ट्विशा शर्मा केस की गुत्थी 'टनल व्यू' तकनीक से सुलझाएगी CBI, शातिर अपराधी भी इससे कांपते हैं
Twisha Sharma Case Investigation: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा केस की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआई 'टनल व्यू' तकनीक का इस्तेमाल करेगी. इस मामले में ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा केस (Twisha Sharma Case) की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के पास है. ट्विशा के मौत की असली वजह जानने के लिए सीबीआई अब अपनी जांच (Twisha Sharma Death Investigation) में 'टनल व्यू' (Tunnel View) और 'डिजिटल रिकंस्ट्रक्शन' (Digital Reconstruction) जैसे साइंटिफिक तरीकों का इस्तेमाल करने जा रही है.
इस मामले में गुरुवार 28 मई को ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है. जबकि ट्विशा का पति समर्थ सिंह पहले से ही कस्टडी में है. बावजूद इसके मौत की असली वजह अब भी रहस्य के घेरे में है. ट्वविशा की मौत 12 मई 2026 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स में हुई थी.
'टनल व्यू' जांच की वो तकनीक, जिससे शातिह अपराधी भी कांपते हैं
जैसा कि नाम से जाहिर है 'टनल व्यू' मतलब किसी अंधेरी सुरंग में तांक झांक. जैसे अंधेरी सुरंग में घुसकर जब हम टॉर्च जलाते हैं तो हमें दो कदम आगे तक सब साफ दिखता है. मगर नजरों के सामने. दाहिने-बाएं कुछ नहीं. ऐसे में हम दो कदम आगे बढ़ते हैं तो फिर आगे का दो कदम साफ दिखने लगता है. ऐसे धीरे-धीरे करके हम उस सुरंग को पार कर लेते हैं.
रिटायर्ड डीएसपी राधेश्याम त्रिवेदी ने लल्लनटॉप को फोन पर समझाते हुए कहा,
अंधेरी सुरंग में हमें टॉर्च की रोशनी भले ही दूसरे सिरे तक का दृश्य ना दिखाए. मगर जो दो-तीन कदम तक दिखता है, वो पूरा साफ दिखता है. हमसे पैरों के ठीक सामने का पत्थर, कांटा, गड्ढा या कोई भी ऑब्जेक्ट नहीं छूटता. जो खुली रोशनी में हम कई बार अनदेखा कर देते हैं. कभी-कभी उससे हमें ठोकर भी लग जाती है. पुलिस इनवेस्टिगेशन का हाल भी कुछ ऐसा ही होता है.
आसान भाषा में कहें तो जांच की 'टनल व्यू' तकनीक ऐसे ही कंफ्यूजन को दूर करती है. इनवेस्टिगेटिव टीम किसी टनल की तरह एक सीधे ट्रैक पर कदम दर कदम सबूतों और घटनाओं की बारीक स्टडी करते हुए आगे बढ़ती है. इससे छोटे से छोटी बात के भी मिस होने का चांस काफी हद तक कम हो जाता है.
इसे जांच की भाषा में समझाते हुए राधेश्याम त्रिवेदी कहते हैं,
जांच अधिकारी का पूरा फोकस घटना वाले दिन, समय और मौका-ए-वारदात के आसपास की हर छोटी-बड़ी बारिकियों, गतिविधियों और सबूतों पर होता है. इसे किसी वारदात का ‘मिनट दर मिनट’ एनालिसिस कहा जा सकता है.
'टनल व्यू' जांच में इनवेस्टिगेटिव अफसर या एजेंसी (इस केस में सीबीआई) किसी तरह के कयास या कॉन्सप्रेसी थ्योरी के बजाए, साइंटिफिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर घटना की टाइम लाइन (Chronological Order) तैयार करती है. इसके आधार पर जो चार्जशीट बनाई जाती है उसे अदालत में झुठलाना आरोपी या उसके वकील के लिए काफी मुश्किल हो जाता है.
अब सीबीआई इस 'टनल व्यू' तकनीक का सहारा लेकर 12 मई 2026 के उन आखिरी घंटों की एक-एक कड़ियां जोड़ेगी, जिस दिन ट्विशा शर्मा की मौत हुई थी.
'वर्चुअल री-कंस्ट्रक्शन' का खेला
ट्विशा शर्मा केस की जांच को लेकर मीडिया में आ रही ख़बरों पर यकीन करें तो सीबीआई की टीम उस कमरे की फॉरेंसिक मैपिंग कर रही है, जहां ट्विशा मृत पाई गई थी. दूसरे शब्दों में कहें तो कंप्यूटर पर पूरे घर का 3D या वर्चुअल ढांचा तैयार किया जा रहा है. इसके बाद सारी मौजूद जानकारियों और डाटा डालकर घटना का डिजिटल वर्जन तैयार किया जाएगा.
आसान भाषा में कहें तो सीबीआई उस रात के सभी उपलब्ध डिजिटल फुटप्रिंट्स को 3D नक्शे से जोड़ती है. मिसाल के तौरपर-
1. घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के जरिए जानकारी जुटाना कि घर में कौन, किस वक्त, किस कमरे की तरफ जाता दिखाई दे रहा है.
2. ट्विशा, उसके पति समर्थ और सास गिरिबाला के फोन पर आखिरी कुछ कॉल किसके आए, कब आए और कितनी देर बात हुई.
3. घर के Wifi लॉग्स के जरिए ये पता लगना की किसने, कितनी देर इंटरनेट का इस्तेमाल किया. क्या कोई सोशल मीडिया ऐप या व्हाट्सऐप उस वक्त इस्तेमाल किया गया.
4. घर के सभी सदस्यों की मोबाइल फोन लोकेशन. यहां ये बता देना भी जरूरी है कि कुछ स्मार्टफोन के सेंसर्स यहां तक जानकारी दे देते हैं कि फोन हाथ में लेकर मूवमेंट कब की गई.
फॉरेंसिंक साइंस में रिसर्च कर चुकी और फिलहाल सिंगापुर की एक टेक कंपनी में काम करने वाली अंशु पांडे इसे समझाते हुए लल्लनटॉप से कहती हैं,
कंप्यूटर में इस तरह के तमामल डाटा को डालकर जब सिंक्रोनाइज (Synchronize) करते हैं तो स्क्रीन पर घटना और उससे जुड़े तमाम लोगों के 'डिजिटल वर्जन' नजर आने लगता है. ट्विशा शर्मा के केस में अगर ऐसा हुआ तो सीबीआई के सामने क्लियर पिक्चर आ जाएगा कि 12 मई की रात, घटनास्थल के किस हिस्से में क्या मूवमेंट हो रही थी. और कौन कर रहा था.
घटना के इस डिजिटल रि-क्रिएशन के बाद सीबीआई को चार्जशीट बनाने और आरोपियों से पूछताछ में काफी आसानी हो जाएगी.
‘झूठे बयानों’ की पोल खुल जाएगी
आम तौरपर किसी वारदात के आरोपी, जांच को भटकाने के लिए मनगढंत कहानी सुनाते हैं. मिसाल के तौर पर कोई कह सकता है कि ‘उस वक्त वो सो रहा था’ या कोई कह सकता है कि ‘मृतका के कमरे में कोई गया ही नहीं.’ मगर 'टनल व्यू' तकनीक, झूठ के ऐसे गुब्बारों की हवा निकाल देती है.
अंशु पांडे इसे विस्तार से समझाते हुए लल्लनटॉप से कहती हैं,
मान लीजिए आरोपी कह रहा है कि वारदात के वक्त वो अपने कमरे में ही था, बाहर ही नहीं निकला. मगर डिजिटल टाइमलाइन में वो इंटरनेट सर्फ करता या किसी से चैट करता नजर आया या फिर उसके कमरे में मूवमेंट हुई तो ऐसे में आरोपी का झूठ ज्यादा देर टिक नहीं पाता.
सबूतों से छेड़छाड़ का भी भंडाफोड़
ट्विशा शर्मा केस में शुरू से ही ये आशंका जताई जा रही है कि ‘सबूत मिटाने या हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश तो नहीं हो रही.’ 'टनल व्यू' विश्लेष्ण से सीबीआई के लिए ये पता करना भी आसान हो जाएगा.
यूपी पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर और इस तरह के कई मर्डर केस की जांच कर चुके संजय उपाध्याय कहते हैं.
पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मौत का जो संभावित समय बताया गया और जिस समय पर पुलिस को मौत की सूचना मिली. वो टाइम गैप बड़ा जरूरी होता है. इस तकनीक के जरिए जांच अधिकारी को पता चल जाता है कि उस दौरान किसी फोन से कोई चैट डिलीट तो नहीं की गई. या फिर सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ तो नहीं हुई.
संजय कहते हैं कि अगर ऐसा हुआ है तो फॉरेंसिक एक्सपर्ट डिलीट किये गए डाटा को रिकवर करके अपनी डिजिटल टाइम लाइन में फिट करते हैं. ताकि गायब कड़ियों को जोड़ा जा सके.
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साइंटिफिक इनवेस्टिगेशन से मिलेगा ट्विशा को इंसाफ?
जांच के ट्रेडिशनल तरीकों में अक्सर देखा जाता है कि आरोपी या गवाह अपने बयान से पलट जाते हैं. लेकिन 'टनल व्यू' और 'डिजिटल री-कंस्ट्रक्शन' का सहारा लेकर की गई जांच ठोस सबूत (Hard Evidence) की कैटेगरी में आ जाती है. ऐसे में आरोपियों के सामने ज्यादा रास्ते नहीं बचते.
ट्विशा शर्मा केस इस मॉडर्न जांच का गवाह बन रहा है. ऐसे में सारी उम्मीदें इस 'टनल व्यू' जांच पर आ टिकी है. ताकि ये पता चल सके कि 12 मई 2026 की उस खौफनाक रात को भोपाल के कटारा हिल्स के उस घर में आखिर हुआ क्या था? देश जानना चाहता है कि ट्वि शर्मा की मौत महज एक हादसा थी, सुसाइड थी या फिर किसी सोची-समझी साजिश का नतीजा.
वीडियो: ट्विशा शर्मा मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह गिरफ्तार

