मोदी सरकार CAA पर बॉलीवुड का सपोर्ट लेने के लिए बेचैन क्यों है?
'बजरंगी भाईजान','एक था टाइगर' के डायरेक्टर ने बताया कि वो पीयूष गोयल के उस डिनर में क्यों नहीं गए, जहां CAA को लेकर बातें होनी थीं.
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लेफ्ट में पिछले साल की वो सेल्फी जो काफी चर्चा में रही थी. राईट में पियूष गोयल की डिनर पार्टी का इनविटेशन.
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CAA. देश का इस वक्त का ज्वलंत मुद्दा. काफी दिनों से. ज्वलंत यूं कि जैसे ही ये बिल पास हुआ इसके विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे. बिल का विरोध करना, सरकार का विरोध करना हो गया. इस विरोध में लोग जुड़ते गए, कारवां बनता गया.# रिकैप-
लेकिन फिर सरकार भी चुप कैसे बैठती. सो उसने भी कैंपेन चलाने शुरू किए. CAA के पक्ष में माहौल बनाना शुरू किया. CAA का विरोध स्वतः स्फूर्त था, सरकार का इसके समर्थन में हवा बनाना उसकी एक प्रतिक्रिया.
तो हवा बनाने के सरकारी कार्यों में शमिल था- लोगों को जागरूक करना, एजुकेट करना. CAA के बारे में. समर्थन जुटाना, मिस कॉल और सोशल मीडिया के माध्यम से.
प्रकाश जावड़ेकर से लेकर पीयूष गोयल तक सब युद्ध स्तर पर जुट गए CAA की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए.
CAA प्रोटेस्ट के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हिंसा हुई थी.और जब तक विरोध और समर्थन शांतिपूर्ण ढंग से होते रहें तो हमें या किसी को भी कोई आपत्ति क्यों हो. लेकिन फिर इससे ‘हिंसा’ जुड़ गई. दिल्ली, यूपी, बंगाल...
हालांकि इस दौरान और भी कई चीज़ें हुईं. देश के कई बड़े मुद्दे नेपथ्य में चले गए. कुछ नए मुद्दों से CAA विमर्श डीरेल हो गया. जेएनयू. बेरोज़गारी. ईराक. छपाक. एनआरसी...
अरे हां एनआरसी वाला पार्ट तो छूट ही गया. तो विरोध करने वालों ने आ चुके ‘CAA’ और आने वाले ‘एनपीआर-एनआरसी’ को क्लब कर दिया. क्यूंकि उनका मानना है कि यही वो कॉकटेल है जो घातक हो जाती है. खासतौर पर मुस्लिमों के लिए.
खैर जो भी हो स्टोरी से जुड़ा हमारा रिकैप यहां पर खत्म होता है. अब हम स्टोरी के मुख्य भाग पर आते हैं.
तो सरकार CAA और ‘एनपीआर-एनआरसी’ के वास्ते समर्थन जुटाने हेतु हर प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर रही है. इसी सीरीज़ में पीयूष गोयल की एक डिनर पार्टी हुई. ये एक ‘क्लोज़-डोर’ मीटिंग थी.# पीयूष गोयल की डिनर पार्टी-
इसमें आम जनता तो छोड़िये पत्रकारों तक को आने की अनुमति नहीं थी. तो फिर इसमें शामिल कौन थे? बॉलीवुड से जुड़ी हस्तियां. ये पार्टी रविवार, 05 जनवरी को आयोजित की गई थी. बॉलीवुड और राजनेताओं के बीच पुल बनने का कार्य किया एक अंजान से फिल्म प्रोड्यूसर महावीर जैन ने. उन्होंने ही ये पार्टी कम मीटिंग आयोजित की.
डिनर पार्टी का वो इनविटेशन जो सोशल मीडिया पर घूम रहा था.अब चूंकि ये क्लोज़ डोर मीटिंग थी तो इसमें कितने लोग आए, कितने नहीं, मीटिंग में क्या हुआ, इसके बारे में कुछ ऑफिशियली नहीं पता लग पाया. लेकिन जो खबरें छन-छन कर आईं उससे ये पता लगा कि दो दर्जन के लगभग सेलेब इसमें आए, जबकि निमंत्रण बहुतों को दिया गया था.
इधर मुंबई के हयात होटल में बंद दरवाजों के भीतर ये मीटिंग चल रही थी, उधर होटल के बाहर कुछ लोग इकट्ठा हो गये. इस इस मीटिंग और सीएए का विरोध करने के लिए.
हालांकि लोग कम थे और पुलिस ज़्यादा तो मामला आया गया हो गया.
होटल के बाहर प्रोटेस्ट करते लोग. (तस्वीर साभार: दी हिंदू/आदेश चौधरी)आने वाले कुछ प्रमुख लोगों में शामिल थे- अनु मलिक, कैलाश खेर, भूषण कुमार (टी सीरीज़ वाले), शान, रूप कुमार राठौड़, प्रसून जोशी और रणवीर शौरी.# कौन आए कौन नहीं-
निमंत्रण मिलने के बावज़ूद न आने वालों में वो सब लोग शामिल थे, जो पिछले पैराग्राफ में नहीं हैं. राजकुमार संतोषी, करण जौहर, विक्की कौशल, जावेद अख्तर और उनकी फैमिली (फरहान, जोया, शबाना) और कबीर खान जैसे लोग इनविटेशन के बावजूद नहीं पहुंचे. क्यूं नहीं पहुंचे? इसका उत्तर तो वही लोग दे सकते हैं, जो नहीं पहुंचे. जैसे कबीर खान ने दिया.
‘बजरंगी भाईजान’ और ‘एक था टाइगर’ के डायरेक्टर कबीर खान. उन्होंने कहा-
अगर गुंडे देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में प्रवेश कर सकते हैं और छात्रों और शिक्षकों को मार सकते हैं, तो चर्चा करने को क्या रह जाता है? उन गुंडों की हंसी और वो हमले के दृश्य हृदय विदारक हैं. ये बड़े मुद्दे हैं, जिनकी तत्काल सुनवाई होनी चाहिए. डिनर मीटिंग तो बाद में भी की जा सकती है.कबीर जेएनयू वाली हिंसा की बात कर रहे थे. आपको पता ही होगा कि 5 जनवरी की शाम (जब मुंबई में ये मीटिंग चल रही थी) दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हिंसा हुई. हिंसा से जुड़े कई वीडियो सामने आए. जिनमें दिखा कि कैंपस के अंदर घुस आए नकाबपोशों ने हाथों में सरिया, हॉकी स्टिक्स, डंडे और हथौड़े लेकर छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया.
JNU के साबरमती हॉस्टल का सीन. 5 जनवरी के दिन यहां जमकर तोड़-फोड़ हुई थी. फोटो- PTI.फरहान अख्तर ने 5 तारीख से पहले ही बता दिया था कि वो इस मीटिंग को अटेंड नहीं कर पाएंगे. क्यूं? ये कारण नहीं बताएंगे. ;-)
कुछ लोग जिनको निमंत्रण नहीं मिला वो कौन थे, गेस करना चाहेंगे?
- वरुण ग्रोवर, स्वरा भास्कर, अनुराग कश्यप, अनुभव सिन्हा...
जब ये मीटिंग चल रही थी उस दौरान ट्विटर पर #BJPBribesBollywood# ये सिलसिला पुराना है-
(बीजेपी बॉलीवुड को घूस दे रही है) टॉप ट्रेंड करने लगा था.
इस दौरान लोग एक पुरानी ग्रुप सेल्फी धड़ल्ले से शेयर करने लगे. पीएम मोदी की सेल्फी बॉलीवुड स्टार्स के साथ. ये सेल्फी आई कहां से?Far away from the violence at #JNU
— Rohit Khilnani (@rohitkhilnani) January 5, 2020
, #BJP
’s #PiyushGoyal
& #JayPanda
are meeting handful of members from #Bollywood
at a 5 star hotel in Mumbai discussing myths & realities pertaining to #CAA
pic.twitter.com/dWBPqK7Hne
इससे पहले भी मोदी सरकार बॉलीवुड से समर्थन जुटाने की और उनको अपने साथ जोड़ने की जुगत लगाती रही है. ठीक एक साल पहले. 10 जनवरी, 2019 को महावीर जैन (फिर से) ने मोदी और बॉलीवुड के बीच ब्रिज बनने का कार्य किया.
उस बार महावीर जैन के साथ शामिल थे करण जौहर. मीटिंग का एजेंडा था कि कैसे बॉलीवुड स्टार्स देश को बनाने में अपना योगदान कर सकते हैं.
इस वाली मीटिंग में शामिल थे, रोहित शेट्टी, भूमि पेडणेकर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, एकता कपूर, राजकुमार राव, विकी कौशल, वरुण धवन.
इसके बाद गांधी जी की 150वीं जयंती पर फिर एक सेल्फी और मीटिंग का दौर फिर चला.
इसमें शामिल थे, ऑफ़ कोर्स पीएम मोदी. और....
शाहरुख़ आमिर के साथ सेल्फी खिंचाते पीएम मोदी.आमिर खान, शाहरुख खान, कंगना रनौत, जैकलीन फर्नांडिस, सोनम कपूर, इम्तियाज अली, अनुराग बसू, एकता कपूर, जैकी श्रॉफ. और कुछ आदि-आदि.
तो यूं ये कहा जा सकता है कि बीजेपी, बॉलीवुड की महत्ता जानती है. वो जानती है कि ये लोग इन्फ्लूएंसर हैं. इनको कन्विंस कर दो तो कईयों को तो ये लोग ही कन्विंस कर देंगे. अपनी फिल्मों से लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउन्ट्स के माध्यम से. साथ ही सरकार के लोगों के साथ इनकी फोटो होना भर ही कम बड़ा इन्फ्ल्यूएंस नहीं. ऐसे ही थोड़े न पीएम मोदी की ये वाली सेल्फी 'पिक्चर ऑफ़ दी इयर' कहलाई गई. तस्वीरें तो बॉलीवुड और मोदी जी कि अन्यथा भी बहुत थीं.
तो जब बीजेपी को पता है कि सफलता का शॉर्ट रास्ता बॉलीवुड से होकर जाता है तो वो बी-टाउन से मेलजोल बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे. हालांकि सीएए के मुद्दे पर उन्हें वैसा सपोर्ट नहीं मिल रहा, जैसा ‘सेल्फी-प्रोक्लेम्ड’ सपोर्ट उन्हें पिछली दो बार मिला था. जहां पिछली दो मीटिंग्स राष्ट्र और राष्ट्रपिता जैसे ‘सर्वजन हिताय’ वाले कारणों के चलते थी. वहीं अबकी बार मामला थोड़ा अलग था.# कल आज और कल-
और इसलिए ही इस बार तीन तरीके के बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ हैं. एक जो सरकार और सीएए के समर्थन में हैं, दूसरे जो विरोध में हैं, तीसरे जो मौन हैं. जो दूसरे तरीके के सेलिब्रिटीज़ हैं, उनकी संख्या बढ़ती जा रही है. और इनको बीजेपी के समर्थक ‘हैंडल’ भी कर रहे हैं. जैसे हाल ही में दीपिका को किया था.
तो कहना ये है कि बीजेपी, सरकार समर्थन जुटाना ज़ारी रखेगी. कम से कम सीएए/एनआरसी को लेकर तो उनकी यही स्ट्रेटेजी रहेगी. हिन्दुतान टाइम्स की एक खबरOur film and entertainment industry is diverse and vibrant.
Its impact internationally is also immense.
Our films, music and dance have become very good ways of connecting people as well as societies.
Here are more pictures from the interaction today. pic.twitter.com/711sKni29l
— Narendra Modi (@narendramodi) October 19, 2019
भी इसी बात को पुष्ट करती है. खबर में बीजेपी के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि-
सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, सीएए को लेकर समाज के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के साथ ऐसी मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी.यानी बॉलीवुड के साथ सरकार का लव-हेट वाला रिलेशन लंबा चलने वाला है. और जब तक ये रिलेशन किसी एक पाले (लव या हेट) की तरफ नहीं झुक जाता, तब तक आप निश्चिंत हो सकते हैं कि देश में लोकतंत्र ज़िन्दा है.
वीडियो देखें:
2020 में बॉलीवुड में दिखेंगे ये 10 नए चेहरे-

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