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बिहार के डिप्टी सीएम के करीबी के लिए एक्सप्रेसवे का रूट बदला? 150 लोगों के घर दांव पर

बिहार के पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. जहां स्थानीय लोगों का दावा है कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के करीबी को लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रोजेक्ट में बदलाव किया गया है. अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है. जानिए पूरा मामला.

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शेख नावेद
| शुभम कुमार
15 जून 2026 (अपडेटेड: 16 जून 2026, 04:16 PM IST)
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बिहार के डिप्टी सीएम और सरायरंजन से JDU विधायक विजय कुमार चौधरी (फाइल फोटो-इंडिया टुडे)
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बिहार के समस्तीपुर ज़िले में केंद्र सरकार के पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि डिप्टी CM के करीबी की साढ़े 10 बीघा ज़मीन को बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट बदल दिया गया. और अब इसकी क़ीमत 150 घरों, दर्ज़नों दुकानों और 6 हज़ार छात्रों वाले कॉलेज को चुकानी पड़ रही है.

इंडियन एक्सप्रेस में 15 जून को छपी पत्रकार संतोष सिंह की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में ये मामला खुला. स्थानीय लोगों का दावा है कि एक्सप्रेसवे के करीब 5 किलोमीटर के हिस्से का तय रास्ता मनमाने ढंग से, राजनीतिक दबाव में बदल दिया गया है. लोगों ने आरोप लगाया कि ऐसा बिहार के डिप्टी सीएम और सरायरंजन से JDU विधायक विजय कुमार चौधरी के एक करीबी, और दूर के रिश्तेदार को फ़ायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है.

NHAI के नियम के मुताबिक, जब किसी एक्सप्रेसवे को घनी आबादी वाले इलाकों से बचाकर खेतों और खाली ज़मीन से निकालने की कोशिश हो तो उसे ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे कहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक़, मार्च 2025 के शुरुआती गजट नोटिफिकेशन में रूट अलग था. लेकिन मार्च 2026 के तीसरे गजट नोटिफिकेशन में 48 से 53 किलोमीटर के बीच रूट बदलकर, नए प्लॉट शामिल कर दिए गए. 237 प्लॉट्स में से 224 निजी ज़मीनें हैं. इनमें झखरा का KSR डिग्री कॉलेज भी शामिल है.

डिप्टी CM ने आरोपों पर क्या कहा? 

रिपोर्ट के मुताबिक, विनीत ईश्वर उर्फ ‘बॉबी ईश्वर’ और उनके परिवार की करीब साढ़े 10 बीघा ज़मीन पहले वाले रूट में आ रही थी. लेकिन अगर नया रूट लागू होता है, तो 65 साल पुराने केदार संत रामाश्रय कॉलेज (KSR कॉलेज) का एक हिस्सा, 150 से ज़्यादा घर और कई दुकानें ध्वस्त की जा सकती हैं. इस कॉलेज में 6 हज़ार से ज़्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं. लेकिन उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है.

अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने किसी तरह के राजनीतिक प्रभाव इस्तेमाल नहीं किया है. सरायरंजन के सभी लोग मेरे अपने हैं. एलाइनमेंट बदला है या नहीं, ये पूरी तरह NHAI (नेशनल हाईवेज़ बनाने वाली सरकारी अथॉरिटी) को बताना है. ये मेरा अधिकार क्षेत्र नहीं है.”

वहीं, जिनके लिए कथित तौर पर ये रूट बदले जाने का आरोप है यानी बॉबी ईश्वर ने भी आरोपों को खारिज किया. उनके मुताबिक, बदले गए रास्ते में भी उनकी 6 बीघा ज़मीन आ रही है. अगर उन्हें ज़मीन बचाना होता तो इसे भी बचा लेते. 

इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी बयान आया. उन्होंने कहा, “रूट केंद्र सरकार नहीं बल्कि राज्य सरकार तय करती है. हम इस मामले को देखेंगे और लोगों की चिंताओं का समाधान करेंगे. हमने NHAI और बिहार के रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट से कथित बदलाव की जांच करने को कहा है.”

ये पूरा मामला सरायरंजन इलाक़े का है, जो समस्तीपुर की उजियारपुर लोकसभा सीट में आता है. यहां के सांसद हैं – नित्यानंद राय. जो खुद, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं. मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि वो इस मामले से वाकिफ हैं. उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सामने ये मामला रखा है. 

ये भी पढ़ें: 100 साल पुराने दिल्ली जिमखाना क्लब से सरकार ने वापस मांगी जमीन, 5 जून तक खाली करने का आदेश

NHAI के अधिकारी ने क्या बताया?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक NHAI के बिहार रीजनल ऑफिसर NL येओटकर ने कहा, ‘नियमों के मुताबिक़, एक बार नोटिफिकेशन जारी होने के बाद एलाइनमेंट (तय रास्ता) नहीं बदला जा सकता. अगर ओरिजनल एलाइनमेंट में कोई बदलाव हुआ है, तो ये गंभीर मामला है.’

NHAI ने 24 घंटे बाद खबर को बताया गलत

NHAI ने 16 जून को X पर एक ट्वीट किया. अथॉरिटी ने बताया कि एलाइनमेंट की मंज़ूरी और ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शिता से की गई है. आगे कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों में पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को लेकर जो दावे किए हैं, वो सही नहीं हैं, ये निराधार और भ्रामक हैं. NHAI के मुताबिक सभी ऑप्शन तलाशने के बाद ही 15 जनवरी, 2025 को हुई मीटिंग में एलाइनमेंट के लिए मंजूरी दी गई थी.

NHAI ने कहा है-

*KSR कॉलेज की मेन बिल्डिंग पर इस प्रोजेक्ट का कोई असर नहीं पड़ेगा. इसकी ज़मीन का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा ही अधिग्रहण के दायरे में आ रहा है. 

*मंज़ूर किए गए अलाइनमेंट से लगभग 92 रिहायशी/कमर्शियल इमारतों पर असर पड़ेगा. जो कि रिपोर्ट (इंडियन एक्सप्रेस) में बताई गई इमारतों की संख्या से काफी कम है.

*06 मार्च 2026 को जारी किया गया नोटिफिकेशन उसी अलाइनमेंट से जुड़ा है जिसे AAC ने जनवरी 2025 में मंज़ूरी दी थी. और अलाइनमेंट में बदलाव के बारे में लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद और गुमराह करने वाले हैं.

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