'बिग बॉस' के घर की इन दो घटनाओं को 'क्यूट' कहकर इग्नोर करना कई वजहों से ग़लत है
अगर आप ये रियल्टी शो नहीं देखते हैं, तो भी आपको इन सीन्स से दिक्कत होनी चाहिए.

इस बार 'बिग बॉस' की TRP पिछले सीजंस से ज़्यादा रही. इसी के चलते जो फिनाले जनवरी में होना था, वो अब 16 फरवरी, 2020 तक के लिए पोस्टपोन कर दिया गया है. यानी शेड्यूल से 5 हफ्ते देरी से.
'बिग बॉस' में टीआरपी और कंट्रोवर्सी का सीधा संबंध है. जितनी ज़्यादा कंट्रोवर्सी उतनी ज़्यादा टीआरपी. और जितनी ज़्यादा टीआरपी, उतने ज़्यादा विज्ञापन और कमाई.# कर्टेन रेज़र-
लेकिन कमाई के चक्कर में आप एक हद तक ही जा सकते हैं और उस हद का नाम है सेंसरशिप. साथ में नैतिक होने (या दिखने) का दबाव भी विवाद खड़े करने की इस अपर लिमिट को बनाए रखने में मदद करता है. इसी लिमिट के चलते बिग बॉस में कुछ नियम बेहद सख्त हैं. जैसे, कंटेस्टेंट एक दूसरे को दूर से कितना ही कोस लें, लेकिन हाथापाई नहीं कर सकते. अगर ऐसा होगा तो उनपर एक्शन लिया जाएगा. इसके अलावा सेक्सुअल कॉन्टेंट पर भी पूरी तरह रोक है.
#अब मुद्दे पर आते हैंबिग बॉस के घर में सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज़ गिल के बीच का रिश्ता अजब सा चल रहा है. पॉप कल्चर में इसे ‘लव-हेट रिलेशन’ कहते हैं. हमारे गांव में कहते हैं-
त्यर बगैर चलून नै, त्यर दगड़ी पटून नै.मने, न तेरे साथ मेरी पटती है, न तेरे बिना मेरा काम चलता है. शुरुआत में एक दूसरे के खून के प्यासे ये दोनों अब काफी करीब आ गए हैं, लेकिन अब भी इनके रिलेशनशिप स्टेटस के सामने ‘इट्स कॉम्प्लिकेटेड’ ही लिखा जाना चाहिए. अब हम सीधे फ़ास्ट फॉरवर्ड होते हैं लेटेस्ट दो एपिसोड्स पर.
# एपिसोड 69-
सिद्धार्थ किसी बात से शहनाज़ से नाराज़ था. शहनाज़ सिद्धार्थ को मनाने में लगी थी. लेकिन सिद्धार्थ नहीं माने. शहनाज़ का ये मनाना, सिद्धार्थ को छेड़ने की हद तक पहुंच गया. इरिटेट होकर सिद्धार्थ ने शहनाज़ का हाथ पकड़कर पीछे की तरफ मोड़ दिया. सिद्धार्थ ने शहनाज़ को अपनी फिजिकल स्ट्रेंथ से दबाने और चुप कराने की कोशिश की.
# एपिसोड 70-
इस एपिसोड में भी दोनों बात करते-करते झगड़ पड़े. नोंक-झोंक के दौरान शहनाज़, सिद्धार्थ को थप्पड़ मार देती है. दो बार. हालांकि सिद्धार्थ और शहनाज़ अपनी ये लड़ाई बिग बॉस तक एस्कलेट नहीं करते, लेकिन थप्पड़ खाते हुए सिद्धार्थ चौंक ज़रूर गए.
Nominations mein @shehnaazgill ne badal diya game ka modh! Kya toot jayegi unki team? Dekhiye aaj raat 10:30 baje. Anytime on @Voot @vivo_india @beingsalmankhan #BiggBoss13 #BiggBoss #BB13 #SalmanKhanInstagram पर यह पोस्ट देखें
को Colors TV
(@colorstv) द्वारा साझा की गई पोस्ट
सिद्धार्थ द्वारा शहनाज़ की कलाई मरोड़ने वाले सीन पर सोशल मीडिया पर काफी रिएक्शन्स आ रहे हैं. कुछ पक्ष में, कुछ विरोध में. इंट्रेस्टिंग बात ये है कि दोनों ही पक्षों के तर्क सही लग रहे हैं.# रिएक्शन्स-
# विरोध के सुर-
लोग इस क्लिप को शेयर करके इसे फिजिकल एब्यूस कह रहे हैं. साथ ही शहनाज़ को भी इसलिए कोस रहे हैं कि कोई भी होशमंद औरत अपने प्रति ऐसा व्यवहार सहन नहीं करेगी. वो भी नेशनल टेलीविज़न पर.
कुछ तो ‘बिग बॉस’ प्रोग्राम को ही बैन करने की बात करने लगे.If this is not Harrassment than What is. You can clearly see this Abuser thukla put his leg on her stomach and twisting her hands. No sane woman would tolerate such humiliation on national Telivision. @BiggBoss
— Raaz Bani Rahe ( MUFC ) (@KeepItRaaaz) 6 जनवरी 2020
@ColorsTV
@mnysha
#BB13
#BiggBoss13
#BiggBoss
pic.twitter.com/R7ISMYyuCl
कुछ को ये बात डिस्टर्बिंग लगी. वे पूछने लगे कि क्या अब ‘शारीरिक हिंसा’ की जा सकती है? इसकी अनुमति है?What the hell being shown on National Television in the name of entertainment. Imagine what kind of impact of this will be on young innocent minds. Isn't it harassment..... ?!! Ban this programme @BiggBoss
— Anand (@i_NAnand) 7 जनवरी 2020
. https://t.co/XwbjGIQeR7
कुछ तो एक्स्ट्रीम में जाकर बात करने लगे. बोले, सिद्धार्थ को गिरफ़्तार किया जाए.This is assault, @BiggBoss
— Rituparna Chatterjee (@MasalaBai) 7 जनवरी 2020
@ColorsTV
. Why is this man still allowed to be on the show? Is physical violence being allowed now? This is absolutely sick and disturbing. https://t.co/7bkKt2v5Ma
# पक्ष में आवाजें-WTF! He should be arrested.. https://t.co/R0BggbpAhD
— आदित्य (@MuradsAdi) 7 जनवरी 2020
लेकिन फिर इसके जवाब में लोग पूरी क्लिप लेकर आ गए
और सिद्धांत को निर्दोष साबित करने लगे. उनका कहना था कि छोटी क्लिप देखने से कॉन्टेक्स्ट बदल गया. इसलिए आप पूरी क्लिप देखो.
लोगों का कहना ये भी था कि दोनों के बीच ऐसा होना बड़ा सामान्य है. दोनों ये सब मस्ती-मजाक में करते हैं. और उनका कहना था कि विरोध करने वालों को पूरा कॉन्टेक्स्ट समझने के लिए शो पूरा देखना होगा.Here's the Full Clip, to defame #SidharthShukla
— Dipak Singh♥️ (@DipakKSingh) 7 जनवरी 2020
People Edit the Clip to malign someone's image and some dump people start commenting without even trying to know what is the fact, just for the sake of getting Fame and Media Attention, @SethShruti
@MasalaBai
@KiranManral
pic.twitter.com/jXU75dBSGK
इन्होंने विरोध करने वालों को हिदायत दे डाली कि आप सना-सिड की केमिस्ट्री समझो पहले.Seriously...ya toh ye log show Ni dekhte ..ya phir in logo ki akal chrne gye hai...aSA kitni Baar Sana or Sid Masti Mai karte hai or Kiya hai phele bhe ...kaam dhaam kuch hai Ni toh kuch bhe bol lo ..jao phle Apne girebaan Mai Kahlo.#ApologizeToSidharthShukla
— uttam negi (@uttamne75494320) 7 जनवरी 2020
अगर आपने 'बिग बॉस' देखा है, या उसे फॉलो करते हैं तो आप इस पक्ष वाले तर्क से सहमत हुए बिना भी नहीं रह सकते. और यूं #ApologizeToSidharthShuklaHow dirty and shallow minded these people are. They just want to defame Sidharth without knowing the equation between Sid and Sana. They've done nothing in life and just want cheap popularity.. #ApologizeToSidharthShukla
— Kashif tanoli (@Kashift30277353) 7 जनवरी 2020
ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा.
# देखिए जिन दोनों सीन्स की हम बात कर रहे हैं वो प्रथम दृष्टया क्रूरता की श्रेणी में आ रहे हैं. हमारा सवाल ये भी बन रहा है कि क्या इसके बाद बिग बॉस ने शहनाज़ और सिद्धार्थ के खिलाफ कोई एक्शन लिया, या नहीं.# मुझे कुछ कहना है-
# लेकिन जब हम पूरा कॉन्टेक्स्ट देख रहे हैं तो ये हिंसा कम और एक खेल सा अधिक लग रहा है. जिसमें दोनों की ही सहमति है. और इसलिए दोनों का ही एक मौन एग्रीमेंट है कि इसे बिग बॉस तक एस्कलेट नहीं करना. यही बात शहनाज़ ने पिता संतोक सिंह ने भी कही-
दोनों के बीच जो भी हो रहा है मुझे इससे कोई ऐतराज नहीं है.तो दिक्कत कहां है? इसमें हमारा बोलना कहां तक उचित है? ये तो वही वाली बात हुई जब मियां बीवी राज़ी...
# लेकिन दिक्कत है. एक नहीं कई दिक्कतें हैं. सबसे पहली दिक्कत तो ये कि हिंसा चाहे खेल-खेल में ही क्यों न हो उसे प्रमोट करना कहीं से भी सही नहीं है. याद है न 'कबीर सिंह' वाले केस में भी कुछ ऐसा ही था. वहां पर भी डायरेक्टर ने लेम सा एक्सक्यूज़ दिया था कि प्रेम और थप्पड़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.
# ये है दूसरी दिक्कत. जो ‘गाइड’ में रोज़ी भी जस्टिफाई करती है, कि-
मारोगे पर प्यार भी तो करोगे.प्यार. ये एक शब्द जितनी हिंसा का कारण बना है शायद कोई और शब्द नहीं. शब्द क्यूंकि सच नहीं. क्यूंकि ‘प्यार’ कहना, प्यार करना नहीं होता.
‘कबीर सिंह’ मूवी तो फिर भी वर्क ऑफ़ फिक्शन की श्रेणी में आती थी. लेकिन ‘बिग बॉस’ की तो विधा ही ‘रियलिटी शो’ कहलाती है. चाहे कितना ही स्क्रिप्टेड हो ये शो, लेकिन अंततः प्रोजेक्ट तो रियल की तरह ही कर रहा है खुद को. आधिकारिक तौर पर तो सच ही है सब कुछ.
# दिक्कत एक और है, कि अगर हिंसा करने वाले और सहने वाले को कोई दिक्कत नहीं है तो भी बिग बॉस स्वतः संज्ञान क्यूं नहीं ले रहा? उसे वहीं पर रोक क्यूं नहीं रहा?
# दिक्कत ये भी है कि ये हाथापाई इस सीज़न में कोई पहली बार नहीं हो रही.
हमने सिर्फ इसी की बात इसलिए की क्यूंकि इसको लेकर बज़ बना. अन्यथा मधुरिमा ने गुस्से में अपने एक्स बॉयफ्रेंड विशाल को चप्पल से मारा. इससे पहले माहिरा भी पारस को थप्पड़ लगाती हुई नजर आईं हैं. कहने का मतलब ये कि आप हिंसा की कितनी घटनाओं को ‘म्यूचुअल अग्रीमेंट’ या प्यार के नाम पर जस्टिफाई करोगे?
# 'भाई बहनों के बीच बचपन में होने वाली लड़ाई' की तरह क्यूट दिख रही इस लड़ाई में दिक्कत भी वही है जो भाई बहनों के बीच बचपन में होने वाली लड़ाई में थी. स्त्री को अपनी ताकत के ज़ोर पर नीचा दिखाने की. वो चिढ़ाए तो उसे पीट देने, उसकी चोटी खींच देने की.
# दिक्कत रिवर्स सेक्सिज्म की भी है. आपने देखा कि सिद्धार्थ ने जो किया उसको लेकर तो फिर भी इतना शोर शराबा हुआ लेकिन शहनाज़ ने जो किया, माहिरा ने जो किया, मधुरिमा ने जो किया वो अननोटिसेबल रह गया. हमें याद रखना होगा कि हिंसा, हिंसा है. फिर पीड़ित कोई भी हो, दोषी कोई भी हो. अन्यथा ये सब उसी कैटेगरी में आ जाएगा, जिस कैटेगरी में ‘मर्द होकर रोता है’ या 'मर्द को दर्द नहीं होता' जैसे स्वीपिंग कमेंट्स आते हैं.
# और अंत में दिक्कत एक और है. लोग कह रहे हैं कि अगर सिद्धार्थ ने शहनाज़ को मारा तो शहनाज़ ने भी तो सिद्धार्थ को मारा. हिसाब बराबर. उन्हें ये समझना होगा कि ये नैतिकता और एथिक्स की बातें हैं, गणित की नहीं. यहां माइनस माइनस प्लस नहीं होता है. उन्हें ये समझना होगा कि दो ग़लत एक सही नहीं बनाते. उन्हें स्वीकारना होगा कि 'आंख के बदले आंख' वाले लॉजिक से पूरी दुनिया दृष्टिहीन हो जाएगी. एक अतिवाद का हल दूसरा अतिवाद नहीं होता.
इस श्लोक का मुझे एक दूसरा ही अर्थ मालूम पड़ता है. वो ये कि जब भीतर का ईश्वर मरता है तो बाहर एक स्थूल ईश्वर पैदा होता है. ये श्लोक और इसका ये वाला अर्थ यहां पर क्यूं?# यदा यदा हि धर्मस्य-
वो इसलिए कि हमारा मानना है कि ये प्रोड्यूसर्स को ही तय करना चाहिए कि वो क्या बनाएं और ये दर्शकों को ही तय करना चाहिए कि वो क्या देखें. मतलब सेल्फ सेंसरशिप. अगर सेल्फ सेंसरशिप असफल हुई तो सेंसरशिप अस्तित्व में आएगी.
यूं ये विमर्श छोटा-मोटा नहीं. ये भीतरी और बाहरी की लड़ाई है. ये सूक्ष्म और विशाल की लड़ाई है. ये अंतरात्मा और ईश्वर की लड़ाई है. इसलिए एक व्यक्ति के रूप में जब तक हमारी अंतरात्मा जीवित है, हमें ईश्वर की ज़रूरत नहीं. एक शो मेकर के रूप में जब तक हम सेल्फ सेंसरशिप के प्रति ईमानदार हैं, तब तक किसी बाहरी सेंसरशिप की ज़रूरत नहीं.
वीडियो देखें:
2020 में बॉलीवुड में दिखेंगे ये 10 नए चेहरे-

.webp?width=60&quality=30)