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'वन नेशन वन इलेक्शन' बिल पेश होने के दौरान BJP के ही 20 सांसद 'गायब', अब उनका क्या होगा?

बिल पेश किए जाने से पहले बीजेपी ने सभी लोकसभा सांसदों को तीन लाइन व्हिप जारी किया था. इसके बावजूद सांसद सदन में मौजूद नहीं थे.

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17 दिसंबर 2024 (पब्लिश्ड: 11:29 PM IST)
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लोकसभा में पेश किया गया वन नेशन वन इलेक्शन बिल. (फाइल फोटो)
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भारतीय जनता पार्टी अपने 20 सांसदों को नोटिस भेज सकती है जो 17 दिसंबर को लोकसभा में 'वन नेशन वन इलेक्शन' बिल पेश किए जाने के दौरान मौजूद नहीं थे. पार्टी इन सांसदों की गैर-मौजूदगी को लेकर जांच कर रही थी. बिल पेश किए जाने से पहले बीजेपी ने सभी लोकसभा सांसदों को तीन लाइन व्हिप जारी किया था. इस बिल पर को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया है.

विपक्षी पार्टियों के भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ये बिल लोकसभा में लेकर आई थी. बिल को पेश कराने के लिए मत विभाजन किया गया. लेकिन वोटिंग के दौरान बीजेपी के ही 20 सांसद मौजूद नहीं थे.

अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया है कि सीनियर बीजेपी नेता लोकसभा में सांसदों की गैर-मौजूदगी की जांच कर रहे हैं. हालांकि, बीजेपी सूत्रों ने बताया कि कुछ केंद्रीय मंत्रियों और कुछ सांसदों ने अपनी अनुपस्थिति के बारे में पहले ही पार्टी के फ्लोर मैनेजर्स को सूचित कर दिया था.

लोकसभा में मत विभाजन के बाद संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024 (वन नेशन वन इलेक्शन बिल) को पेश किए जाने के पक्ष में 269 वोट पड़े, जबकि विरोध में 198 वोट डाले गए. बिल पेश किए जाने का विपक्षी सांसदों ने खूब विरोध किया था.

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न्यूज एजेंसी पीटीआई ने भी पार्टी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इतने सारे सांसदों की अनुपस्थिति से बीजेपी नेतृत्व नाराज है. सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल सहित कुछ सांसद राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में मौजूद थे. उन्होंने बताया कि वोटिंग के दौरान बीजेपी के सहयोगी दलों के चार-पांच सांसद मौजूद नहीं थे. उन्होंने कहा कि इस पर भी गौर किया जा रहा है. एक सीनियर नेता ने पीटीआई को बताया, 

“हम उनकी (सांसदों) अनुपस्थिति के पीछे के कारणों की जांच कर रहे हैं. कुछ के पास सही वजहें थीं.”

लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के उद्देश्य से लाए गए इस बिल को केंद्रीय कैबिनेट ने 12 दिसंबर को मंजूरी दी थी. इस 129वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी. वहीं, लोकसभा में केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल भी लाया गया, जो विधानसभाओं वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के एक साथ चुनाव कराने से जुड़ा है. इसके लिए सदन में सामान्य बहुमत की जरूरत है. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ध्वनिमत से मिली सहमति के बाद इस बिल को पेश कर दिया.

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