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तेजी से फैल रहा है स्वाइन फ्लू,लक्षण और बचाव के तरीके जान लीजिए

इस साल स्वाइन फ़्लू से सबसे ज़्यादा मौतें पंजाब और गुजरात में हुई हैं. वहीं दिल्ली, गुजरात और राजस्थान से सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि इनके मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

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swine flu h1n1 case in india its symptoms causes and treatment
H1N1 फ़्लू को ही स्वाइन फ़्लू कहते हैं
30 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 12:50 PM IST)
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इस वक़्त हमारे देश में चार ऐसी बीमारियां हैं, जिनके मरीज़ अस्पतालों की OPD में ज़्यादा पाए जा रहे हैं. ये बीमारियां हैं डेंगू, चिकनगुनिया, कोविड 19 और स्वाइन फ़्लू. आज हम खासतौर से स्वाइन फ़्लू (Swine Flu Indian) पर बात करेंगे. 

नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के एक डेटा के मुताबिक, इस साल स्वाइन फ़्लू से सबसे ज़्यादा मौतें पंजाब और गुजरात में हुई हैं. वहीं दिल्ली, गुजरात और राजस्थान से सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि इनके मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

स्वाइन फ़्लू होने पर सबसे पहला असर इंसान के फेफड़ों पर पड़ता है. फिर धीरे-धीरे कई दूसरी परेशानियां भी होने लगती हैं. इसलिए, डॉक्टर से जानिए कि स्वाइन फ़्लू क्या है? ये क्यों होता है? इसके लक्षण क्या हैं? और, स्वाइन फ़्लू से बचाव और इलाज कैसे किया जाए?

स्वाइन फ़्लू क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर रितेश यादव ने. 

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डॉ. रितेश यादव, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, पारस हेल्थ, गुरुग्राम

H1N1 फ़्लू को ही स्वाइन फ़्लू कहते हैं. ये इन्फ्लूएंजा-ए वायरस का एक प्रकार है. साल 2009-10 में H1N1 वायरस पहली बार इंसानों में बीमारी का कारण बना. इसे अक्सर स्वाइन फ़्लू कहा जाता है और ये इन्फ्लूएंजा वायरस का एक टाइप है. ये पहले सुअरों और पक्षियों में बीमारी फैलाता था. 

इस फ़्लू से प्रभावित ज़्यादातर मरीज़ अपने आप ठीक हो जाते हैं. मगर कुछ लोगों में स्थिति गंभीर हो जाती है, जो कई मामलों में जानलेवा भी हो सकती है. लिहाज़ा इसका समय पर पता करके इलाज कराना ज़रूरी है.

स्वाइन फ़्लू के कारण

H1N1 जैसा इन्फ्लूएंजा वायरस हमारी नाक, फेफड़ों और गले में इंफेक्शन करता है. ये वायरस हवा के ज़रिए फैलता है. जब इस वायरस से पीड़ित कोई व्यक्ति खांसता, छींकता या सांस छोड़ता है, तब ये वायरस हवा में फैल जाता है. फिर जब हम सांस लेते हैं तो ये वायरस हवा के ज़रिए हमारे फेफड़ों में भी पहुंच जाता है. 

कई बार जब हम किसी दूषित सतह को छूते हैं. उसके बाद आंख, नाक या मुंह पर हाथ लगाते हैं. ऐसा करने से ये वायरस शरीर पर हमला कर देता है. इस बीमारी के लक्षण दिखने से एक दिन पहले से लेकर अगले 3-4 दिनों तक संक्रमित व्यक्ति इस वायरस को फैला सकता है.

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स्वाइन फ़्लू होने पर नाक बहेगी और गला खराब हो जाएगा (सांकेतिक तस्वीर)
स्वाइन फ़्लू के लक्षण

- H1N1 या स्वाइन फ़्लू के लक्षण कॉमन फ़्लू से मिलते-जुलते हैं. जैसे बुखार आना

- शरीर में दर्द

- सिरदर्द

- गला खराब होना

- नाक बहना या बंद होना

- खांसी आना

- इसके अलावा, कुछ मरीज़ों को बहुत थकान होती है

- कमज़ोरी आ सकती है

- सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है

- उल्टी हो सकती है

- दस्त लग सकते हैं

- हालांकि ये लक्षण गंभीर मामलों में ही दिखाई देते हैं

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स्वाइन फ़्लू से बचाव के लिए बार-बार हाथ धोएं
स्वाइन फ़्लू से बचाव और इलाज

अपने हाथों को बार-बार धोएं. सबसे ज़रूरी और असरदार तरीका यही है. हाथ धोने के लिए आप साबुन और पानी या हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही, खांसते और छींकते वक्त अपने मुंह को रुमाल या कोहनी से ढकें. फ़ेस मास्क का इस्तेमाल करें. अपने चेहरे को बार-बार छूने से बचें. अपनी टेबल और दूसरी सतहों को साफ रखें. 

सबसे ज़रूरी, वायरस के संपर्क में आने से बचें. अगर किसी को स्वाइन फ़्लू है तो उसके संपर्क में न आएं. वहीं अगर आपको ये बीमारी है तो आप लोगों से दूरी बनाएं. साथ ही, खूब आराम करें. पानी और दूसरे तरल पदार्थ, जैसे ORS, नारियल पानी और नींबू पानी पिएं. हल्का खाना लें, जो आराम से हज़म हो पाए. जब तक स्वाइन फ़्लू हो, तब तक अपने घर पर ही आराम करें. बुखार आने पर आप पैरासिटामॉल खा सकते हैं. अगर लक्षण ज़्यादा हों तो डॉक्टर की सलाह पर ओसेल्टामिविर नाम की एंटीवायरल दवा ले सकते हैं. 

इसके अलावा, अगर तबीयत ज़्यादा बिगड़ती है. आपको सांस लेने में तकलीफ़ होती है. सांस बहुत तेज़ चलती है. मरीज़ की हालत ठीक नहीं लगती तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराएं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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