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SAD नेता बिक्रम मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल में बंद थे

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता Bikram Singh Majithia को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है. वे आय से ज्यादा संपत्ति रखने के मामले में जेल में बंद थे.

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Bikram Singh Majithia gets bail
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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कमलजीत संधू
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2 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 2 फ़रवरी 2026, 03:01 PM IST)
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शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया (Bikram Singh Majithia) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. मजीठिया आय से ज्यादा संपत्ति रखने के मामले में पिछले साल 25 जून से जेल में बंद थे. सोमवार, 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें अमृतसर से उनके घर से गिरफ्तार किया था और तब से वे नाभा जेल में बंद हैं. पिछली सुनवाई में मजीठिया ने जान को खतरे की आशंका जताते हुए अंतरिम जमानत की अर्जी दी थी. 

विजिलेंस ब्यूरो ने पिछले साल 22 अगस्त को विस्तृत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 40,000 से अधिक पन्नों का दस्तावेजी सबूत और 200 से ज्यादा गवाहों के बयान शामिल हैं. साथ ही विजिलेंस ने 700 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा भी चार्जशीट में किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि मजीठिया को पहले 2022 में एक NDPS मामले में जमानत मिल चुकी थी. उस जमानत के खिलाफ राज्य की याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में ही खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा,

वह पिछले 7 महीनों से जेल में है, पुलिस जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है. जिस संपत्ति के मामले की बात है, वह 2007 से 2017 की पुरानी अवधि से जुड़ा है, जबकि FIR बहुत बाद में 2025 में दर्ज की गई. 

बताया जा रहा है कि इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी. 

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण एक्ट, 1988 की धारा 13(1)(बी) के साथ धारा 13(2) के तहत मजीठिया के खिलाफ FIR दर्ज की थी. मजीठिया ने इस केस में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जमानत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी. इसके बाद मजीठिया ने कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.

ये भी पढ़ें: SAD नेता बिक्रम मजीठिया गिरफ्तार, बोले- मान सरकार मेरी आवाज़ दबाना चाहती है

यह एफआईआर 7 जून, 2025 को एक विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी. यह जांच दल मजीठिया के खिलाफ पहले के NDPC मामले की भी जांच कर रहा था. SIT ने आरोप लगाया कि मजीठिया और उनकी पत्नी ने घरेलू और विदेशी संस्थाओं के नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की थी. ये आरोप उस अवधि से जुड़े हैं जब मजीठिया ने 2007 से 2017 के बीच पंजाब में विधायक और बाद में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया था.

वीडियो: अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया के घर पंजाब विजिलेंस की रेड, क्या पता चला?

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