पढ़ोगे क्या देख ही लो.https://www.youtube.com/watch?v=MLOsS_iUqlE&feature=youtu.be तूफ़ान किसी वक्त केमोहताज नहीं होते. उनका तो जब वक़्त आया आए और तबाही मचा के चले गए. मेरी जिंदगी मेंये तबाही इस फिल्म ने मचाई जिसका नाम है. MSG The Warrior: Lion Heart. फिल्म कारिव्यू क्या पढ़ोगे? असल बात सुनो, जब सिनेमाहॉल के बाहर पहुंचे तो नगाड़ा और ढोल बजरहे थे. सोचिये कितना अच्छा लग रहा था, एक मॉल के बाहर कुरते में अंकल झूम रहे हैं.इंडिया यही है. हॉल के अंदर लोग हाथ जोड़कर फिल्म देख रहे थे. जब बाबा जी के आंसूबहते तो जनता कराह पड़ती. बगल वाले से पूछा कि फिल्म देखने कैसे आए तो उसने फक्र सेबताया ये हमारे सत्संग की फिल्म है. आगे कुछ पूछकर हम उसका मूड नहीं बिगाड़े. फिल्मपर लौटिए. आप अच्छी फिल्में बनाते हैं, बुरी फिल्में बनाते हैं. और फिर आप MSG वालीसीरीज की फिल्में बनाते हैं. आपको खुद नहीं पता होता आप क्या बना रहे हैं. येएलियंस वाली फिल्म है. एलियन का मतलब बाबा राम रहीम नहीं हैं. फिल्म में धरती परदूसरे ग्रह के लोग हमला कर देते हैं. इनको एलियन दिखाने के लिए. चाइना से आ रही जिनझालरों का विरोध हो रहा उनसे लपेट दिया गया. और हाथ में थर्माकोल के हथियार पकड़ादिए गए. फिल्म शुरू होती है. गोल्डन गन दिखती हैं. थर्माकोल का भरपूर यूज है. लेकिनथर्माकोल की बंदूकें भी ढंग से नहीं बनाईं हैं. बाबा राम रहीम लायन हार्ट हैं. अबये जासूस हैं या अवेंजर्स के निक फ्यूरी हैं, या मेन इन ब्लैक के विल स्मिथ हैं.वही जानें. कुल जमा समझिए लायन हार्ट नाम का ये आदमी वन मैन आर्मी है. जिसकीबंदूक,तलवार बन जाती है फिर तलवार पेन बन जाती है. बैग सुपरबाइक बन जाता है, फिरवही बैग अचानक सुपर कंप्यूटर बन जाता है. फिर फिल्म अचानक 300 साल पहले चली जातीहै. 300 साल पहले थर्माकोल की बड़ी-बड़ी तलवारें हैं. लॉन मोअर से कटी हुई घास है.फुटपाथों पर टाइल्स लगी है. तब बाबा का नाम शेरदिल हुआ करता था. उनका प्यार और उनकाएक ही काम था धरती माता की और मां-बहनों की इज्जत बचाना. यही बात वो सारी फिल्म मेंकहते हैं. गाना भी बजता है 'इज्जत का रखवाला शेरदिल'. अब मेरा मन भागने का हो रहाथा. सुषमा स्वराज को ट्वीट करने का हो रहा था. मुझे यहां से निकालो. इस फिल्म मेंतो इंटरवल भी बड़ी देर बाद हुआ. फिर अचानक आप वीडियो गेम खेलने लगते हैं. लेवल अनलॉकहोने लगते हैं. महाभारत की बात होने लगती है. ऐसा लगता है, फिल्म बनाने वालों नेफ्रैंकेस्टाइन, रेवेनेंट, हातिम ताई, और रामायण साथ में चलानी चाही है. हां रामायण,बाबा तीर निकालते हैं और समुद्र किनारे हो लेता है. रेवेनेंट जैसे भालू से लड़तेहैं. बर्फीला पहाड़ चढ़ते हैं. अंत में बाबा गेम ऑफ थ्रोंस जैसे सिंहासन में बैठतेहैं. और दुनिया के रखवाले साबित हो जाते हैं. फिल्म में तीन जगह मुसलमान आते हैं.लंबी दाढ़ी और आंख में काजल लगाकर. एक बार बच्चों को किडनैप किए आतंकी बनकर. एक बारबहू-बेटियों से जबरन ब्याह करने के लिए किडनैपर बनकर. एक बार गाय काटने को ले जातेकसाई बनकर. कहते हैं, तुम गाय को मां मानते हो, हम खाते हैं. बड़ा अच्छा मांस लगताहै. बाबा गायें बचाते हैं और गायें जाकर भुट्टे के खेत में चरने लगती हैं. येप्रॉब्लमेटिक है. कुछ और चीजें खटकती हैं, रेसिस्ट मजाक हैं, बीवी वाले जोक हैं,बॉडी शेमिंग है. फिल्म में अच्छा क्या है? एक गाना है किसानी वाला. लिरिक्स औरम्यूजिक की बात क्या ही करें. उसमें एक लाइन आती है जिसमें किसानों को आत्महत्या नकरने को कहा गया है. ये अच्छा है. एक जगह नशे से दूर रहने को कहा गया है. ये अच्छाहै. एक जगह कहा गया कोई दिन सुदिन-कुदिन नहीं होता ये अच्छा है. बाकी उनके भक्तोंके लिए सब अच्छा ही है. उनने बड़े मगन होकर फिल्म देखी और खूब तालियां बजाई. तो इसफिल्म में बहुत कार्डबोर्ड है, बहुत थर्माकोल है, फिल्म बहुत पीली है क्योंकि फिल्ममें बहुत सोना है. गुरुत्वाकर्षण बल फेल है. लॉजिक नहीं है. फिल्म देखने मत जाओबहुत बुरी फिल्म है. अगर उबके भक्त हैं तो फिल्म देखने जरूर जाइए, बाबा ने बहुतमेहनत की है. बाबा क्यूट दिखते हैं. बाबा ने बड़ी भली सीखें दीं हैं. आपको पसंदआएंगी. बाबा का एक्शन भी पसंद आएगा. ये फिल्म बाबा के भक्तों के लिए है.--------------------------------------------------------------------------------ये फिल्म न देखने का मन हो, तो ये रिव्यू पढ़ लो. ऐसा रिव्यू कहीं नहीं पढ़ा होगाREVIEW: मिर्ज़या देखने के बाद अंदर बस पीड़ और दुख है