ऑनलाइन अश्लीलता रोकने के लिए सरकार ला रही है नया नियम, अब ये नहीं कर सकते?
ड्राफ्ट कोड सभी डिजिटल कंटेंट को थीम और मैसेज के आधार पर लेबल करने का प्रावधान करता है. मार्च 2025 में कोर्ट ने ऑनलाइन अश्लील कंटेंट पर चिंता जताई थी, खासकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जैसे रणवीर अलाहाबादिया और समाय रैना से जुड़े विवादों के बाद.

केंद्र सरकार ऑनलाइन अश्लीलता (obscenity) को नियंत्रित करने के लिए नए ड्राफ्ट नियम लाने जा रही है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने इन्हें IT Act, 2000 की धारा 87 (1) के तहत प्रस्तावित किया है. ये नियम मुख्य रूप से डिजिटल कंटेंट में अश्लीलता, हिंसा और अनुचित कंटेंट को रोकने के लिए लाए जा रहे हैं.
ये कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आया है. मार्च 2025 में कोर्ट ने ऑनलाइन अश्लील कंटेंट पर चिंता जताई थी, खासकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जैसे रणवीर अलाहाबादिया और समाय रैना से जुड़े विवादों के बाद. कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को करेगी.
सरकार का कहना है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए, अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंध लगाएंगे.
ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 के अनुसार, कोई भी डिजिटल कंटेंट (जैसे ऑनलाइन वीडियो, पोस्ट, इमेज आदि) तब अश्लील (obscene) माना जाएगा, जब वो कामुक (lascivious) हो, काम-वासना या प्रुरिएंट इंटरेस्ट को आकर्षित करे. या इसका प्रभाव ऐसा हो कि वो लोगों को भ्रष्ट और अधर्मी (deprave and corrupt) बनाए.
ड्राफ्ट नियमों में कहा गया है कि डिजिटल कंटेंट में निम्नलिखित नहीं होना चाहिए:
- शिष्टाचार या शालीनता के विरुद्ध हो
- किसी जाति, नस्ल, रंग, संप्रदाय, धर्म या राष्ट्रीयता का मजाक उड़ाए या उनका अपमान करें
- किसी धर्म या समुदाय पर हमला करें, धार्मिक समूहों के प्रति घृणा या तिरस्कार दिखाए, या सांप्रदायिक भावनाएं भड़काए
- अश्लील, मानहानिकारक, जानबूझकर झूठा, आपत्तिजनक संकेत या आधा-सच (हाफ-ट्रुथ) वाला कंटेंट हो
- लोगों को अपराध करने, अव्यवस्था फैलाने, हिंसा करने, कानून तोड़ने के लिए उकसाए या हिंसा/अश्लीलता को महिमामंडित करें
- हिंसा, अश्लीलता या अपराध को आकर्षक, वांछनीय या ठीक दिखाए
- अश्लील, घटिया, अशोभनीय, घृणित या आपत्तिजनक विषय-वस्तु प्रस्तुत करे
- किसी व्यक्ति, समूह, समाज के किसी वर्ग, सार्वजनिक या नैतिक जीवन की निंदा, बदनामी या कीचड़ उछाले
- किसी जातीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह के प्रति तंज, व्यंग्य, कटाक्ष या घमंडी रवैया दिखाए
- महिलाओं का अपमान करें. उनकी शक्ल, शरीर, अंगों को इस तरह दिखाए या प्रस्तुत करें कि वो अश्लील, अपमानजनक लगे. महिलाओं का ऑब्जेक्टिफिकेशन करे या हानिकारक स्टीरियोटाइप को बढ़ावा दे, जिससे सार्वजनिक नैतिकता को ठेस पहुंचे या समाज का नैतिक पतन हो
- बच्चों का अपमान या शोषण करे
- बच्चों के लिए बने कंटेंट में गाली-गलौज, अश्लील भाषा या स्पष्ट हिंसा दिखाए
- दिव्यांगजनों (पर्सन्स विद डिसएबिलिटी) का अपमान करें या उनका मजाक उड़ाए
ये ड्राफ्ट कोड सभी डिजिटल कंटेंट को थीम और मैसेज के आधार पर लेबल करने का प्रावधान करता है. जिसमें हिंसा, अश्लीलता, नग्नता, सेक्स, भाषा, ड्रग्स और हॉरर जैसी श्रेणियां शामिल हैं. इसके अलावा, सभी डिजिटल कंटेंट को उम्र के अनुसार वर्गीकरण करने का प्रस्ताव है:
- U (सभी उम्र के लिए),
- 7+ (7 वर्ष से अधिक),
- 13+ (13 वर्ष से अधिक),
- 16+ (16 वर्ष से अधिक),
- Adult-only (केवल वयस्कों के लिए),
- और कुछ विशेष श्रेणियां जैसे डॉक्टरों या वैज्ञानिकों जैसे पेशेवरों के लिए
कोड के मुताबिक सभी डिजिटल कंटेंट पर शुरुआत में ही प्रमुख कंटेंट डिस्क्रिप्टर और एज रेटिंग स्पष्ट रूप से दिखानी होगी. ताकि यूजर्स को इसके बारे में जानकारी हो, और वो इसे देखने के लिए सही फैसला ले. U/A 13+ या उससे ऊपर रेटेड कंटेंट के लिए पैरेंटल कंट्रोल मैकेनिज्म अनिवार्य होंगे. जबकि एडल्ट-ओनली कंटेंट के लिए एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करना होगा. इन नियमों के साथ-साथ IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के सभी प्रावधान भी लागू होंगे.
वीडियो: IT एक्ट की धारा 66ए को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या कहा?

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