंजूरी लेनी होगी. राष्ट्रपति को इस टैरिफ को लागू करने और जारी रखने के बारे में कांग्रेस से सलाह भी लेनी होती है. अमेरिकी कानून के इस सेक्शन का पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को रद्द करने का फैसला उन टैरिफ पर है, जो ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत एकतरफा तौर पर लगाए थे. इनमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए 'रेसिप्रोकल टैरिफ' भी शामिल हैं. कोर्ट ने फैसले में कहा कि 1977 का कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता. ऐसा केवल कांग्रेस कर सकती है.
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