साथ में रह सकते हैं समलैंगिक पार्टनर, पैरेंट्स ना दें दखल, हाई कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है
आरोप है कि पिता अपनी बेटी को जबरदस्ती अपने साथ ले गए और उनके समलैंगिक रिश्ते के कारण उनको परेशान किया. Andhra Pradesh High Court ने माता-पिता को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का आदेश दिया है.

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने कहा है कि समलैंगिक जोड़ों को साथ रहने का अधिकार है. और इसमें माता-पिता को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है. जस्टिस आर रघुनंदन राव और जस्टिस के महेश्वर राव की खंडपीठ ने एक लेस्बियन जोड़े से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके पिता ने उनको अपने समलैंगिक साथी के साथ रहने से रोका. और उनकी इच्छा के खिलाफ जाकर उनको हिरासत में रखा. इस दौरान उनको नरसीपटनम में उनके घर पर रखा गया था.
याचिकाकर्ता पिछले एक साल से विजयवाड़ा में रह रही थीं. उनके पिता ने जब उन्हें उनकी इच्छा के बिना घर में रखा तो उनके पार्टनर ने पुलिस में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था. इसके बाद पुलिस ने उनको उनके पिता के घर से खोज निकाला. उन्हें 15 दिनों के लिए एक कल्याण गृह में रखा गया. इसके बाद उन्होंने पुलिस को बयान दिया कि वो बालिग हैं और अपने समलैंगिक पार्टनर के साथ रहना चाहती हैं.
17 दिसंबर को कोर्ट ने याचिकाकर्ता के माता-पिता को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि उनकी बेटी वयस्क है और अपने फैसले खुद ले सकती हैं.
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इससे पहले सितंबर महीने में भी याचिकाकर्ता ने अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके माता-पिता उनके रिश्ते और अन्य मुद्दों को लेकर उन्हें परेशान कर रहे हैं. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद वो विजवाड़ा आ गई थीं. काम पर जाने लगीं और अपने पार्टनर से भी मिलने लगीं.
लेकिन इसके बाद उनके पिता फिर से विजयवाड़ा आए और अपनी बेटी को जबरन गाड़ी में ले गए. याचिकाकर्ता के वकील जदा श्रवण कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता अपने माता-पिता और परिवार के अन्य लोगों के साथ नहीं रहना चाहती हैं. और अगर वो उन्हें उनके पार्टनर के साथ रहने देते हैं तो वो अपने पिता के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस ले लेंगी.
कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के परिवार के सदस्यों के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जानी चाहिए क्योंकि वो शिकायत वापस लेने को तैयार हैं. हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका के अलावा, पिता ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के पार्टनर और उनके परिवार के लोगों ने उनकी बेटी का अपहरण किया है.
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