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मम्मी-पापा 10 घंटे से थे डिजिटल अरेस्ट, 8वीं के छात्र ने समझाया नहीं समझे, फिर ऐसे जाल से निकाला

Bareilly Digital Arrest Case: जालसाजों ने बड़ी चालाकी से एक दंपति को अपनी बातों में फंसा लिया. आतंकवादी घटनाओं में शामिल होने की बात कहकर दोनों को डरा लिया और लगभग 10 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा. आरोपी बस अपने मंसूबों में कामयाब होने वाले थे लेकिन घर में मौजूद आठवीं क्लास में पढ़ने वाले छात्र ने दंपति को धोखाधड़ी की घटना से बचा लिया .

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शुभम कुमार
| कृष्ण गोपाल राज
10 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 10 अप्रैल 2026, 03:06 PM IST)
bareily digital arrest
बेटे ने अपने परिवार को लाखों की ठगी से बचाया. (फोटो-इंडिया टुडे)
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साइबर फ्रॉड. बहुत ही सरल दो अंग्रेजी के शब्द. जिन्हें समझना उतना ही मुश्किल. प्रीकॉशन ही साइबर क्राइम से बचने का एक मात्र विकल्प है (cyber crime in India). जो एक बार आप इसकी गिरफ्त में आ गए तो नुकसान होना तय है. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक परिवार इसके जाल में फंसते-फंसते रह गया, आठवीं में पढ़ने वाले एक बच्चे ने बड़ी समझदारी से इस जाल से सबको बाहर निकाल लिया.

बरेली के प्रेम नगर थाना क्षेत्र के बानथाना सुरखा इलाके में एक दंपति अपने घर में थे. 6 अप्रैल की दोपहर थी. आजतक के मुताबिक़ उन्हें एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया. उन्होंने कॉल उठा लिया. आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी NIA का अधिकारी बताया. फिर दंपति को डराना शुरू किया. आरोप लगाया कि उनका नंबर किसी आतंकी गतिविधि और करोड़ों के घोटाले में इस्तेमाल हुआ है. साइबर ठग ने पुलिस की यूनिफॉर्म पहन रखी थी और उसकी दाढ़ी थी. उसने विक्टिम को वारंट दिखाया. उसके बाद उन्हें 10 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा. 

इस दौरान उनकी हर एक गतिविधि पर नज़र रखी गई. अगले 10 घंटे तक पति-पत्नी एक सेकंड के लिए भी फोन से दूर नहीं हो सकते थे. घर से बाहर नहीं जा सकते थे. यहां तक कि खाते, पीते, सोते हर वक़्त वीडियो कॉल ऑन रखी गई. ठगों ने उन्हें बातों में उलझाकर उनका फ़ोन हैक किया और बैंक की डिटेल्स निकाल ली. पुलिस ने बताया कि ठगों ने उनसे आधार कार्ड,  प्रॉपर्टी डिटेल्स और बैंक डिटेल्स मांगे थे. बताया गया कि दंपति के खाते में लाखों रुपये थे, जिसके लिए ठगों ने उन्हें घंटों तक मेंटली टॉर्चर किया. 

फिर कहानी में एंट्री हुई उनके बेटे की, जो आठवीं क्लास में पढ़ाई करता है. उसने अपने पिता संजय सक्सेना को ये बताया कि वो साइबर फ्रॉड के शिकार हो चुके हैं. लेकिन ठगों ने उनके मन में इतना डर भर दिया कि वो इस बात को मानने को तैयार नहीं हुए. लेकिन बेटा पीछे नहीं हटा. उसने अपने ‘इंस्टिंक्ट’ पर भरोसा किया. देर रात को साहस करते हुए उसने फ़ोन को एयरप्लेन मोड पर डाल दिया. ये करते ही ठगों का कनेक्शन लॉस्ट हो गया. ठगों ने अभी तक पैसे नहीं निकाले थे, जिससे परिवार का नुकसान होने से बच गया. बेटे ने बताया कि उसने दाढ़ी से ठगों को पहचाना था. 

फिर अगली सुबह यानी 7 अप्रैल को परिवार प्रेम नगर थाने पहुंचा. उन्होंने पुलिस को पूरी कहानी सुनाई. थाने में फ़ोन ऑन करते ही ठगों का फिर से कॉल आया. पुलिस ने फ़ोन उठाकर आरोपियों को ढंग से हड़काया. बरेली सिटी के एसपी मानुष पारीक ने बताया, 

‘परिवार ने ठगों के साथ अपनी कई डिटेल्स शेयर कर दी थीं. वहीं बच्चा अपने पिता से कह रहा था कि ये रॉन्ग नंबर है, इसे ब्लॉक कर दो. फिर बच्चे की सूझबूझ ने ठगी से बचा लिया. परिवार की तहरीर के आधार पर IT एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है.’

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डिजिटल अरेस्ट क्या होता है? इसमें सलाखें नहीं होतीं, लेकिन आप ‘आज़ाद’ भी नहीं होते. साइबर क्रिमिनल अज्ञात नंबर से फोन कर लोगों को डराते हैं. उन्हें वीडियो कॉल के ज़रिए टॉर्चर किया जाता है. वीडियो कॉल के ज़रिए 24 घंटे निगरानी में रहना पड़ता है इसलिए इसे अरेस्ट कहते हैं. अगर आप कभी भविष्य में साइबर फ्रॉड के शिकार बनते हैं तो नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.   

वीडियो: खर्चा-पानी: दिल्ली के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड की पूरी कहानी

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