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एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फ़ेल, इनमें जो मिला वो हेल्थ के लिए कितना नुकसानदेह है?

एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट किचन किंग मसाला, एवरेस्ट कश्मीरीलाल और एवरेस्ट मीट मसाला में एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया मिला है. कई पेस्टिसाइड्स भी पाए गए हैं.

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four Everest spice variants reportedly failed safety checks what did the lab findings reveal
एवरेस्ट के मसाले कई घरों में इस्तेमाल किए जाते हैं
9 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 07:17 PM IST)
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दूध में मिलावट. दही में मिलावट. पनीर में मिलावट. खोए में मिलावट और अब मसालों में भी. एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए हैं. इनके नाम हैं- एवरेस्ट गरम मसाला. एवरेस्ट किचन किंग मसाला. एवरेस्ट कश्मीरीलाल और एवरेस्ट मीट मसाला. Trustified नाम का एक यूट्यूब चैनल है. इस पर 1 मार्च 2026 को एक वीडियो अपलोड हुआ. इस वीडियो में बताया गया कि चैनल ने एवरेस्ट के 4 मसाले लैब टेस्टिंग के लिए भेजे थे. ये सारे मसाले D-Mart से खरीदे गए थे. सभी के 3 बॉक्स खरीदे गए. फिर इनमें से एक को जांच के लिए भेजा गया.

लैब टेस्ट में क्या पता चला, बताते हैं. पहले बात एवरेस्ट गरम मसाला की. इसमें दो पेस्टिसाइड FSSAI की सेफ लिमिट से ज़्यादा मिले. इनके नाम हैं- एसिटामिप्रिड और एज़ोक्सीस्ट्रोबिन. एक बैक्टीरिया भी सेफ लिमिट से ज़्यादा मिला. बैक्टीरिया का नाम है एंटेरोबैक्टीरियेसी.

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एंटेरोबैक्टीरियेसी, बैक्टीरिया की एक बड़ी फैमिली है

एवरेस्ट किचन किंग मसाला की बात करें तो इसमें भी एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया तय मात्रा से ज़्यादा मिला. वहीं 3 पेस्टिसाइड भी ज़्यादा मात्रा में मिले. इनके नाम हैं- थियामेथॉक्सम, कार्बेन्डाज़िम/बेनोमिल और कार्बेन्डाज़िम. एवरेस्ट कश्मीरीलाल चिली पाउडर में कोई पेस्टिसाइड तो तय सीमा से ज़्यादा नहीं मिला लेकिन इसमें भी एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया ज़्यादा मात्रा में मौजूद था.

अब बात एवरेस्ट मीट मसाला की. इसमें एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया तो ज़्यादा मात्रा में मिला ही. साथ में 4 पेस्टिसाइड भी सेफ लिमिट से ज़्यादा मिले. ये हैं- एथियन, टेबुकोनाज़ोलस, एज़ोक्सीस्ट्रोबिन और फ्लूओपायरम. यानी एवरेस्ट के चारों मसाले सेफ लिमिट को पास नहीं कर पाए हैं. ये सभी FSSAI के मानकों पर खरे नहीं उतरते.

पर मसालों में इनके मिलने का मतलब क्या है? इनसे शरीर को कितना नुकसान पहुंच सकता है? ये हमने पूछा, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली में GI सर्जरी एंड GI ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर नीरज गोयल से.  

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डॉ. नीरज गोयल, डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट, जीआई सर्जरी एंड जीआई ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

डॉक्टर नीरज बताते हैं कि एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया की एक बड़ी फैमिली है. इसके अंदर कई तरह के बैक्टीरिया आते हैं. जैसे ई.कोलाई, साल्मोनेला और क्लेबसिएला वगैरा. ये बैक्टीरिया आमतौर पर हमारी आंत में रहते हैं और बहुत नुकसान नहीं करते.  

अगर मसालों में एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया ज़्यादा मिला है तो इसका मतलब मसाले ठीक से सुखाए नहीं गए हैं. ठीक से साफ नहीं किए गए हैं. उन्हें सही से हैंडल नहीं किया गया है. अगर किसी मसाले में एंटेरोबैक्टीरियेसी सेफ लिमिट से ज़्यादा है. उस पर इसे लंबे वक्त तक ज़्यादा मात्रा में खाया जाए. तब इससे दस्त, पेट दर्द, उल्टी, फूड पॉइज़निंग और पेट के इंफेक्शन हो सकते हैं. खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और कमज़ोर इम्यूनिटी वालों में.

अब बात पेस्टिसाइड्स यानी कीटनाशक की. अगर किसी मसाले में पेस्टिसाइड्स ज़्यादा मिले हैं तो इसका मतलब खेती या प्रोसेसिंग के दौरान केमिकल्स को सही तरह कंट्रोल नहीं किया गया. यानी या तो फ़सल पर पेस्टिसाइड्स ज़्यादा डाल दिए गए. या फिर कटाई के बाद उनकी सफाई ठीक से नहीं हुई. अगर ऐसे मसाले लंबे समय तक खाए जाएं और शरीर में पेस्टिसाइड्स की मात्रा बढ़ती जाए तो इससे लिवर, आंतों और नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है.

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मसाले में पेस्टिसाइड्स ज़्यादा मिलने का मतलब है, खेती या प्रोसेसिंग के दौरान केमिकल्स सही तरह कंट्रोल नहीं किए गए हैं 

एसिटामिप्रिड इंसेक्टिसाइड लंबे समय में शरीर के नर्वस सिस्टम को ख़राब कर सकता है, जिससे सिरदर्द और उल्टी हो सकती है. एज़ोक्सीस्ट्रोबिन फंगीसाइड लिवर और आंतों को नुकसान पहुंचा सकता है. थियामेथॉक्सम नसों पर असर डाल सकता है. ज़्यादा एक्सपोज़र होने पर चक्कर आना और कमज़ोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. एथियन कीटनाशक भी नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे उल्टी, उबकाई और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है लेकिन ये सारी दिक्कतें तब होंगी. जब ये पेस्टिसाइड्स ज़्यादा मात्रा में लगातार शरीर के अंदर जाएंगे. 

हालांकि मसाले बहुत कम मात्रा में खाए जाते हैं. इसलिए इनसे बहुत नुकसान होने का रिस्क कम है. अगर किसी ब्रांड का मसाला खाने लायक नहीं है. तो आप घर पर मसाला तैयार कर सकते हैं. इसके लिए साबुत मसाला खरीदकर घर पर पीसें. बाहर से मसाला खरीद रहे हैं तो उसे ड्राई रोस्ट करके इस्तेमाल करें. मसाले हमेशा सूखी और ठंडी जगर पर रखें. खुले मसाले कम खरीदें और सिर्फ एक ही ब्रांड पर निर्भर न रहें. साथ ही, खाने को अच्छी तरह पकाएं. इससे कई बैक्टीरिया अपने आप कम हो जाएंगे.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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