'पश्चिम बंगाल के डीजीपी को हटा दीजिए' I-PAC रेड मामले में ED की सुप्रीम कोर्ट से गुहार
I-PAC Raid Case: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े ठिकानों पर रेड के मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 15 जनवरी को सुनवाई होनी है. उससे पहले ईडी ने यह याचिका दायर करते हुए बंगाल के डीजीपी को सस्पेंड करने की मांग की है.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC रेड मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले पश्चिम बंगाल के DGP को सस्पेंड करने की मांग की है. ED ने 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर करते हुए मांग की है कि बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार को सस्पेंड कर दिया जाए. ED का आरोप है कि डीजीपी समेत राज्य के अन्य प्रमुख पुलिस अधिकारियों ने उसकी रेड में दखल दिया था.
मालूम हो कि पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े ठिकानों पर रेड के मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 15 जनवरी को सुनवाई होनी है. उससे पहले ईडी ने यह याचिका दायर की है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी. पूरा मामला 8 जनवरी को I-PAC के दफ्तर में ED की रेड से जुड़ा हुआ है. ED ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया है कि तलाशी के दौरान ममता बनर्जी और बंगाल के टॉप पुलिस अधिकारियों ने रेड में दखल दी. रेड मार रहे अधिकारियों के काम में रुकावट डाली. ममता बनर्जी पर आरोप है कि वह ऑफिस से कुछ फाइलें लेकर गईं, जिससे जांच में बाधा आई.
ED के अधिकारियों पर FIRअपनी याचिका में, ED ने तर्क दिया है कि तलाशी वाली जगह पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी से अधिकारियों के लिए डराने वाला माहौल बना. इससे एजेंसी स्वतंत्र रूप से अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं कर पाई. एजेंसी ने जांच के दौरान राज्य प्रशासन पर बार-बार रुकावट डालने और सहयोग न करने का भी आरोप लगाया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा, ED ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार, राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और दक्षिण कोलकाता के डिप्टी कमिश्नर प्रियब्रत रॉय को आरोपी बनाया है.
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घटना के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी. ED ने इन FIR को भेदभावपूर्ण बताते हुए इन्हें रद्द करने की भी कोर्ट से मांग की थी. साथ ही एजेंसी ने पूरे मामले की CBI जांच कराने की भी मांग की. कहा कि राज्य सरकार के हस्तक्षेप को देखते हुए एक निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच की जरूरत है. बहरहाल अब नजरें सुप्रीम कोर्ट पर है कि वह इस केस पर क्या फैसला सुनाता है.
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