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लाउडस्पीकर से चर्च हटाने की धमकियां दीं, ओडिशा में 18 साल सामंजस्य टूट गया

Odisha Church Controversy: आदिवासी समुदाय ने फरवरी में माटी मां के पास सात दिनों का हवन करने का फैसला किया. उनके पुजारी ने कहा कि हवन तभी संभव है जब चर्च को वहां से हटाया जाए.

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Church and sacred grove coexisted in an Odisha village for 18 years. Two weeks ago, that changed
2008 से गांव में एक चर्च बना हुआ था, जो ईसाई समुदाय के लिए इस्तेमाल होता था. (सांकेतिक फोटो- PTI)
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प्रशांत सिंह
29 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 08:22 AM IST)
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ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव में 18 साल तक चर्च और पवित्र वन (सैक्रेड ग्रोव) साथ-साथ रहे, लेकिन दो हफ्ते पहले ये सामंजस्य टूट गया. ये मामला नबरंगपुर जिले के कपेना गांव का है, जहां करीब 250 परिवार रहते हैं. ज्यादातर लोग गोंड, भत्रा और संता जैसे आदिवासी समुदाय से हैं, जो खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं. गांव में लगभग 30 परिवार ईसाई बन चुके हैं, जबकि बाकी आदिवासी अपनी पारंपरिक मान्यताओं पर कायम हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2008 से गांव में एक चर्च बना हुआ था, जो ईसाई समुदाय के लिए इस्तेमाल होता था. ईसाई समाज के दावों के मुताबिक ये निजी जमीन पर बना था, लेकिन अधिकारी इसे गोचर भूमि (सामुदायिक चरागाह) मानते हैं. पिछले 18 सालों में कभी कोई विवाद नहीं हुआ.

हवन के फैसले के बाद से बदली स्थिति 

माटी मां नाम का पवित्र वन (सैक्रेड ग्रोव) चर्च के पास ही स्थित है, जहां आदिवासी अपनी धार्मिक प्रथाओं के लिए पूजा-अर्चना करते हैं. दोनों स्थानों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चलता रहा. लेकिन जनवरी 2026 की शुरुआत में स्थिति बदल गई.

आदिवासी समुदाय ने फरवरी में माटी मां के पास सात दिनों का हवन करने का फैसला किया. उनके पुजारी ने कहा कि हवन तभी संभव है जब चर्च को वहां से हटाया जाए. 18 जनवरी को आदिवासियों ने ईसाइयों से चर्च को वहां से हटाने की मांग की. रविवार, 25 जनवरी को कुछ युवकों ने चर्च में प्रार्थना के दौरान लाउडस्पीकर से धमकियां दीं और कहा कि अगर प्रार्थना जारी रही तो चर्च को तोड़ दिया जाएगा.

सोमवार, 26 जनवरी को भीड़ ने चर्च में ताला लगा दिया. रिपोर्ट के अनुसार कुछ ईसाइयों को जबरन बाहर निकाला और दो युवकों पर हमला भी किया. बुधवार, 28 जनवरी को ईसाई समुदाय ने उमरकोट पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन बाद में शांति समिति की बैठक के बाद इसे वापस ले लिया गया.

प्रशासन ने क्या बताया?

फिलहाल प्रशासन ने दो प्लाटून पुलिस (करीब 80 जवान) गांव में तैनात किए हैं. बैठक के बाद चर्च का ताला खोल दिया गया है.

स्थानीय ईसाई किसान कृतिबास संता ने कहा,

“18 साल से चर्च यहां है, कोई समस्या नहीं थी. अब वे हवन के लिए चर्च हटवाना चाहते हैं. हमने हवन के दौरान प्रार्थना रोकने की पेशकश की, लेकिन वो नहीं माने. नई जमीन मांगी तो कहा गया कि गांव से बाहर चले जाएं.”

दूसरे ईसाई त्रिनाथ संता ने रविवार की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि लाउडस्पीकर से धमकियां दी गईं. आदिवासी प्रतिनिधि रतन गोंड ने माना कि ये लोग चर्च हटवाना चाहते हैं और कहा कि मामला पुलिस तक क्यों ले गए, गांव में ही सुलझना चाहिए था.

उधर, उमरकोट थाना प्रभारी रामकांत साई और नबरंगपुर कलेक्टर महेश्वर स्वैन ने बताया कि शांति समिति के बाद स्थिति सामान्य है. चर्च खुल गया है और दोनों पक्ष शांतिपूर्ण समाधान पर सहमत हुए हैं. ईसाइयों को दो हफ्ते का समय दिया गया है कि वो चर्च शिफ्ट करने पर फैसला लें. फिलहाल गांव में शांति है, लेकिन लंबे समय तक जो सह-अस्तित्व रहा, उसे कायम रखना अब चुनौती बनी हुई है.

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