Gen Z में किडनी स्टोन की समस्या ज़्यादा क्यों हो रही है?
सबसे बड़ी वजह Gen Z की लाइफस्टाइल है. सुस्त लाइफस्टाइल, कम पानी पीना और ओबेसिटी से किडनी स्टोन का रिस्क बढ़ता है.

एक बर्तन लीजिए और उसमें थोड़ा नमक डालिए. नमक पानी में घुल जाएगा. ऐसा लगातार करते रहिए. एक समय ऐसा आएगा, जब नमक नहीं घुलेगा. तब गिलास के अंदर छोटे-छोटे कण जमा होने लगेंगे. धीरे-धीरे यही कण मिलकर एक छोटा-सा ढेला बना देंगे. यानी एक स्टोन. ठीक यही किडनी में भी होता है. इसे किडनी स्टोन कहते हैं.
वैसे तो किडनी में स्टोन बनना कोई ख़तरनाक बीमारी नहीं है. कई लोगों को ये समस्या हो जाती है. पर पिछले कुछ समय से Gen Z में किडनी स्टोन की दिक्कत ज़्यादा देखी जा रही है. ऐसा क्यों हो रहा है, समझते हैं.
Gen Z में किडनी स्टोन की समस्या ज़्यादा क्यों हो रही है?ये हमें बताया डॉक्टर अंकित शर्मा ने.

पिछली जेनरेशन में किडनी स्टोन की समस्या 12-15% लोगों को होती थी. लेकिन, इस जेनरेशन में ये बढ़कर 20-25% हो गई है. इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन मुख्य कारण हैं डाइट में बदलाव. सुस्त लाइफस्टाइल. ओबेसिटी का बढ़ना. डाइट में एंटीऑक्सीडेंट की कमी. धूप में समय न बिताना.
किडनी स्टोन के लक्षणजब स्टोन किडनी के अंदर होता है, तो ख़ास लक्षण पता नहीं चलते. यूरिन में खून आना या यूरिन में इन्फेक्शन होना पहला लक्षण है. लक्षण तब पता चलते हैं, जब स्टोन किडनी से सरककर नीचे आ जाता है और किडनी के ट्यूब यानी यूरेटर में फंस जाता है. जब स्टोन यूरेटर में फंस जाता है तो पेशेंट को दर्द होता है.

डाइट को ठीक करना ज़रूरी है. प्रोसेस्ड खाना अवॉयड करना है. खाने में एंटीओक्सिडेंट ज़्यादा से ज़्यादा लें. इसके लिए रोज़ सब्ज़ियां और फल खाएं. मोटापा कंट्रोल करना ज़रूरी है. BMI (बॉडी मास इंडेक्स) 30 से कम होना चाहिए. हालांकि नॉर्मल BMI 25 तक होता है. ओवरवेट होने पर स्टोन बनने का उतना रिस्क नहीं है, जितना ओबेसिटी में होता है. इसलिए वेट कंट्रोल करना ज़रूरी है.
रोज़ 20-25 मिनट एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है. आप तेज़ कदमों से चल सकते हैं. रनिंग या स्विमिंग भी कर सकते हैं. रोज़ ऐसी एक्टिविटी करें, जिसमें हार्ट रेट हाई हो.
विटामिन D की कमी से भी किडनी स्टोन बन सकता है, इसलिए धूप में कुछ समय ज़रूर बिताएं. विटामिन D जांचने के टेस्ट करवा सकते हैं. अगर विटामिन D की कमी निकलती है तो उसे ठीक करना ज़रूरी है.
पानी खूब पीजिए. दिनभर में दो-सवा दो लीटर यूरिन पास करना चाहिए. कॉफी, चाय का कम सेवन करें. शराब, तंबाकू छोड़ दें.

-किडनी स्टोन के लिए सीटी स्कैन करवाया जा सकता है.
-हालांकि, सीटी स्कैन में रेडिएशन होता है, इसलिए इसे ज़्यादा नहीं किया जाता.
-ऐसे में आमतौर पर स्क्रीनिंग के लिए सोनोग्राफी की जाती है.
-अगर सोनोग्राफी में किडनी स्टोन का पता चलता है तब सीटी स्कैन कर सकते हैं.

किडनी स्टोन का इलाज कई चीज़ों पर निर्भर करता है. जैसे स्टोन का साइज़, स्टोन की जगह, स्टोन किस प्रकार का है और किडनी की कंडीशन क्या है. पेशेंट की सेहत को भी देखा जाता है. अगर स्टोन छोटा है तो आमतौर पर दवाइयों से निकल जाता है. अगर स्टोन यूरेटर में फंसा हुआ है और किडनी में इन्फेक्शन कर रहा है, तो सर्जरी करके स्टोन को निकाला जाता है,
अगर किडनी के अंदर स्टोन है और उसका साइज़ बड़ा है तो सर्जरी करनी पड़ती है. नई टेक्नोलॉजी की मदद से ये सर्जरी एंडोस्कोपिक होती है. न इनमें चीरा लगता है. न टांकें लगते हैं. पेशाब के रास्ते लेज़र की मदद से स्टोन को साफ कर दिया जाता है.
जिसे भी किडनी स्टोन हो चुका है, उसे इसका दर्द ज़िंदगीभर याद रहेगा. आपके साथ ऐसा न हो, इसलिए डॉक्टर साहब की बताई गई टिप्स ज़रूर फॉलो करें. चाहे आप Gen Z हों या मिलेनियल.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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