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वज़न घटाने के लिए इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग कर रहे हैं? नुकसान होने से पहले ये जरूरी बातें जान लें!

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग खाना खाने का एक तरीका है. इसमें आप कुछ समय के लिए खाते हैं और कुछ समय फ़ास्टिंग रखते हैं.

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सरवत
| अदिति अग्निहोत्री
20 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 06:56 PM IST)
what is intermittent fasting and right way to do it
इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग आजकल बहुत लोकप्रिय है. (सांकेतिक तस्वीर)
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हमारी एक पाठक हैं करिश्मा. दिल्ली में रहती हैं. 26 साल की हैं. कुछ महीने पहले तक उनका वज़न 90 किलो था. वो वज़न घटाना चाहती थीं. उन्होंने अपने दोस्तों से इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग के बारे में खूब सुना था. इसलिए उन्होंने भी इसे ट्राय करने के बारे में सोचा. बिना किसी एक्सपर्ट से पूछे, उन्होंने ये डाइट शुरू कर दी. कुछ ही समय में उनका वज़न तो घटना शुरू हो गया, पर उससे भी बड़ी दिक्कतें होने लगीं. उन्हें हर वक़्त कमज़ोरी रहती. एक-दो बार तो वो बेहोश भी हो गईं. उनके पीरियड्स मिस होने लगे. हाज़मा एकदम बिगड़ गया. सिर में दर्द रहने लगा. नींद नहीं आती थी. थक-हारकर करिश्मा डॉक्टर के पास गईं. डॉक्टर ने कुछ टेस्ट किए तो पता चला, उनके शरीर में ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी है. और, ये सब इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग के ही साइड इफेक्ट्स थे.

इसलिए, आज डॉक्टर से जानिए कि इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग क्या होती है. इसके फ़ायदे क्या हैं? इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, और अगर इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग कर रहे हैं तो डॉक्टर क्या टिप्स देते हैं?

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग क्या होती है?

ये हमें बताया डॉक्टर मनीष बंसल ने. 

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डॉ. मनीष बंसल, सीनियर डायरेक्टर, क्लीनिकल एंड प्रिवेंशन कार्डियोलॉजी, मेदांता, गुरुग्राम

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग खाना खाने का एक तरीका है. इसमें आप कुछ समय के लिए खाते हैं और कुछ समय फ़ास्टिंग रखते हैं. इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग कई तरीके से की जा सकती है. कुछ लोग हफ्ते में दो दिन फ़ास्ट रखते हैं और बाकी 5 दिन नॉर्मल खाना खाते हैं. वहीं कुछ लोग 5 दिन नॉर्मल खाना खाते हैं और बाकी दो दिन अपना खाना कम कर देते हैं. इसमें पूरी तरह से फ़ास्ट नहीं किया जाता. इसे 5:2 कहते हैं. इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग के सबसे आम तरीके में पूरे दिन सिर्फ 8 घंटे खाया जाता है और बाकी 16 घंटे फ़ास्ट किया जाता है. आजकल कई लोग इसी तरह से इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग कर रहे हैं. 

इस तरीके से फ़ास्टिंग का मुख्य उद्देश्य वज़न कम करना होता है. वैसे इसके कई दूसरे फायदे भी हो सकते हैं, लेकिन लोगों का मुख्य लक्ष्य वज़न ही है. अगर इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग सही तरीके से हो तो ये वज़न कम करने में कारगर है. इसकी एक वजह ये है कि जब भी हम वज़न कम करने और अपने खाने पर ध्यान देने के बारे में सोचते हैं. तब भी पूरा दिन कुछ न कुछ खाते रहते हैं. इससे वज़न नहीं घटता. लेकिन, जब हम ये तय कर लेते हैं कि हम सिर्फ 8 घंटे खाएंगे और 16 घंटे नहीं खाएंगे. तब हम उन 16 घंटों में वाकई कुछ नहीं खाते, जिससे वज़न घटता है. 

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इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग में वज़न आसानी से कम होता है
इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग के फ़ायदे

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग के कुछ और स्वास्थ्य फायदे भी होते हैं. जब हम फ़ास्ट करते हैं तो शरीर में इंसुलिन का लेवल कम हो जाता है, इसके अपने फायदे हैं. वहीं ग्रोथ हॉर्मोन का लेवल बढ़ता है. शरीर के जो सेल्स ख़राब हो रहे होते हैं, उन्हें ठीक होने का समय मिल जाता है. दिल को भी फ़ायदा पहुंच सकता है. इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग से ब्लड प्रेशर कम होता है. डायबिटीज़ में सुधार होता है. कोलेस्ट्रॉल लेवल बेहतर होता है. इससे आखिरकार दिल को फ़ायदा पहुंचता है. 

मगर ध्यान रखें कि ये सारे फ़ायदे छोटी स्टडीज़ में ही साबित हुए हैं. अभी किसी बड़ी स्टडी ने साबित नहीं किया है कि ये पूरी तरह से सुरक्षित है. हालांकि आप इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग कर सकते हैं. ये वज़न कम करने का एक अच्छा तरीका हो सकता है. फ़ास्टिंग करते वक्त पूरी एहतियात बरतें और अपने डॉक्टर की सलाह से ही इसे करें. अगर आपको कोई दिक्कत आ रही है तो फ़ास्टिंग रोक दें और डॉक्टर से दोबारा बात करें.

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 खाने वाले 8 घंटों में सिर्फ़ हेल्दी चीज़ें ही खाएं
इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग करते वक्त क्या ध्यान रखें?

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग करते वक्त कुछ चीज़ों का ध्यान रखना ज़रूरी है. खाने वाले 8 घंटों में सिर्फ़ हेल्दी चीज़ें ही खाएं. अगर इन घंटों में आप अनहेल्दी चीज़ें खाएंगे तो वज़न कम नहीं होगा. दूसरा, जिन लोगों को डायबिटीज़ है, खासकर जिन्हें इंसुलिन की ज़रूरत है, उन्हें सावधान रहना चाहिए. दरअसल, लंबे समय तक फ़ास्टिंग करने से नुकसान हो सकता है. जिनका ब्लड प्रेशर कम या ज़्यादा है, दिल से जुड़ी समस्याएं हैं, प्रेग्नेंट या स्तनपान कराने वाली महिलाएं हैं या कोई और बीमारी है, उनके लिए इतना लंबा फ़ास्टिंग पीरियड सेफ नहीं है. ऐसे लोगों को सावधान रहना चाहिए और इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए. 

डॉक्टर क्या टिप्स देते हैं?

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग बहुत एग्रेसिव यानी आक्रामक नहीं होनी चाहिए. पहले हमें अपने शरीर को भी समझने की ज़रूरत है. अगर तबीयत ठीक नहीं है या कोई समस्या आ रही है तो फ़ास्ट न करें. दूसरा, ये न करें कि 16 घंटे फ़ास्ट रखें और फिर अगले 8 घंटों में कुछ भी खाएं, इससे फ़ायदा नहीं होगा. तीसरा, कई बार लोग इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग करके अपना वज़न कम कर लेते हैं. फिर जब वो फ़ास्टिंग करना छोड़ देते हैं तो उनका वज़न वापस से पहले जैसा हो जाता है. 

लिहाज़ा फ़ास्टिंग ऐसी करें जिसे आप टिककर निभा सकें. ये न करें कि 2-4 महीने इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग करने के बाद उसे छोड़ दें. इससे आपको लॉन्ग टर्म में फ़ायदा नहीं होगा. कोई भी फ़ास्टिंग करने से पहले अपने शरीर की क्षमता को समझें. उसके बाद ही तय करें कि आप क्या करना चाहते हैं. जिन्हें डायबिटीज़, बीपी या दिल से जुड़ी बीमारियां हैं, उन्हें इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: दिल की हालत 'खराब' है, कैसे पता चलेगा? डॉक्टर से जानिए

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