ये साल का वो समय है जब एक तरफ मच्छर आपका खून नहीं छोड़ते. उनसे जो बच जाता है वोडॉक्टर चूस लेते हैं. मलेरिया से लेकर टायफाइड तक पॉजिटिव होते हैं. आदमी जिंदगीमें पॉजिटिविटी चाहता है. पर इस तरह से भी नहीं. इलाज ये कि इलाज के लिए डॉक्टर केयहां भागिए. वहां भी गजब किस्म के लोग मिलते हैं. आगे जो आप पढने जा रहे हैं दरअसलइनको आपने कभी न कभी डॉक्टर के क्लिनिक में भुगता होगा. पढ़िए दस भांत के लोगों केबारे में जो क्लीनिक में मिलते ही मिलते हैं. * शो ऑफ वाले अंकल-आंटीये वो लोग होते हैं जो हमेशा महंगे-महंगे अस्पतालों के नाम लेते हुए बताते हैं किहम तो हमेशा वहां जाते हैं. इनकी मानें तो इनकी नाक भी चूती है तो छिरिकने लीलावतीया हिंदुजा जाते हैं. ये तो इस बार इमरजेंसी थी इसलिए यहां आ गए. इनको बीमार होनाऔर महंगे अस्पतालों में जाना भी इतना अच्छा लगता है कि बस डॉक्टर के यहां अगल-बगलबैठों को महंगे अस्पताल में खींची हुई सेल्फी बस दिखाना रह जाता है. ये उस किस्म केलोगों में से हैं जिनके खानदान से कोई विदेश यात्रा करने जाए तो चौराहे पर होर्डिंगलगाकर एम्बैरेस करते हैं. * रहस्यमयी बीमारी वालेइनको लगता है कि इनको कोई रहस्यमयी बीमारी हो गई है. इनका शुगर ठीक है. सांसें ठीकहैं. मलेरिया नहीं हुआ, वायरल नहीं हुआ होता. खून में थक्के नहीं बंधते. नाक नहींफेफराती. मुंह से दुर्गन्ध नहीं आती. पेट नहीं गड़गड़ाता. गैस के गुल्थे नहीं फूलते.देह में चकत्ते नहीं बनते. लेकिन चक्कर आते हैं. इनके मुताबिक़ इसकी वजह कमजोरी नहींहै. इसकी वजह शायद दूसरे ग्रह के एलियन होते हैं जो कोई रहस्यमयी बीमारी सिर्फइन्हें भेज कर मानवजाति के खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र कर रहे हैं. * जल्दी वाला बाबूएक आदमी ऐसा होता है जिसे बहुत जल्दी होती है. ये आपसे बार-बार पूछेगा कि आपका नंबरकब आएगा. थोड़ी देर बात और कीजिए तो ये आपसे आपके पहले जाने की परमीशन भी मांग लेगा.ये बीच-बीच में कम्पाउंडर से भी पूछता रहेगा कि इसको पहले नहीं जाने दिया जा सकता.इसको देख लगता है अगर इसको जल्दी जाने न दिया गया तो बीमारी के बजाय जल्दी से मरजाएगा. * डॉक्टर से बड़ा डॉक्टरआपको एक आदमी पक्का ऐसा मिल जाएगा जो आस-पास वालों के रोग, लक्षण सब पूछ डालेगा.साथ ही उनको इलाज भी बता डालेगा. इसके खुद के अनुभव होते हैं. इसकी ताई की बहन कोजो रोग हुआ होगा उसी के अकॉर्डिंग ये आपको इलाज बता डालेगा. ये आपको निमोनिया मेंहल्दी-शहद खिला सकता है. कांख के फोड़े में आपको नीम की पुल्टिस बंधवा सकता है. इसेदेख समझ नहीं आता कि ये इलाज कराने आया है या डॉक्टर की दुकान बंद कराने. * बीपी का मरीजये आते ही बीमारी बाद में दिखाएगा, लक्षण बाद में बताएगा. थर्मामीटर बाद मेंछुआएगा. बीपी पहले ही टेस्ट करा लेना चाहता है. इसको जाने क्यों लगता कि इसका बीपीगिरा या चढ़ा है. बीपी की एक प्रयोगशाला खुद इसके घर में होती है. ऐसे लोगों को बीपीकी पूरी शब्दावली रटी होती है. लो हुआ तो किस अनुपात में या चढ़ा तो किस अनुपात में.इसको सारी बीमारियों की जड़ बीपी लगता है. इसको लगता है अगर वक़्त रहते डॉक्टर नेदवाई देकर बीपी को कंट्रोल में नहीं किया तो इसके साथ बहुत बुरा हो जाएगा. फिर भलेडॉक्टर कहता जाए कि आपका बीपी नहीं गैस चढ़ी है. ये भरोसा नहीं करते. * डॉक्टर का रिश्तेदारये बड़ा पुराना मरीज होता है. और यही चीज दूसरों को भी जतलाना चाहता है. वेटिंग रूममें बैठे-बैठे भी ये बात कई बार कहता है. जब डॉक्टर के पास पहुंचता है तो भाभी जीके हाल-चाल पूछ अपनापन दिखाता है. अगर बच्चों को साथ ले गया हो तो 'आपने ही तो चारसाल पहले दवाई दी थी, उसके बाद आज ही बीमार पड़ा' टाइप बातें कहता है. * बीमार जिसे देख आप बीमार हो जाएंये बीमार कम होता है लेकिन इसकी शक्ल ज्यादा उतरी होती है. ये आपके बगल में बैठा होतो आप भी बीमार फील करना शुरू कर देते हैं. अगर आप इससे बात करना शुरू करें तो आपकोमहसूस होगा आपकी जांघ के नीचे की नसें कुलमुलाने लगी हैं. आपको ठंडी सी लगने लगेगी. * सब याद रखने वाले इनको सब याद रहता है. एक हफ्ते पहले शाम को खाने में बैगन खाया था. तीन दिन पहलेसुबह खीरा ज्यादा खा लिया था. 5 दिन पहले दोपहर को सेब खाना भूल गए थे. तीन बरसपहले दवाई के साढ़े आठ घंटे बाद नींबू खा लिया था. इनने अन्नप्राशन में क्या खायाथा. इन्हें ये भी याद रहता है. ये दवाइयों के नाम भी ऐसे बताने लगते हैं मानोएमिनेम मंत्र जप रहा हो. ये जब दवाइयों के नाम लेना शुरू करते हैं तो मेडिकल स्टोरवाला भी बी. फार्मा की डिग्री इनके सुपुर्द कर दुकान छोड़ देता है. * दुखियारी मां दुनिया की हर मां की तरह इसका भी एक ही रोना होता है. बच्चा कुछ खाता ही नहीं, येशिकायत उन्हें तब से शुरू हो जाती है जब बच्चे की खाने की उम्र भी नहीं होती. छहमहीने के बच्चे से भी उन्हें यही शिकायत होती है. और छह साल वाले से भी और सोलह सालवाले से भी. डॉक्टर की चिंता भले ये हो कि लड़के के दांत मीठा खाकर कड़ाए जा रहे हैं.वजन इतना बढ़ रहा हो कि डॉक्टर हेल्थ के लिए चिंतित हों, ये कहेंगी यही कि लड़का नखाने के कारण बीमार है. * डूबकर टीवी देखने वाले भले वहां फोन पर चिल्ला-चिल्लाकर फोन पर बिजनेस मीटिंग करने वाले बैठे हों. जोर-जोरसे जान-बूझकर खांसने वाले हों लेकिन सबसे अलग वो लोग होते हैं जो वेटिंग रूम मेंटीवी देखने लगते हैं. ये टीवी में पूरा डूब जाते हैं, जैसे ये जिंदगी में पहली बारटीवी देख रहे हों. और आखिरी भी. इनके बीमार होने का उद्देश्य ही यही था कि ये बीमारहों क्लिनिक आएं और टीवी देख सकें.