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NSG की डराने वाली ट्रेनिंग, दूसरे कॉलम में ही अंतिम संस्कार का तरीका पूछते हैं, योगी के मंत्री ने सब बता दिया

NSG ने Asim Arun को ट्रेनिंग में इस शर्त पर शामिल होने दिया था कि वो स्वयं इस कोर्स में गए हैं, अभी तक कोई IPS इसमें शामिल नहीं हुआ है. और वो किसी रियायत की आशा ना करें.

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2 दिसंबर 2024 (अपडेटेड: 2 दिसंबर 2024, 09:57 AM IST)
Asim Arun
मंत्री ने बताया है कि NSG की ट्रेनिंग डराने वाली होती है. (तस्वीर: सोशल मीडिया)
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उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता असीम अरुण (Asim Arun) ने नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की ट्रेनिंग के बारे में बताया है. उन्होने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर लिखा है कि ये ट्रेनिंग डराने वाली होती है. मसलन कि इस कोर्स के एडमिशन फॉर्म के पहले कॉलम में अपना नाम लिखना होता है. और दूसरे कॉलम में ये बताना होता है कि अगर ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई तो अंतिम संस्कार किस विधि से करानी है. NSG को ब्लैक कैट कमांडो के नाम से जाना जाता है. इसे देश के भीतर सुरक्षा के लिए काम करने वाली आतंकवाद विरोधी दस्ते के तौर पर जाना जाता है.

असीम अरुण बताते हैं,

"NSG ब्लैक कैट कमांडो का कोर्स कठीन भी था और डराने वाला भी. इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि एडमिशन फॉर्म में पहला कालम था- नाम. और दूसरा- यदि प्रशिक्षण में आप की मृत्यु हो गई तो अंत्येष्टि किस विधि से चाहेंगे. UP पुलिस से हम 33 लोग थे, सभी PAC के कांस्टेबल और मैं. NSG ने मुझे ट्रेनिंग में इस शर्त पर शामिल होने दिया था कि आप स्वयं इस कोर्स में आ रहे हो, अभी तक कोई IPS इसमें शामिल नहीं हुआ है. हमसे किसी रियायत की आशा मत करना. रियायत के लिए तो गए भी नहीं थे हम."

ये भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में कैसा रहा था आपातकाल का दौर?

PAC उत्तर प्रदेश की पुलिस यूनिट है. उन्होंने आगे लिखा,

"कठोर प्रशिक्षण और कूद-फांद के बीच 5 से 7 मिनट का रेस्ट होता था. इसी में लाइन में लग कर चाय-बिस्कुट लेना होता था. तीन-चार दिन सामान्य रूप से यह क्रम चलता रहा. फिर मेरे कुछ PAC के सहपाठी आए और बोले कि, सर आप लाइन में न लगा करें, हमें बुरा लगता है. मैंने कहा इसमें तो कोई बुरा मानने वाली बात नहीं है. सहपाठी माने नहीं और मेरे लिए यह रियायत करने लगे."

अमृतसर के गोल्डेन टेंपल में हुए ब्लू स्टार ऑपरेशन के बाद NSG बनाया गई थी. 16 अक्टूबर 1984 को इसका गठन किया गया था. 

Asim Arun कौन हैं?

असीम अरुण कानपुर में पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात थे. उन्होंने अपनी स्वेच्छा से रिटायरमेंट (VRS) लिया और चुनावी राजनीति में शामिल हो गए. उन्होंने साल 2022 में भाजपा के टिकट पर कन्नौज से विधानसभा का चुनाव लड़ा. उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के नेता अनिल कुमार से हुआ. असीम अरुण को इस चुनाव में 6 हजार वोटों से जीत मिली थी. इसके बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार में उनको समाज कल्याण राज्यमंत्री बनाया गया है. इनके पिता राम अरुण दो बार UP के DGP रह चुके हैं.

वीडियो: तारीख: एक और 'कंधार' होने वाला था पर NSG के जांबाजों ने होने नहीं दिया ?

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