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कौन हैं 'नाटु नाटु' बनाने वाले एम एम कीरवानी, जिनको मजबूरी में नाम बदलकर काम करना पड़ा

उन्होंने कुछ सुंदर हिन्दी गाने बनाए हैं, आपने सुने भी हैं. बस तब उन्हें पहचानते नहीं होंगे. आज जान लीजिए.

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11 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 11 जनवरी 2023, 05:19 PM IST)
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कीरावानी ने तीन नामों के साथ फिल्मों के लिए म्यूज़िक बनाया.
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सुबह 10 बजे की अपनी ऑफिस शिफ्ट होती है. हालांकि टाइम के मामले में थोड़ा इधर-उधर निकल जाता हूं. खैर, ऑफिस पहुंचने से पहले ही पता लग गया था कि RRR के गाने Naatu Naatu ने Golden Globe Award जीत लिया है. ज़ाहिर तौर पर ऑफिस पहुंचकर नाटु नाटु के इर्द-गिर्द ही काम होना था. ये काम भी अपने को फन किस्म का लगता है. लैपटॉप पर बैकग्राउंड में गाना बजता रहे और सामने नोटपैड पर इससे जुड़ी स्टोरीज़ लिखते रहें. सही कॉम्बिनेशन. खैर, नाटु नाटु बज रहा था. तभी पास बैठे वरिष्ठ युवा मोर्चा ग्रुप में से किसी ने कहा कि इसका वो गाना लगाओ, ‘कभी शाम ढले’. फिर किसी दूसरे ने कहा कि ‘तुम मिले दिल खिले’ बजाओ. 

इन गानों का नाटु नाटु से क्या कनेक्शन है, ये पल्ले नहीं पड़ा. गानों के क्रेडिट्स पढे. नाटु नाटु और इन गानों में कोई समानता नहीं दिखी. किसी सीनियर से हेल्प मांगी. उन्होंने इन पुराने हिन्दी गानों के म्यूज़िक डायरेक्टर पॉइंट आउट किए, एम एम करीम. नाटु नाटु के म्यूज़िक डायरेक्टर के नाम में भी एम एम है, लेकिन वो एमएम कीरवानी हैं. गोल्डन ग्लोब के स्टेज पर वो ही अवॉर्ड लेने पहुंचे थे. पता चला कि अक्षय कुमार के मीम की तरह ये दोनों लोग एक ही हैं. ‘तुम आए तो आया मुझे याद, गली में आज चांद निकला’. ‘जादू है नशा है’. ‘आ भी जा, आ भी जा’. इन सभी गानों के लिए संगीत बनाया एमएम करीम ने. ‘बाहुबली’ और RRR वाली पीढ़ी उन्हें एम एम कीरवानी के नाम से पहचानती है. कीरवानी से करीम और फिर करीम से कीरवानी कैसे हुआ, उसके बारे में बताते हैं. 

कीरवानी RRR बनाने वाले एस एस राजामौली के कज़िन भाई हैं. राजामौली के पिता KV विजयेंद्र और कीरवानी के पिता भाई हैं. अब सुनकर लगे कि फिल्मी परिवार से आते हैं, कीरवानी के लिए तो सब आसान रहा होगा. लेकिन ऐसा नहीं था. जब उन्होंने अपना फिल्मी करियर शुरू किया, उस वक्त राजामौली महज़ 13 या 14 साल के थे. साल 1987 में आई तेलुगु फिल्म Collector Gari Abbayi उनकी पहली फिल्म थी. उन्होंने फिल्म के म्यूज़िक के लिए असिस्ट किया था. कुछ फिल्में और कुछ साल बाद आई Manasu Mamatha. इस फिल्म से उन्हें कामयाबी मिली और उनका नाम फिल्म इंडस्ट्री के कुछ कोनों में पहुंच गया. लेकिन उन्हें पांव जमाने का मौका दिया राम गोपाल वर्मा की फिल्म Kshana Kshanam ने. इस फिल्म ने कीरवानी को म्यूज़िक डायरेक्टर के तौर पर स्थापित कर दिया. नाटु नाटु के गोल्डन ग्लोब जीतने के बाद रामू ने उन्हें बधाई भी दी थी. 

खैर, Kshana Kshanam के बाद कीरवानी को काम मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ी. उनके पास फिल्मों के ऑफर आने लगे. किसी फ्रंट फुट पर बल्लेबाज़ी कर रहे बैट्समैन की तरह वो अपने बेस्ट शॉट्स लगाने लगे. इस दरमियान उन्होंने Annamayya नाम की तेलुगु फिल्म, ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘क्रिमिनल’, ‘ज़ख्म’, ‘साया’, ‘जिस्म’ और ‘सुर’ जैसी हिंदी फिल्मों के लिए म्यूज़िक बनाया. ‘सुर’ का नाम याद रखना ज़रूरी है, क्योंकि उनके दो नामों की कहानी इसी से जुड़ी है. 

# एक आदमी, तीन नाम, काम कमाल 

1990 में जिस Manasu Mamatha ने कीरवानी को पहली पहचान दिलाई, उसके प्रोड्यूसर थे रामोजी राव. उन्होंने आगे चलकर कीरवानी के साथ एक और फिल्म पर काम किया. कीरवानी उस फिल्म के लिए संगीत बनाने लगे, लेकिन डायरेक्टर के साथ सहमति नहीं बैठ रही थी. क्रिएटिव डिफरेंस हो रहा था. कीरवानी ने फिल्म से अलग होने का फैसला लिया. ज़ाहिर तौर पर रामोजी को ये पसंद नहीं आया. अब वो भी अड़ गए कि कीरवानी की जगह किसी और को लाएंगे. उन दिनों उन्होंने ‘सुर’ के गाने सुने थे. बड़े पसंद भी आए थे. सोचा कि उसी के म्यूज़िक डायरेक्टर को अपनी फिल्म के लिए लाएंगे. उसके म्यूज़िक डायरेक्टर का नाम था एम एम करीम. आगे वही हुआ जो ‘गोलमाल’ के राम प्रसाद और लक्ष्मण प्रसाद के मिलने पर हुआ था. 

ऐसा नहीं है कि कीरवानी ने सिर्फ करीम नाम से काम किया हो. उन्होंने तमिल फिल्मों के लिए भी म्यूज़िक बनाया. बस वहां उनका नाम मराकादमनी था. आदमी एक और नाम तीन क्यों? इसका जवाब मिलता है उस समय में, जब कीरवानी की उम्र 30 साल थी. उनकी पत्नी प्रेग्नेंट थीं. उनके एक गुरु हुआ करते थे. उन्होंने अचानक से बम की तरह न्यूज़ ड्रॉप की कि कीरवानी को असमय मृत्यु का खतरा है. इससे बचना है तो संन्यासी की भांति रहना होगा, वो भी पूरे डेढ़ साल तक. परिवार से दूर रहे. नॉन वेज खाना छोड़ दिया. परिवार से दूर भले ही रह रहे थे लेकिन ज़िम्मेदारियों से नहीं. गुरु से इसका समाधान पूछा. सुझाया गया कि काम कर सकते हो लेकिन नए नाम के साथ. 

नया नाम अपनाया, एम एम करीम हो गए. मुलाकात हुई कुमार सानू से. दोनों एक फिल्म पर काम करने वाले थे. नाम था ‘क्रिमिनल’. समय की लहरों में फिल्म तो बहुत हद तक धुल गई, लेकिन एक गाना जड़ें जमाकर खड़ा रहा. ‘तू मिले दिल खिले’ के हिस्से आने वाले प्यार और व्यूअरशिप में सिर्फ इज़ाफ़ा ही हुआ है. नीचे कुछ गाने लगा रहे हैं, आपने ज़रूर सुने होंगे. लेकिन फिर भी कीरवानी के संगीत को सेलिब्रेट करने के बहाने फिर सुने जाने चाहिए:

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