हरियाणा के ढाणी भोजराज में 10 बेटियों के बाद बेटे का जन्म, परिवार खुश, समाज पर बेटा-बेटी की सोच पर सवाल
बेटा चाहने की बात उन्होंने कभी छिपाई नहीं, लेकिन बेटियों को बोझ भी नहीं माना. संजय के मुताबिक कुछ बड़ी बेटियां खुद भी भाई चाहती थीं. उन्होंने कहा कि उनकी सीमित कमाई के बावजूद वह बेटियों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दे रहे हैं. जो हुआ, भगवान की मर्जी से हुआ और वे अपने पूरे परिवार के साथ खुश हैं.

हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकली ये खबर सोशल मीडिया पर इसलिए नहीं छाई कि यहां कोई सेलिबिटी है, बल्कि इसलिए क्योंकि ये खबर हमारे समाज की सोच से सीधा सवाल करती है.
फतेहाबाद जिले के ढाणी भोजराज गांव में रहने वाले संजय कुमार और उनकी पत्नी की शादी को 19 साल हो चुके हैं. इन 19 सालों में उनके घर एक नहीं, दो नहीं, बल्कि 10 बेटियों ने जन्म लिया. अब 11वीं संतान के रूप में परिवार में एक बेटे का जन्म हुआ है. बेटे का नाम रखा गया दिलखुश, और खास बात ये कि ये नाम उसकी दसों बहनों ने मिलकर चुना.
हाई रिस्क डिलीवरी, मां और बच्चा सुरक्षितNDTV की रिपोर्ट के मुताबिक 4 जनवरी को जींद जिले के उचाना कस्बे के एक अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ. डॉक्टर के मुताबिक यह हाई रिस्क नॉर्मल डिलीवरी थी. डिलीवरी के दौरान मां को तीन यूनिट खून चढ़ाना पड़ा, लेकिन फिलहाल मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं. अस्पताल से छुट्टी के बाद परिवार गांव लौट आया है और घर में खुशियों का माहौल है.
दिहाड़ी मजदूर पिता, लेकिन पढ़ाई में कोई कमी नहींसंजय कुमार दिहाड़ी मजदूरी करते हैं. आमदनी सीमित है, लेकिन इरादे बड़े हैं. उन्होंने अपनी सभी बेटियों को स्कूल भेजा है. सबसे बड़ी बेटी सरीना करीब 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है. उसके बाद अमृता 11वीं में है. इसके अलावा सुशीला, किरण, दिव्या, मन्नत, कृतिका, अमनिश, लक्ष्मी और वैशाली हैं. पढ़ाई के साथ-साथ घर की जिम्मेदारियों में भी सभी बेटियां हाथ बंटाती हैं.
वीडियो वायरल हुआ, फिर शुरू हुई बहसयह मामला तब ज्यादा चर्चा में आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ. वीडियो में संजय कुमार अपनी दस बेटियों के नाम गिनाते वक्त थोड़ी उलझन में नजर आए. इसके बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया. कुछ लोगों ने बेटे की चाह और पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाए. कई यूजर्स ने मां के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और इसे जेंडर बायस का उदाहरण बताया.
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पिता ने क्या कहाहालांकि संजय कुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि,
हरियाणा में सोच बनाम आंकड़े"हम बेटा चाहते थे और मेरी कुछ बड़ी बेटियों को भी भाई की चाह थी. मैं अपनी सीमित कमाई में बेटियों को अच्छी शिक्षा दे रहा हूं. जो हुआ, वो भगवान की मर्जी से हुआ और मैं इससे बहुत खुश हूं."
यह घटना हरियाणा में बेटे और बेटी को लेकर समाज की सोच पर एक बार फिर बहस छेड़ रही है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 2025 तक सेक्स रेशियो सुधरकर 923 तक पहुंचा है. लेकिन जमीनी हकीकत ये भी है कि बेटे की चाह अब भी कई घरों में जिंदा है.
आखिरी बातकुल मिलाकर, इस घर में आज किलकारियां गूंज रही हैं. बेटियां अपने छोटे भाई को गोद में लेकर खुश हैं और मां सुरक्षित है. लेकिन इस खुशी के बीच समाज के लिए एक सवाल भी खड़ा है. सवाल ये कि क्या हम अब भी बच्चे को उसके जेंडर से तौलते रहेंगे या सिर्फ इतना काफी होगा कि बच्चा स्वस्थ है और परिवार खुश है.
बेटा होना खुशी की बात है, लेकिन बेटी होने पर इंतजार खत्म होना चाहिए. असली बदलाव वहीं से शुरू होगा.
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