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'नेता झूठा वादा नहीं करेंगे', ये मांग करने वाले भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर क्यों हुआ?

बिहार में भरत भूषण तिवारी नाम के युवक के एनकाउंटर का मामला गरमा गया है. उनके परिजन ने दावा किया है कि पुलिस ने उनका फर्जी एनकाउंटर किया है. वहीं पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में भरत तिवारी के पैर में गोली मारी गई थी. बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

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18 जून 2026 (पब्लिश्ड: 07:41 PM IST)
Bharat Bhushan Tiwari Bhojpur Encounter
भरत तिवारी की एनकाउंटर के बाद मौत. (फोटो- X)
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बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर के बाद मौत हो गई. दो दिन से अवैध पिस्टल लहराते उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे. पुलिस के मनाने के बावजूद भरत तिवारी हथियार रखने को राजी नहीं थे. 

पुलिस ने पहले कहा कि वह मानसिक रूप से बीमार हैं. उनके इलाज की व्यवस्था की जा रही है. बाद में उनका एनकाउंटर कर दिया गया. कहा गया कि उन्होंने पुलिस पर हमले की कोशिश की. आत्मरक्षा में पुलिस ने उन पर गोली चलाई. 

लेकिन परिजन का आरोप है कि भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था. पुलिस ने फिर भी उन्हें गोली मारी. यह ‘फर्जी एनकाउंटर’ है और इसमें शामिल पुलिसवालों पर कार्रवाई होनी चाहिए. गांव के लोगों ने भरत का शव रखकर विरोध प्रदर्शन भी किया.

क्या है मामला?

ये पूरी कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक से शुरू होती है. भोजपुर के बिलौती गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी हाथ में पिस्टल लहराते हुए फेसबुक पर वीडियो शेयर कर रहे थे. अपने वीडियो में वो खुद को ‘क्रांतिकारी’ बताते थे. ये भी कहते थे कि उनके जैसे लोगों को अक्सर ‘पागल’ और ‘देशविरोधी’ करार दिया जाता है. उनका इशारा पुलिस के उस दावे की ओर होगा, जिसमें कहा गया कि भरत तिवारी की मानसिक हालत ठीक नहीं है. सरेंडर करने के बाद पुलिस मेंटल हॉस्पिटल में उनके इलाज की व्यवस्था करेगी. 

भोजपुर के एसपी राज ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि शाहपुर पुलिस स्टेशन को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति पिस्तौल लहराते हुए हवा में गोलियां चला रहा है. स्थानीय पुलिस और भोजपुर एसटीएफ कर्मियों ने उसे बार-बार सरेंडर करने के लिए कहा. लेकिन वह पुलिस पर रुक-रुककर गोलियां चलाता रहा. इससे अधिकारियों और जनता के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया. 

पुलिस की एक प्रेस रिलीज में कहा गया कि विभाग के अफसर जब भरत भूषण के घर गए तो पता चला कि वो मानसिक रूप से बीमार हैं. आगे कहा गया कि उन्हें अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पुलिस ने जनता से भी अपील की कि वो भरत के वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने से बचे. 

इधर मौत से एक दिन पहले भरत ने बिहार प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाते हुए फेसबुक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने लिखा कि उन्हें खत्म करने की कोशिश की जा रही है. वो समाज और देश की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ पुलिस की स्पेशल टीमें लगाई जा सकती हैं. 

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इस बीच भरत तिवारी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर दिखे. एक वीडियो में वह चारपाई पर पिस्तौल लिए लेटे हैं. पुलिस के अधिकारी उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बाद उन्हें पुलिस पर ही पिस्टल ताने देखा गया. वीडियो में एक महिला उन्हें शांत करती भी दिख रही है. बताया जा रहा है कि वह उनकी मां हैं. 

एक वीडियो में वह किसी घर की दहलीज पर पिस्टल लिए खड़े हैं. एक पुलिसकर्मी उनके सामने खड़ा होकर उन्हें समझाने की कोशिश कर रहा है. फिर एक वीडियो ऐसा भी सामने आया, जिसे भरत ने ‘लाइव एनकाउंटर’ कहा. 

इसमें वो पुलिसवालों को लगातार गोली चलाने की चुनौती देते दिख रहे हैं. वो आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस उन्हें पागल साबित करने की कोशिश कर रही है. वीडियो में पुलिस उनसे पिस्तौल रखने के लिए कहती है. साथ ही ये भी कहती है कि देश और समाज से जुड़ी उनकी सारी मांगें मान ली जाएंगी. काफी जद्दोजहद के बाद तिवारी मान भी जाते हैं और हथियार रख देते हैं.

क्या मांगें हैं?

भरत तिवारी काफी समय से अपने इलाके के सामाजिक मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बात करते थे. उसके वीडियो बनाते थे. जवनियां गांव में बाढ़ पीड़ितों को बसाने में भ्रष्टाचार का मुद्दा उन्होंने हाल ही में जोर-शोर से उठाया था. ‘लाइव एनकाउंटर’ वाले वीडियो में भरत तिवारी की मांगें भी राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी थीं. अपनी मांगों के बारे में बताते हुए वो कहते, 

आज के बाद कोई भी नेता झूठा वादा नहीं करेगा. वादा करेगा तो उसे पूरा करना होगा. किसी भी शहर-मोहल्ले या कस्बे में विकास का जो भी काम होगा, वो बिना किसी लापरवाही और भ्रष्टाचार के पूरा किया जाएगा. 

वीडियो में इसके बाद पुलिस ने कहा कि उनकी सारी मांगें मान ली जाएंगी. जवाब में भरत तिवारी बोले कि अगर मांगे पूरी हो जाएंगी तो हथियार डाल दिया जाएगा. इसमें कोई समस्या नहीं है. तिवारी वीडियो में चेतावनी देते हैं कि अगर इसके बाद भी उनके साथ छल किया गया तो वो इसका जवाब भी छल से ही देंगे. वीडियो में इसके बाद तिवारी पिस्तौल सरेंडर कर देते हैं. 

हालांकि, पुलिस की कहानी और है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार, 17 जून को पुलिस ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर एसटीएफ कर्मियों ने घेराबंदी करने की कोशिश की. जैसे ही वो तिवारी की ओर बढ़े, उन्होंने उन पर गोली चलाई. इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की. उनके पैरों में गोली लगी, जिसके बाद वो घायल हो गए. उन्हें अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. 

पुलिस का दावा है कि तिवारी पर सिर्फ दो गोलियां चलाई गईं. लेकिन परिवार का कहना है कि भरत को ‘चार से पांच गोलियां’ मारी गई थीं. अपनी शिकायत में परिजन ने पुलिस के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि भरत मानसिक रूप से बीमार थे. कहा कि उनकी कोई दवा नहीं चल रही थी. भरत पढ़े-लिखे और ग्रेजुएट व्यक्ति थे. उनका दिमाग बिल्कुल ठीक था. 

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है.

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