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ताहिरा कश्यप को 7 साल बाद फिर हुआ कैंसर, जानें कैंसर लौटकर क्यों आता है?

ताहिरा कश्यप को साल 2018 में ब्रेस्ट कैंसर हुआ था. ये स्टेज-ज़ीरो ब्रेस्ट कैंसर था. अपनी बीमारी का पता चलते ही, उन्होंने इलाज कराया और वो ठीक हो गई थीं. मगर अब 7 साल बाद, उन्हें दोबारा ब्रेस्ट कैंसर हो गया है.

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ayushmann khurrana wife tahira Kashyap confirms battling breast cancer for the second time
ताहिरा कश्यप ने इंस्टा पोस्ट में कैंसर के लौटने की जानकारी दी
8 अप्रैल 2025 (अपडेटेड: 9 अप्रैल 2025, 01:19 PM IST)
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फिल्ममेकर और लेखिका ताहिरा कश्यप को फिर कैंसर हो गया है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट में इस बात की जानकारी दी. 

ताहिरा कश्यप को साल 2018 में ब्रेस्ट कैंसर हुआ था. ये स्टेज-ज़ीरो ब्रेस्ट कैंसर था. अपनी बीमारी का पता चलते ही, उन्होंने कैंसर का इलाज कराया. मास्टेक्टॉमी नाम की सर्जरी कराई. इसमें ब्रेस्ट को हटा दिया जाता है. इसके बाद वो ठीक हो गई थीं. लेकिन अब 7 साल बाद उनको दोबारा ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोज़ हुआ है. 

मगर ठीक होने के बाद कैंसर दोबारा क्यों हो जाता है और इसके क्या लक्षण हैं, ये हमने पूछा डॉक्टर रिचु शर्मा ने.

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डॉ. रिचु शर्मा, ऑन्कोलॉजिस्ट, उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स

डॉक्टर रिचु कहती हैं कि जब कैंसर का इलाज किया जाता है. तब डॉक्टर कैंसर का ट्यूमर हटा देते हैं. लेकिन, कभी-कभी इलाज के बाद भी कैंसर के कुछ सेल्स शरीर में बचे रह जाते हैं. ये सेल्स इतने छोटे होते हैं कि जांच में भी नहीं दिखते. स्कैन या टेस्ट में भी पकड़ में नहीं आते. वक्त के साथ, ये बचे हुए सेल्स फिर से बढ़ने लगते हैं और कैंसर दोबारा हो जाता है.

वहीं कुछ कैंसर बहुत ज़्यादा एग्रेसिव होते हैं. ये तेज़ी से फैलते हैं और इनके बार-बार वापस आने का चांस ज़्यादा होता है. जैसे पैंक्रियाटिक कैंसर, लंग कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और ल्यूकेमिया.

अगर कैंसर के मरीज़ का इलाज एडवांस स्टेज में किया गया है. यानी स्टेज 3 या स्टेज 4 में. तब कैंसर के लौटने का चांस ज़्यादा होता है. स्टेज 1 और 2 में ये चांस बहुत कम होता है.

जब कैंसर लौटता है, तो वो शरीर के किसी भी हिस्से में लौट सकता है. यानी ये फिर से पहले वाले अंग में हो सकता है. पास के किसी अंग में हो सकता है. या उस जगह से दूर, शरीर के किसी दूसरे अंग में भी हो सकता है.

कैंसर दोबारा होना आम नहीं है, लेकिन इसके लौटने का रिस्क रहता ही है. इसलिए, इसके लक्षणों को पहचानना बहुत ज़रूरी है.

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जिस जगह पहले कैंसर हुआ था, अगर वहां किसी तरह का बदलाव दिख रहा है तो इसे इग्नोर न करें

जिस जगह पर पहले कैंसर हुआ था, वहां अगर किसी तरह का बदलाव दिख रहा है, कोई गांठ महसूस रही है या दर्द हो रहा है. तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. ये उस जगह पर कैंसर के लौटने का संकेत हो सकता है.

वहीं, अगर शरीर के किसी दूसरे हिस्से में कोई गांठ महसूस हो रही है. किसी जगह पर लगातार दर्द बना हुआ है और उपचार के बावजूद ये दर्द ठीक नहीं हो रहा. तो ये कैंसर की वापसी का संकेत हो सकता है.

इसके अलावा, अगर आराम करने के बावजूद थकान और कमज़ोरी नहीं जा रही. सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ हो रही. कई दिनों से खांसी आ रही. या लगातार सिरदर्द बना हुआ है. बार-बार बुखार आ रहा. बेवजह वज़न घट रहा है. स्टूल या यूरिन में खून आ रहा है. उबकाई जैसा लग रहा है. उल्टी हो रही है. खाना निगलने में परेशानी हो रही, तो ये भी कैंसर के दोबारा लौटने के संकेत हो सकते हैं.

लिहाज़ा अगर किसी का कैंसर ठीक हो चुका है. लेकिन, उसे ये लक्षण दिख रहे हैं तो वो बिना देर किए डॉक्टर से मिले. डॉक्टर आपकी कुछ जांचें करेंगे और रिपोर्ट्स के आधार पर इलाज बताएंगे.

आखिर में ताहिरा कश्यप के बारे में भी थोड़ा जान लेते हैं. 

ताहिरा कश्यप लेखिका और फिल्ममेकर हैं. उन्होंने 5 किताबें लिखी हैं. I Promise, Souled Out​, Cracking The Code: My Journey in Bollywood, The 12 Commandments of Being A Woman और The 7 Sins of Being A Mother. इसमें से Cracking The Code: My Journey in Bollywood उन्होंने अपने पति आयुष्मान खुराना के साथ मिलकर लिखी है.

उन्होंने Sharmajee Ki Beti नाम की मूवी डायरेक्ट की है. ये फिल्म पिछले साल आई थी. वो Toffee और Pinni नाम की दो शॉर्ट फिल्मों की डायरेक्टर भी रही हैं. 

ताहिरा ने ऑडिबल पर My Ex-Breast नाम से 7 एपिसोड्स की ऑडियो सीरीज़ भी की है. इसमें उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर, मास्टेक्टॉमी और ब्रेस्ट रीकंस्ट्रक्शन समेत कई चीज़ों पर बात की है. 

कैंसर से लड़ना आसान नहीं होता. Vogue India से बातचीत में ताहिरा कहती हैं, ‘जब मुझे कैंसर डायग्नोस हुआ, तब मुझे नहीं लगा था कि मैं इसके बारे में लोगों को बता पाउंगी. मगर, जब मेरे कुछ करीबी रिश्तेदारों ने मुझे इसके बारे में चुप्पी साधने को कहा. और, जब कुछ डॉक्टर्स ने मुझे उन मरीज़ों की दुर्दशा के बारे में बताया. जिन्हें उनके अपने रिश्तेदारों ने मैमोग्राम कराने से मना कर दिया था. या जो खुद की जांच करवाने में बहुत शर्मिंदा थे. तब मुझे पता चल गया, कि अब लोगों को ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जागरूक करना ही मेरा मिशन है.’

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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