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दलित महिला का चौराहे पर हुआ अंतिम संस्कार, परिवार बोला- 'श्मशान घाट पर जाने नहीं दिया'

बिहार के वैशाली जिले की ये घटना है. महादलित महिला की अंतिम यात्रा जब गांव के श्मशान घाट की तरफ जा रही थी, तभी कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित तौर पर रास्ता रोक दिया. मजबूर होकर परिवार को बीच सड़क पर ही दाह संस्कार करना पड़ा. क्या है पूरा मामला?

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Mahadalit woman cremation at the crossroads
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. (फोटो: सोशल मीडिया/X)
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अर्पित कटियार
31 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 31 जनवरी 2026, 02:18 PM IST)
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बिहार के वैशाली (Vaishali) जिले में एक 91 साल की बुजुर्ग महिला का सड़क पर अंतिम संस्कार किया गया. आरोप है कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने एक महादलित परिवार को श्मशान घाट जाने से रोक दिया. मजबूर होकर परिवार को बीच सड़क पर ही बुजुर्ग महिला का दाह संस्कार करना पड़ा. 

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना गोराउल थाना क्षेत्र के सोंधो-वासुदेव गांव की है. मृतका की पहचान झपसी देवी के रूप में हुई है, जिनकी मौत बुधवार, 28 जनवरी देर रात हुई थी. गुरुवार को जब उनकी अंतिम यात्रा गांव के श्मशान घाट की तरफ जा रही थी, तभी कुछ प्रभावशाली ग्रामीणों ने कथित तौर पर रास्ता रोक दिया. बताया गया कि श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता पहले से बंद था.

नाराज ग्रामीणों ने शव को सड़क के बीच में ले जाकर पूरे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार कर दिया. इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सड़क को खाली कराया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.

शुक्रवार, 30 जनवरी को DM वर्षा सिंह और SP विक्रम सिहाग की एक टीम ने गांव का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया. SP सिहाग ने बताया कि श्मशान घाट की तरफ जाने वाले रास्ते पर कंक्रीट की दुकानें और एक मंदिर बना हुआ है, जिससे रास्ता बाधित (ब्लॉक्ड) है.

उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. एक अधिकारी ने बताया कि यह अतिक्रमण करीब आठ से दस साल पुराना है और स्थायी समाधान के लिए अवैध निर्माण हटाने पर विचार किया जा रहा है.

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मृतका के बेटे संजीत मांझी ने कहा कि उनके पास सड़क पर अंतिम संस्कार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, 

जब हम लोगों को नहीं जाने दिया तो गांव के लोग बोले कि यहीं (सड़क) पर जला दो. 

अंतिम यात्रा में शामिल एक दूसरे ग्रामीण, मेवालाल मांझी (67) ने कहा,

हम गरीब हैं, हमारे पास घर नहीं है, जमीन नहीं है, और अब तो हमें अपने करीबी और मरे हुए लोगों का अंतिम संस्कार भी नहीं करने दिया जा रहा है. हम लोग क्या करें.

इस घटना पर लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी दुख जताया है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेश भट्ट ने कहा कि पुलिस प्रशासन इस मामले की जांच कर रहा है. इस घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर मुकदमा चलाया जाएगा.

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