अलंकार अग्निहोत्री की मां भी सरकारी नौकरी से दे चुकी हैं इस्तीफा, परिवार ने वजह भी बताई
Alankar Agnihotri Resignation Row: अलंकार मूल रूप से यूपी के कानपुर के रहने वाले हैं. उनके ताऊ का कहना है कि अलंकार ने अपने पद से इस्तीफा देकर परिवार के मूल्यों को ही आगे बढ़ाया है.

उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के मामले में नई जानकारियां सामने आई हैं. अलंकार के परिवार वालों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, जब उनके घर के किसी सदस्य ने नौकरी से इस्तीफा दिया है. इससे पहले अलंकार की मां भी आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने पर अपनी नौकरी से इस्तीफा दे चुकी हैं.
मालूम हो कि अलंकार मूल रूप से यूपी के कानपुर के रहने वाले हैं. उनके ताऊ एस.के. सिंह रिटायर्ड विंग कमांडर हैं और कानपुर के श्याम नगर में रहते हैं. उन्होंने आजतक से बात करते हुए बताया कि उनके परिवार में हमेशा आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखा गया है. उनका कहना है कि उनके छोटे भाई विजय की मौत के बाद उनकी पत्नी यानी अलंकार की मां बैंक में नौकरी करती थीं.
बचपन में हो गया था पिता का निधनउन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा में 21 साल कैशियर के रूप में काम किया. लेकिन एक बार उन पर मैनेजमेंट स्तर पर अनावश्यक दबाव बनाने और काम न करने के आरोप लगाए गए. इसके बाद अलंकार की मां ने अपने आत्मसम्मान को बचाने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. एस.के. सिंह ने आगे बताया कि अलंकार के पिता का निधन तभी हो गया था, जब वह 10 साल के थे.
ताऊ का कहना है कि अलंकार ने अपने पद से इस्तीफा देकर परिवार के मूल्यों को ही आगे बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. अलंकार का विरोध बटुकों के साथ कथित तौर पर शिखा पकड़कर किए गए व्यवहार को लेकर है. एस.के. सिंह ने यह भी बताया कि उनके परिवार का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. कहा कि अलंकार ने अपनी मेहनत के बल पर अपने भाइयों को स्थापित किया और फिर खुद भी प्रशासनिक सेवा में नौकरी पाई.
'UGC बिल को लेकर चिंतित थे'परिवार वालों का कहना है कि अलंकार नए यूजीसी बिल को लेकर काफी चिंतित थे. उनका मानना था कि इससे भविष्य में छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. परिवार के मुताबिक अगर यह किसी अन्य समुदाय या धर्म के लोगों के साथ होता, तब भी वह ऐसा ही विरोध दर्ज कराते. फिलहाल अलंकार की पत्नी समेत उनके पूरे परिवार ने उनके फैसले पर समर्थन जताया है. उनका कहना है कि वह अलंकार के फैसले पर साथ खड़े हैं. साथ ही परिवार का यह भी कहना है कि अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई उचित नहीं थी.
क्या है पूरा मामला?बताते चलें कि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. उनका कहना था कि वह UGC के नए नियमों को लेकर इस्तीफा दे रहे हैं. इन नियमों से सवर्ण समाज के छात्रों के अधिकार प्रभावित होंगे. साथ ही उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की शिखा यानी चोटी खींचे जाने की घटना को भी इस्तीफे का एक कारण बताया था. उनका सोशल मीडिया पर एक फोटो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह अपने आवास के बाहर एक पोस्टर लिए खड़े दिखे. पोस्टर पर लिखा था,
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इस्तीफे के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं. सरकारी आदेश के मुताबिक, सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को पहली नजर में दोषी मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत ये कार्रवाई की है. उनके खिलाफ बरेली मंडल के कमीश्नर को जांच अधिकारी बनाया गया है. जांच पूरी होने तक अलंकार अग्निहोत्री को शामली डीएम ऑफिस में अटैच किया गया है.
वीडियो: UGC मामले में इस्तीफा देने वाले SDM अलंकार अग्निहोत्री की पूरी कहानी

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