आज दिसंबर का पहला शुक्रवार है. और इस वीकएंड आपके मनोरंजन के लिए कई सारी फ़िल्मेंऔर शोज़ सिनेमाघरों और ओटीटी पर आए हैं. जैसे नेटफ्लिक्स पर 'मनी हाइस्ट', ज़ी 5 पर'बॉब बिस्वास', अमेज़न प्राइम वीडियो पर 'इनसाइड एज' और थिएटरों में 'तड़प'. इन सभीफ़िल्मों के रिव्यू आपको हमारे साथी दे ही देंगे. और इनमें से 'इनसाइड एज' का रिव्यूदेंगे हम.# ये कहानी सिर्फ़ क्रिकेट की नहीं हैहर शो की तरह 'इनसाइड एज' का सीज़न टू भी एक क्लिफहैंगर के साथ खत्म हुआ था. जहांमुंबई मेवरिक्स पर दो साल का बैन लग गया था. भाईसाब ने अपनी ही बेटी मंत्रा पाटिलको फिक्सिंग केस का आरोपी बताकर जेल में डलवा दिया था. और ज़रीना मलिक ने विक्रांतधवन के साथ हाथ मिला लिया था.सीज़न 3 की कहानी इसे छूटे सिरे से शुरू होती है. जहां भाईसाब की चारों तरफ़ से लंकालगी हुई है. एक तो विक्रांत वापस आ चुका है और ज़रीना के साथ मिलकर भाईसाब को जेलपहुंचाने का हर संभव प्रयास कर रहा है. दूसरा भाईसाब की बेटी मंत्रा, जिसे उन्होंनेहवालात का फ्री फंड का पैकेज लगवा दिया, वो भी नाराज़ हैं. इस बार शो में क्रिकेट भीप्रीमियर लीग से निकलकर इंटरनेशनल हो गया है. इंडिया और पाकिस्तान का मैच हो रहाहै. जहां इंडियन क्रिकेट बोर्ड के प्रेसिडेंट यशवर्धन पाटिल उर्फ भैया जी इंडिया औरपाकिस्तान के बीच हो रहे मैच में भी अपनी गणित लगा मोटा पैसा बनाने के फेर में लगेहुए हैं. लेकिन भैया जी और इनके जैसे बाकी हाईप्रोफाइल बैटिंग मास्टर माइंडस के'पैसा बनाने के फेर' पर पानी तब फ़िर जाता है, जब इंडिया में बेटिंग लीगल कर दी जातीहै.लेकिन भैया जी भी हैवी ड्राइवर हैं. इतनी आसानी से मैदान छोड़ने को तैयार नहीं है.वो हर मुसीबत का साम-दाम-दंड-भेद से हल निकालने की कोशिश में लगे रहते हैं. अब सफ़लहोते हैं या इस क्रिकेट के कुरुक्षेत्र में धराशायी होते हैं, ये जानने के लिएअमेज़न प्राइम पर स्ट्रीम कीजिए 'इनसाइड एज सीज़न 3'.विक्रांत धवन.# हाउज़ दैट?इस बार कहानी क्रिकेट के ग्राउंड और लॉकर रूम पॉलिटिक्स से ज़्यादा क्रिकेट बोर्ड केऊपरी पदों तक पहुंचने की पॉलिटिक्स, इंडिया-पाकिस्तान जैसे देशों के मैच के पीछे केराजनीतिक समीकरण, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स का खेल और कई ऐसे ही पहलुओं को सामने रखतीहै. पिछले सीज़न से विपरीत इस बार कहानी टाइम ट्रेवल क्रोनोलॉजी में चलती है. पूरेशो के दौरान भाईसाब, विक्रांत, ज़रीना के बचपन से लेकर बड़े होने तक की कहानीफ़्लैशबैक में दिखाई जाती है. जिससे इन कैरेक्टर्स का प्रेजेंट बिहेवियर आपको औरबेहतर समझ आने लगता है. यहां तारीफ़ बनती है शो की प्रोडक्शन डिज़ाइनिंग टीम की.फ़िल्म का जितना भी क्रिकेटिंग सेटअप है, वो बहुत हद तक ऑथेंटिक नज़र आता है. क्रिकेटमैचों की जो क्राफ्टिंग है वो भी रियल लगती है.'इनसाइड एज 3' को रोचक बनाती है इसकी रियल राइटिंग. करण अंशुमन और नीरज उधवानी नेइस शो का स्क्रीनप्ले क्रिकेट से जुड़ी बहुत सी असल घटनाओं के इर्द-गिर्द बुना है.शो में क्रिकेट के अराउंड जो कुछ भी घटता है, वो आपको किसी ना किसी असली क्रिकेटिंगकन्ट्रोवर्सी की याद दिलाता है. इंडिया-पाकिस्तान के दौरान आम आदमी की उत्सुकता सेलेकर ग्राउंड में दिख रहे नेताओं के दिमागी खेल को शो में अच्छे से पिरोया गया है.राइटिंग की एक अच्छी बात ये और है कि इसमें जितने भी कैरक्टर्स हैं, वो सभी बहुत हीलेयर्ड और ग्रे हैं. कोई भी टोटली ईविल नहीं है. अगर कोई बुरा काम भी कर रहा है, तोभी उसने अपने मन में उसका जस्टिफिकेशन दे रखा है. जैसे कि हम सभी देते हैं.ख़ैर सब अच्छा ही नहीं है, कुछ नुक्स भी हैं. वैसे तो शो की शुरुआत बढ़िया पेस के साथहोती है लेकिन पांचेक एपिसोड्स के बाद मामला ठंडा पड़ने लगता है और क्लाइमेक्स तक बसगुनगुनाहट बचती है. इसकी एक वजह तो शो की लेंथ है, जहां प्रत्येक एपिसोड कुछ 40 से50 मिनट के बीच का है. दूसरी वजह है लास्ट के एपिसोड्स में थोक के भाव में हुआकिरदारों का हृदयपरिवर्तन. नाम तो नहीं बता सकते स्पॉइलर हो जाएगा, लेकिन एक हीएपिसोड में अचानक से इतने सारे लोगों का हृदय परिवर्तन हो जाता है कि चंपक चाचा भीकॉम्प्लेक्स खा जाएं.भाई साब.# एक्टिंग कैसी लगी?सत्ता और ताकत के लिए किसी को भी बलि चढ़ा देने को तैयार रहने वाले यशवर्धन पाटिलउर्फ़ भाईसाब के किरदार में आमिर बशीर ने तीसरे सीज़न में भी बेहतरीन काम किया है.ख़ासतौर से उनके और उनकी बेटी मंत्रा का किरदार प्ले कर रहीं सपना पब्बी के बीच केसीन्स में वो अलग स्टैंडआउट करते हैं. 'वेडनेसडे', और 'सेक्रेड गेम्स' में भी आमिरइम्प्रेसिव रहे थे. विवेक ओबेरॉय शो में विक्रांत धवन की भूमिका में हैं. इस बारविवेक सीरीज़ का सेंटर अट्रैक्शन पॉइंट रहेंगे. हालांकि इस बार उनके किरदार का अलगही कंट्रास्ट देखने को मिलता है . ज़रीना मलिक के रोल में ऋचा चड्ढा ने एक बार फिरज़बरदस्त परफॉरमेंस दी है. मंत्रा पाटिल के रोल में सपना पब्बी और देवेंदर मिश्रा केरोल में अमित सियाल ने एक बार फिर अपना कैलिबर शो में बखूबी दिखाया है. यहां स्पेशलमेंशन हिमांशी चौधरी का, जिन्होंने सुधा धवन का बहुत ही एजी रोल कुशलता से पोट्रेकिया. हालांकि कुछ एपिसोड तक तो मैं उन्हें सुरवीन चावला ही समझता रहा था.हिमांशी चौधरी का बेहतरीन काम.# पकडें या ड्राप कर दें?अगर एक आधी गलतियां इग्नोर मार दें, तो ओवरऑल 'इनसाइड एज 3' अपने क्रिकेटिंग ड्रामासे अंत तक टिकाए रखने में कामयाब होता है. हां बीच में ऐसे कई बार मौके आते हैं, जबकहानी स्लो पड़ती है. लेकिन फिर भी स्टार्टिंग में क्रिएट हुए रश की बदौलत आपक्लाइमेक्स देखे बिना खुद को रोक नहीं पाते. तो 'अंतिम: द फाइनल ट्रुथ' ये है किअगर आपने पिछले दो सीज़न देख रखे हैं, तो ये सीज़न भी आपको लुभाने में कामयाब होगा.हां अगर नहीं देखे हैं तो हो सकता है कहानी आपको बोर कर दे. ये है हमारी राय. बाकीआप लोग तो समझदार है हीं.