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यूपी में GST अफसर का इस्तीफा विभाग को नहीं मिला, शासन ने जांच रिपोर्ट मांगी

मामले पर शासन का रुख साफ है कि इस्तीफा मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा.

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Ayodhya GST Deputy Commissioner Prashant Kumar Singh Announces Resignation Amid Fake Disability Certificate Probe
प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा सीधे राज्यपाल को भेजा है. (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
29 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:55 AM IST)
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अयोध्या में राज्य कर विभाग (GST) के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था. अब खबर है कि उनका इस्तीफा अभी तक आधिकारिक रूप से शासन या राज्य कर आयुक्त कार्यालय तक नहीं पहुंचा है.

इंडिया टुडे से जुड़े आशीष श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा सीधे राज्यपाल को भेजा है. उनका इस्तीफा उनके विभाग कार्यालय तक नहीं पहुंचा है. अधिकारी ने कहा था कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा सीएम योगी के खिलाफ की गई टिप्पणियों से वो आहत हैं और अपना नमक अदा करने के लिए ये कदम उठा रहे हैं.

जानकारी के अनुसार इस मामले पर शासन का रुख साफ है कि इस्तीफा मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा.

भाई ने नौकरी में फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया

इस बीच, मामले में एक बड़ा ट्विस्ट आया है. प्रशांत कुमार सिंह के सगे बड़े भाई डॉक्टर विश्वजीत सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. डॉक्टर विश्वजीत का दावा है कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र (विकलांगता प्रमाणपत्र) के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी. उन्होंने बताया कि प्रशांत ने खुद को 40% आंख की बीमारी दिखाकर 2009 में मऊ के सीएमओ से ये प्रमाणपत्र बनवाया था. लेकिन जिस आंख की बीमारी के आधार पर प्रमाणपत्र लिया गया, वो बीमारी आमतौर पर 50 वर्ष की उम्र से पहले नहीं होती. जबकि प्रशांत की जन्मतिथि 1978 है.

डॉक्टर विश्वजीत ने 20 अगस्त 2021 को इस प्रमाणपत्र की जांच की मांग की थी. इसके बाद मंडलीय चिकित्सा परिषद ने प्रशांत को दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाया, लेकिन वो कभी उपस्थित नहीं हुए. उन्होंने सोशल मीडिया पर संबंधित पत्र भी साझा किए हैं, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए गए थे. मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत दर्ज की जा चुकी है.

प्रशांत को 2021 से अब तक तीन बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा. जांच में कार्रवाई और वेतन/लाभों की रिकवरी की आशंका के बीच ही इस्तीफे की घोषणा को जोड़ा जा रहा है. डॉक्टर विश्वजीत का कहना है कि इस्तीफा जांच से बचने का तरीका हो सकता है.

शासन ने जांच के आदेश दिए

शासन ने अब राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह की पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है. जांच में दिव्यांग प्रमाणपत्र के आरोप और अन्य सभी बिंदुओं को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं. मऊ के सीएमओ से भी इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.

प्रशांत का बैकग्राउंड भी चर्चा में है. वो पहले अमर सिंह की पार्टी लोक मंच में जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और बाद में पीसीएस परीक्षा पास कर राज्य कर विभाग में शामिल हुए थे. ये पूरा मामला अब सियासी और प्रशासनिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां इस्तीफे का ड्रामा और फर्जी प्रमाणपत्र के आरोप एक साथ जुड़ गए हैं. आगे की जांच से कई और खुलासे हो सकते हैं.

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