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'सुखना को और कितना सुखाओगे... नेता-माफिया दोषी', चंडीगढ़ की झील की बदहाली देख बोले CJI

चंडीगढ़ की सुखना लेक की बदहाली को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है. SC ने कहा कि लेक के सूखने के पीछे ब्यूरोक्रेट्स, नेता और बिल्डर माफिया का हाथ है.

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sukhna lake supreme court statement
सुखना झील चंडीगढ़. (फोटो-इंडिया टुडे)
22 जनवरी 2026 (Updated: 22 जनवरी 2026, 02:48 PM IST)
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“और कितना सुखाओगे सुखना लेक को?” सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ स्थित सुखना झील को लेकर टिप्पणी की है. डेढ़ किलोमीटर लंबी और इतनी ही चौड़ी ये लेक सैलानियों के फेवरेट स्पॉट में से एक है. लेकिन अब बदहाली की कगार पर है. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इसके लिए ब्यूरोक्रेट्स, नेता और बिल्डर माफिया जिम्मेदार हैं. क्या है पूरा केस?

इंड‍ियन एक्सप्रेस की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक सुप्रीम कोर्ट में सुखना लेक से जुड़ा ये केस 1995 के टी. एन. गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले के अंतर्गत दायर किया गया था. टी. एन. गोदावर्मन केस अभी भी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. ज्यादातर पर्यावरण से जुड़े मामलों की अर्जी इसी केस के तहत डाली जाती है. केस की सुनवाई 21 जनवरी को हुई. जिसकी बेंच में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस एम. पंचोली शामिल थे. 

रिपोर्ट के मुताबिक़, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा,

और कितना सुखाओगे सुखना लेक को? वहां ब्यूरोक्रेट की सांठगांठ से अवैध निर्माण हो रहे हैं. इसमें नेता भी शामिल हैं. इसका नतीजा ये है कि लेक पूरी तरह बदहाली की कगार पर है. वहां बिल्डर माफिया एक्टिव हैं. 

इस केस में केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं थीं. और के. परमेश्वर एमिकस क्यूरी के तौर पर थे. एमिकस क्यूरी न तो सरकार की तरफ से होते हैं और न ही याचिकाकर्ता की तरफ से. निष्पक्ष होते हैं, उनका काम केवल फैक्ट्स के आधार पर अदालत को सही सलाह देना होता है.

कोर्ट ने दो बड़े सवाल खड़े किए

पहला ये कि सुखना लेक के कैचमेंट एरिया में असल में कितना अवैध निर्माण हुआ है? झील के पीछे की पहाड़ियों को कैचमेंट एरिया कहते हैं. साल 2020 में हाई कोर्ट ने इस सुरक्षित इलाके में बने सभी अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया था. दूसरा सवाल ये कि ऐसे कौन से मुद्दे हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के बजाय वापस हाईकोर्ट भेजा जा सकता है, ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर निगरानी हो सके?

कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?

दरअसल, गोदावर्मन केस सीधे सुप्रीम कोर्ट की बेंच सुनती है. इसमें अर्जी लगाने का मतलब है कि देश की सबसे बड़ी अदालत सीधे आपके मामले पर गौर करेगी. इससे फायदा ये होता है कि मामला अपील दर अपील सालों तक नहीं खिंचता है. इसका हालिया उदाहरण है अरावली पहाड़ी की सुनवाई. 

ये भी पढ़ें: अरावली को लेकर मचे हंगामे की पूरी कहानी, एक क्लिक में जान लीजिए!

CJI ने सवाल उठाया कि लोग हाई कोर्ट जाने के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों लगा रहे हैं? उन्होंने इसे बिल्डरों का एक ‘फ्रेंडली मैच’ बताया. ताकि हाई कोर्ट की कार्यवाही को रोका जा सके और मामला सुप्रीम कोर्ट में लटका रहे.

सीजेआई ने ये भी कहा कि लेक पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के बिल्कुल करीब में है. हाई कोर्ट के पास अनुच्छेद 226 के तहत इसे बचाने की शक्ति है. लेकिन मामले को सुप्रीम कोर्ट में लाकर हाई कोर्ट की पावर को कम किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि स्थानीय स्तर पर माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज़ हो सकेगी. पंजाब सरकार ने सुखना लेक को बचाने के लिए अपना नया प्लान शेयर किया है. खबर है क‍ि सुखना लेक के आसपास 3 किलोमीटर तक के इलाके को इको-सेंसिटिव जोन बनाया जाएगा. 

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