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चाय-सिगरेट को 'डेडली कॉम्बिनेशन' कहने वाले ये पढ़कर कुछ बोल नहीं पाएंगे

चाय में मौजूद कैफीन को डाइयूरेटिक माना जाता है. यानी इसे पीने से बार-बार यूरिन पास करने जाना पड़ता है. इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. फिर स्टूल हार्ड हो जाता है.

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सरवत
| अदिति अग्निहोत्री
23 दिसंबर 2024 (पब्लिश्ड: 04:12 PM IST)
how tea-cigarette combination causes constipation
चाय-सिगरेट की जोड़ी बहुत नुकसानदेय है.
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कुछ लोगों के लिए चाय-सिगरेट की जोड़ी ठीक जय-वीरू जैसी है. एक के बिना दूसरा अधूरा. खासकर ऑफिस जाने वाले इस जोड़ी के कायल हैं. जितनी बार ब्रेक पर बाहर निकलेंगे, चाय के साथ एक-दो सिगरेट भी फूंक आएंगे.

सिगरेट सेहत के लिए नुकसानदेह है. ये हम जानते हैं. लाखों बार सुन चुके हैं. इसलिए आज हम सिगरेट के नुकसान नहीं दोहराएंगे. आज बात होगी चाय-सिगरेट के ‘डेडली कॉम्बिनेशन’ पर. दरअसल, चाय और सिगरेट की यारी, आपके पेट की दुश्मन बन गई है. ये जो बार-बार आपको कब्ज़ की दिक्कत हो रही है. वो इसी चाय-सिगरेट की वजह से है. कैसे? ये हमें बताया डॉक्टर लोहित चौहान ने.

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डॉ. लोहित चौहान, कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, एकॉर्ड हॉस्पिटल

डॉक्टर लोहित बताते हैं कि चाय में कैफीन होता है. कैफीन को डाइयूरेटिक माना जाता है. यानी इसे पीने से बार-बार पेशाब लगता है. अगर हम पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते तो शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है. यानी शरीर में पानी की कमी. इससे स्टूल हार्ड हो जाता है और इसे पास करना मुश्किल बन जाता है.

कुछ खास तरह की चाय में टैनिन नाम का तत्व होता है. जैसे ब्लैक टी और ग्रीन टी में. अगर ये चाय ज़्यादा पी जाएं तो इनसे हाज़मे पर बुरा असर पड़ता है. कुछ लोगों को कब्ज़ की शिकायत हो सकती है.

यही नहीं, टैनिन शरीर में आयरन के अब्जॉर्प्शन को भी धीमा कर देता है. इससे शरीर में आयरन की कमी हो जाती है. नतीजा? मांसपेशियां और आंतें कमज़ोर होने लगती हैं. जिससे बॉवेल मूवमेंट धीमा हो जाता है और कब्ज़ होने का चांस बढ़ जाता है.

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सिगरेट नहीं पीनी चाहिए, इसमें निकोटीन होता है

अब बात सिगरेट की. सिगरेट में निकोटीन होता है. ये केमिकल लार के प्रोडक्शन को घटा देता है. लार खाना पचाने और इनडायरेक्टली, स्टूल को सॉफ्ट बनाए रखने में मदद करती है. लेकिन, लार की कमी से पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इससे स्टूल हार्ड हो जाता है.

वहीं निकोटीन भी एक डाइयूरेटिक है. यानी सिगरेट पीने से बार-बार यूरिन होता है. इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. स्टूल हार्ड हो जाता है. कुल मिलाकर कब्ज़ की दिक्कत हो जाती है.

कई लोग सुबह स्टूल पास करने से पहले एक सिगरेट पीते हैं. इससे उनका स्टूल आसानी से पास होता है. ये ट्रिक कुछ बार भले ही काम कर जाए. लेकिन, अगर ये रोज़ की आदत बन जाए और आपको हर बार सिगरेट पीनी पड़े. तो इससे पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है. लगातार कब्ज़ की दिक्कत रहना सेहत के लिए नुकसानदेह है . इसलिए, सिगरेट छोड़ने में ही भलाई है.

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कब्ज़ से बचना है तो अपने खाने में फाइबर शामिल करें

अगर आप चाहते हैं कि स्टूल सही से पास हो तो अपने खाने में फाइबर शामिल करें. फाइबर के लिए मिलेट्स, दालें, चने, राजमा, ब्रॉकोली, पालक और गाजर खाई जा सकती है. पपीता, जामुन, सेब, नाशपाती, और संतरे भी फाइबर का अच्छा सोर्स हैं. आप चाहें तो बादाम, चिया सीड्स, अलसी और अखरोट जैसे मेवे और बीज भी खा सकते हैं.

साथ ही, पानी खूब पिएं. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत ज़रूरी है. जहां तक चाय की बात है. तो ICMR यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने कुछ समय पहले, भारतीयों के लिए डाइटरी गाइडलाइंस जारी की थी. इसके मुताबिक, हमें दिन में 300 मिलीग्राम से ज़्यादा कैफीन का सेवन नहीं करना चाहिए. यानी दिन में एक-दो कप चाय ही पीनी चाहिए. इससे ज़्यादा नहीं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप' आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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