भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मी बड़ी मुसीबत में, FIR दर्ज
बिहार के भरत भूषण तिवारी केस में शामिल पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज की गई है. इससे पहले घटना में शामिल पुुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था.

बिहार के भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज की गई है. इससे पहले कई पुुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था. अब मंगलवार, 23 जून को आरा स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय की तरफ से कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी दी गई है.
इंडिया टुडे से जुड़े शशि भूषण की रिपोर्ट के मुताबिक, जगदीशपुर SDPO, शाहपुर थाना प्रभारी समेत एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाने में FIR दर्ज की गई है. FIR की कॉपी में बताया गया है कि ये कार्रवाई भरत की मां की ओर से दिए गए आवदेन के आधार पर की गई है.
एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है. पहले से ही मामले की जांच अलग-अलग स्तरों पर चल रही है. अब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच को नया मोड़ मिल गया है.

इससे पहले परिजनों ने सरकार की ओर से न्यायिक जांच के आदेश पर अविश्वास जताते हुए चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो पूरा परिवार सामूहिक आत्महत्या करने को मजबूर होगा. परिजनों का कहना है कि जब मामले से जुड़े सबूत पहले से ही पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं, ऐसे में केवल जांच की घोषणा से उन्हें संतोष नहीं है.
क्या है पूरा मामला?ये घटना 17 जून की है. भोजपुर जिले के शाहपुर थाना इलाके के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई. पुलिस का दावा है कि वो हथियार लेकर घूम रहे थे और पुलिस पर फायरिंग कर रहे थे. घटना से पहले भरत ने फेसबुक लाइव किया था. इसी लाइव में दिखता है कि भरत अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ फेंककर सरेंडर कर देते हैं. यहां लाइव बंद हो जाता है. इसके बाद पुलिस का दावा है कि भरत ने फायरिंग करने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी.
इसके बाद भरत को पहले आरा सदर अस्पताल और बाद में पटना के पीएमसीएच रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. पुलिस ने बताया था कि भरत भूषण मानसिक तौर पर अस्वस्थ थे.
लेकिन भरत के परिवार ने पुलिस पर 'फर्जी एनकाउंटर' करने का आरोप लगाया है. परिजन का कहना है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने गोली मार दी. यही आरोप पूरे विवाद का केंद्र बन गया है.
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर अपनी-अपनी राय रखनी शुरू कर दी. मामला बढ़ा तो तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया. इसी बीच शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार का एक विवादित बयान सामने आया. उन्होंने कहा, "किस्मत में मरना लिखा था, इसलिए मर गया."
इस बयान के सामने आने के बाद वे भी निलंबित हो गए.
नेता, पूर्व अधिकारियों ने सवाल उठाएभरत के केस पर कई पूर्व अधिकारियों ने भी सवाल उठाए. बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद और गुप्तेश्वर पांडेय समेत कई लोगों ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है. विपक्षी नेता पप्पू यादव, तेजस्वी यादव और कई नेताओं ने सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए. इसके अलावा मामले में पवन सिंह का बयान भी आया. खेसारी लाल यादव भी भरत के घर पहुंचे और उनके परिवार से मुलाकात की थी. दबाव बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे.
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