The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Bombay High Court Spouse Threatening To Commit Suicide is Cruelty Grounds To Seek Divorce

आत्महत्या की धमकी देना तलाक का आधार माना जा सकता है, बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

Bombay High Court ने एक महिला की ओर से दायर 'सेकेंड अपील' को खारिज कर दिया. इससे पहले एक फैमिली कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पति के पक्ष में तलाक का आदेश दिया था. कोर्ट का मानना था कि महिला अपने पति के साथ क्रूरता करती थी. महिला ने इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

Advertisement
Bombay High Court
कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या की धमकी देना क्रूरता के बराबर है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
pic
रवि सुमन
26 मार्च 2025 (Published: 08:23 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने कहा है कि यदि पति या पत्नी आत्महत्या की धमकी देते हैं. या आत्महत्या का प्रयास करते हैं तो ये क्रूरता (Spouse Threatening is Cruel) के बराबर होगा. कोर्ट ने कहा कि दूसरा पक्ष इस आधार पर तलाक मांग सकता है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति आर एम जोशी ने एक महिला की ओर से दायर 'सेकेंड अपील' को खारिज कर दिया. इससे पहले एक फैमिली कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पति के पक्ष में तलाक का आदेश दिया था. कोर्ट का मानना था कि महिला अपने पति के साथ क्रूरता करती थी. महिला ने इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. 

आत्महत्या करके सास-ससुर को केस में फंसाने की धमकी

हाईकोर्ट ने पति की दलीलों पर गौर किया. उसका कहना था कि पत्नी उसे हमेशा धमकी देती थी कि वो आत्महत्या करके अपने सास-ससुर को केस में फंसा देगी. पति ने ये आरोप भी लगाया कि पत्नी ने एक बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी. और जब फैमिली कोर्ट में पेशी हुई तो उसने अपने हाथों पर मेहंदी लगा रखी थी, ताकि चोट के निशान ना दिखें. 

न्यायमूर्ति जोशी ने 20 फरवरी को पारित आदेश में कहा, 

पति ने न केवल ये आरोप लगाया है कि पत्नी उसे और उसके परिवार को आत्महत्या करके जेल भेजने की धमकी देती थी, बल्कि वास्तव में ऐसा प्रयास भी किया गया था. जीवनसाथी की ओर से ऐसा करना एक ऐसी क्रूरता है जो तलाक का आधार बन सकता है. 

पति का आरोप ये भी है कि पत्नी ने अपने ससुर पर भी गंभीर आरोप लगाए थे. पत्नी ने अपने ससुर पर शराबी होने, गाली-गलौज करने और मारपीट के लिए उकसाने के आरोप लगाए थे. जस्टिस जोशी ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय न्यायालय के रिकॉर्ड को देखा. हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी अपने पति या ससुर के खिलाफ लगाए आरोपों को कोर्ट में साबित करने में विफल रही. यहां तक कि वो अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का भी बचाव नहीं कर पाईं.

ये भी पढ़ें: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट का कौन सा फैसला बन रहा रोड़ा?

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

रिकॉर्ड से इस बात से पुष्टि होती है कि ट्रायल कोर्ट ने विवाह खत्म करने की मंजूरी दी. प्रथम अपीलीय न्यायालय ने भी इसकी पुष्टि की. इन फैसलों में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई, जिससे उसमें हस्तक्षेप की जरूरत हो. 

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने तत्काल ही इस अपील को खारिज को कर दिया.

(अगर आप या आपके किसी परिचित को खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं तो आप इस लिंक में दिए गए हेल्पलाइन नंबरों पर फोन कर सकते हैं. यहां आपको उचित सहायता मिलेगी. मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस होने पर डॉक्टर के पास जाना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक बीमारी का इलाज कराना. खुद को नुकसान पहुंचाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है.)

वीडियो: लड़की फ्रेंडली है इसका ये मतलब नहीं कि वो सेक्स के लिए राज़ी हैः बॉम्बे हाईकोर्ट

Advertisement

Advertisement

()