जमीन खरीद पर CM मोहन यादव से विपक्ष ने पूछे सवाल, बीजेपी की तरफ से जवाब भी आया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव एक विवाद में घिरते नज़र आ रहे हैं. जहां एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके और उनके परिवार के पास 168 एकड़ से ज्यादा की ज़मीन है. इसमें 111 एकड़ ज़मीन ऐसी जगहों पर हैं, जहां बाद में सरकार की तरफ़ से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आए.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर 23 जून को इंडियन एक्सप्रेस ने एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट छापी. जिसने उन्हें गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है. दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार ने उज्जैन और उसके आसपास 137 प्लाट खरीदे जो 168 एकड़ में फैले हैं. इनमें से ज़्यादातर प्लॉट्स ऐसी जगहों पर हैं, जहां बाद में मोहन सरकार ने सड़कें, हाईवे और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया.
इस खुलासे के बाद मुख्यमंत्री पर विपक्ष लगातार हमलावर हो रहा है. राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है. कई आरोप लगाए जा रहे हैं. कांग्रेस ने भी 23 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके CM मोहन यादव पर कई आरोप लगाए, और बहुत से सवाल उठाए. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी और राज्य के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मौजूद थे.
विपक्ष ने क्या आरोप लगाए?जीतू पटवारी ने अपने X हैंडल पर ट्वीट कर लिखा कि धर्मनगरी उज्जैन को मुख्यमंत्री ने जमीन के गोरखधंधे का हिस्सा बना दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से चार अहम सवाल पूछे.
⦿ क्या ये सही है कि आपके मुख्यमंत्री बनने के बाद आपके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने 137 प्लॉट खरीदकर 168 एकड़ जमीन अर्जित की?
⦿ लगभग 111 एकड़ जमीनें ऐसी जगहों पर खरीदी गईं, जो परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्र हैं- क्या ये महज संयोग है?
⦿ क्या सरकार उन सारी परियोजनाओं के भूमि उपयोग परिवर्तन की सूची सार्वजनिक करेगी, जहां आपके परिवार ने जमीनें खरीदीं?
⦿ क्या आप ये घोषणा करेंगे कि इस भूमि सौदे के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज द्वारा न्याययिक जांच हो?
दूसरी ओर, इन आरोपों को भाजपा ने झूठा बता दिया है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल का कहना है कि CM मोहन यादव पर लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं. मोहन यादव के पास नामांकन के वक़्त जितनी जमीन थी, उसके बाद उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया है. ऐसे ही परिवार के अन्य सदस्यों पर लगे आरोप भी झूठे हैं.
रिपोर्ट में क्या छपा?जिन आरोपों पर बात हो रही है, और जिनका जवाब दिया जा रहा है, उन पर एक नज़र डालते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, मुख्यमंत्री की पत्नी ‘सीमा यादव’, बेटे वैभव यादव की पत्नी ‘शालिनी यादव’, भाइयों – ‘नंदलाल’ और ‘नारायण यादव’, नारायण यादव की पत्नी ‘रेखा यादव’, उनके बेटे ‘अभय यादव’, और चचेरे भाइयों ‘गोविंद यादव’ और ‘नीलेश यादव’ के नाम पर कई प्लॉट्स खरीदे गए. इसके अलावा परिवार से जुड़ी चार रियाल एस्टेट कंपनियों ने भी ज़मीनें खरीदीं.
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रिपोर्ट कहती है कि डॉक्टर मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद, परिवार की खरीदी 168 एकड़ ज़मीन में से लगभग ‘111 एकड़’ ऐसी जगहों पर हैं, जहां बाद में सरकार की तरफ़ से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आए. इनमें नई सड़कें, रोड चौड़ीकरण, रिंग रोड और हाईवे जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं. रिपोर्ट में एक मास्टर प्लान 2035 का भी ज़िक्र किया गया है.
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