हाई हील्स पहना बहुत अच्छा लगता है, नुकसान जान खरीदने का ख्याल भी चला जाएगा
हाई हील्स पहनने से पैर के तलवे के आगे वाले हिस्से पर दबाव पड़ता है. दबाव की वजह से इस हिस्से में दर्द होने लगता है. पैर में सूजन आ सकती है.
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‘पहली बात तो ये है, जो तू टिक-टॉक टिक-टॉक चलती है. माना ये सारी तेरी, हाई हील्स की गलती है.’
ये गाना जिसने भी लिखा है. एकदम सही लिखा है. गलती ही गलती है. हाई हील्स की गलती है. इसे पहनने से घुटने, कमर, गर्दन, पैर… सब पर असर पड़ता है.
हाई हील्स से शरीर के अलग-अलह हिस्सों पर क्या असर पड़ता है, ये हमने पूछा डॉक्टर हिमांशु कुशवाह से.

डॉक्टर हिमांशु बताते हैं कि हाई हील्स पहनने से पैर के तलवे के आगे वाले हिस्से पर दबाव पड़ता है. यानी पैर की उंगलियों और एड़ी के बीच वाला हिस्सा. इस हिस्से में 5 हड्डियां होती हैं. जिन्हें मेटाटार्सल (Metatarsal Bones) कहा जाता है. ये चलने, दौड़ने और बैलेंस बनाने में मदद करती हैं.

जब हम हाई हील्स पहनते हैं. तो हमारा ज़्यादातर भार मेटाटार्सल हड्डियों के ऊपर पड़ता है. जिससे उन पर दबाव बढ़ता है. अब जितनी ऊंची हील, उतना ज़्यादा दबाव. दबाव की वजह से इस हिस्से में दर्द होने लगता है. पैर में सूजन आ सकती है.

हाई हील्स हमारे घुटनों पर भी असर डालती हैं. जब हम हाई हील्स पहनते हैं, तो छोटे-छोटे कदम लेते हैं. इससे घुटने बार-बार झुकते और सीधे होते हैं. जिससे घुटनों पर दबाव पड़ता है. कार्टिलेज को नुकसान पहुंचने लगता है.
कार्टिलेज (Cartilage) एक तरह का कुशन है, जो दो हड्डियों के बीच होता है. ये हमारे जोड़ों और हड्डियों को नुकसान से बचाता है. अगर कार्टिलेज को किसी भी तरह का नुकसान हो, तो सीधे जोड़ों पर असर पड़ता है. जोड़ों पर असर पड़ने से घुटनों में दर्द होने लगता है. ऑस्टियोअर्थराइटिस (Osteoarthritis) का खतरा भी बढ़ जाता है. ऑस्टियोअर्थराइटिस एक तरह का गठिया है.

हाई हील्स पहनने से शरीर आगे की ओर झुकता है. इससे रीढ़ की हड्डी के कर्व में बदलाव होता है. जिससे कमर और गर्दन पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है. इस एक्स्ट्रा प्रेशर से कमर और गर्दन में दर्द होने लगता है. उनमें अकड़न आ जाती है.
उस पर, अगर आप हाई हील्स पहनकर गिरे तो एंकल यानी टखना मुड़ेगा ही. शरीर के कई हिस्सों में चोट भी लग सकती है.
कैसा हो फुटवियर?हाई हील्स कम से कम पहनें. हील्स की ऊंचाई 2-3 इंच से ज़्यादा न हो. अपने लिए ऐसा फुटवियर चुनें जो पैरों को सहारा दे. आरामदायक हो और जिसे लंबे समय तक पहनने पर भी कोई परेशानी न हो.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप' आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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