'साबित करो सच्चे हिन्दू हो... 40 दिन में पूरी हो डिमांड', अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी को दे दी खुली चुनौती
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान को लेकर हुआ विवाद अब नया मोड़ लेता दिख रहा है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने CM Yogi Adityanath को खुद को सच्चा हिन्दू साबित करने के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने कई डिमांड भी उनके सामने रखी हैं.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सच्चे हिन्दू होने का प्रमाण मांगा है. साथ ही उन्होंने सीएम योगी के सामने कुछ मांगें भी रखी हैं. चेतावनी दी है कि अगर 40 दिन में इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो पूरा संत समाज योगी आदित्यनाथ को नकली हिन्दू घोषित कर देगा. अविमुक्तेश्वरानंद के ऐलान के बाद मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान को लेकर हुआ विवाद अब नया मोड़ लेता दिख रहा है.
आजतक से जुड़े रोशन जायसवाल की रिपोर्ट के अनुसार पूरे विवाद के बाद धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अब वापस वाराणसी में अपने विद्या मठ पर आ चुके हैं. यहां मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा,
लगता है स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बन्दी कानून की मांग करना सबसे बडा अपराध हो चुका है. तभी तो जब-जब जिस-जिस ने यह आवाज उठाई है, सरकारों ने उसे क्रूरता पूर्वक रौंद दिया. उदाहरण 1966 का दिल्ली का गोरक्षा आन्दोलन है, जिसमें तत्कालीन सरकार ने जाने कितने गोभक्तों-सन्तों को गोलियों से भून दिया. और धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज सहित प्रमुख सनातनियों पर भी तरह-तरह के अत्याचार किये. अब उसी आवाज को बुलन्द करने के कारण हमें और हमारा सहयोग कर रहे गोभक्तों पर भान्ति-भान्ति के अत्याचार और अन्याय हो रहे हैं, जिन्हें आप सब देख ही रहे हैं. यहां तक कि हमसे हमारे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा जा रहा है और हमारी छवि को सनातनी जनता के बीच धूमिल करने के तरह-तरह के प्रयास किये जा रहे हैं. इन सबका नेतृत्व योगी आदित्यनाथ अपने विश्वस्तों रामभद्राचार्य आदि के माध्यम से कर रहे हैं.
इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हम इन सबसे परेशान न होते हुए सभी सनातनियों के साथ मिलकर गोरक्षा के अपने संकल्प को दृढतापूर्वक बढाते रहेंगे. इसके बाद उन्होंने सीएम योगी से उनके हिन्दू होने का प्रमाण मांगा. उन्होंने योगी को चुनौती देते हुए कहा,
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी, आपने हमसे हमारे पद और परम्परा का प्रमाण पत्र मांगा. हमने सहज भाव से वह आपको सौंप दिया. क्योंकि सत्य को साक्ष्य से भय नहीं होता. किन्तु अब समय 'प्रमाण' लेने का नहीं, बल्कि आपके 'प्रमाण' देने का है. सम्पूर्ण सनातनी समाज अब आपसे आपके 'हिन्दू' होने का साक्ष्य मांगता है. हिन्दू होना केवल भाषणों या भगवे तक सीमित नहीं है, इसकी कसौटी 'गो-सेवा' और 'धर्म-रक्षा' है.
इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के सामने अपनी मांगें रखीं, जो कि इस प्रकार हैं-
- गोमाता को सम्मान: गोमाता को 'राज्यमाता' का आधिकारिक दर्जा. जिस प्रकार हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने देशी गायों को 'राज्यमाता' घोषित किया और जिस तरह नेपाल में गाय 'राष्ट्रीय पशु' है, उसी तर्ज पर उत्तरप्रदेश में भी गोमाता को 'राज्यमाता' का सम्मान मिले.
- मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबन्धः उत्तरप्रदेश की पवित्र धरती से होने वाले हर प्रकार के मांस निर्यात (Bovine Meat) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए.
आगे अविमुक्तेश्वरानंद ने निर्यात के नाम पर गोवंश की हत्या के खेल का आरोप लगाया. उन्होंने जारी प्रेस विज्ञप्ति में सरकारी आकड़ों के हवाले से कुछ फैक्ट्स रखे, जिसके मुताबिक भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तरप्रदेश की हिस्सेदारी 40% से अधिक है. उन्होंने पूछा कि क्या 'रामराज्य' का सपना गायों के खून से कमाए गए विदेशी पैसों पर आधारित होगा? उन्होंने कहा,
निर्यात का सारा डेटा 'भैंस के मांस' (Buffalo Meat) के नाम पर दर्ज होता है, किंतु यह एक खुला सत्य है कि बिना DNA परीक्षण के इस मांस की आड़ में गोवंश को काटा और भेजा जा रहा है. राज्य में भैंसों की संख्या और मांस निर्यात की मात्रा में भारी अन्तर है. जब तक हर बुचड़खाने और कंटेनर का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य नहीं होता, तब तक यह सरकार द्वारा दी गई 'मौन स्वीकृति' है.
इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा,
हम शासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए 40 दिनों का समय दे रहे हैं. यदि इन 40 दिनों के भीतर गोमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं मिला और निर्यात बन्दी का शासनादेश जारी नहीं हुआ, फिर परिणाम गम्भीर होंगे.
उन्होंने आगे सरकार और मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा,
यदि 40 दिन व्यर्थ गए, तो आगामी 10-11 मार्च को लखनऊ में पूरे सन्त समाज का समागम होगा. उस दिन हम मुख्यमन्त्री जी को 'नकली हिन्दू' घोषित करने को बाध्य होंगे. जो सरकार गोवंश की रक्षा नहीं कर सकती, उसे हिन्दू कहलाने का नैतिक अधिकार नहीं है. और उस योगी को तो बिलकुल नहीं, जो गुरु गोरक्षनाथ की पवित्र गद्दी का खुद को महंत कहता हो.
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अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि यह केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि सनातन की आत्मा की रक्षा का प्रश्न है. उत्तराखण्ड ने 'राष्ट्रमाता' का प्रस्ताव दिया, महाराष्ट्र ने 'राज्यमाता' बनाया तो फिर भगवान राम और कृष्ण की धरती 'उत्तरप्रदेश' मांस निर्यात का केन्द्र क्यों बनी हुई है? उन्होंने सीएम को चेतावनी देते हुए कहा कि बस कुछ समय की और प्रतीक्षा है. निर्णय अब आपके हाथ में है कि आप सन्तों के आशीर्वाद के पात्र बनेंगे या इतिहास के कठघरे में नकली हिन्दू के रूप में दर्ज होंगे.
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