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पड़ताल: रोहिंग्या मुसलमान हिंदुओं को काटकर उनका मांस बेच रहे हैं?

उस वीडियो का सच जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

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20 जून 2018 (अपडेटेड: 20 जून 2018, 12:29 PM IST)
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रोहिंग्या लोगों को लगातार नरभक्षी बताने की साजिश हुई है.
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रोहिंग्या. म्यांमार में अपनी ज़मीन से खदेड़े गए लोग जो बांग्लादेश, थाइलैंड, भारत और पूरे दक्षिण पूर्वी एशिया में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर हैं और जिनकी तकलीफ का ज़िक्र संयुक्त राष्ट्र संघ तक में कई बार हो चुका है. लेकिन वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के लिए रोहिंग्या अवैध घुसपैठिए हैं जो भारत में ज़मीन हथियाना चाहते हैं. वॉट्सऐप पर लगातार रोहिंग्या शर्णार्थियों को लेकर दुष्प्रचार चलता है. और इस दुष्प्रचार की सबसे अजीब बात ये है कि रोहिंग्या को नरभक्षी (कैनिबल या मैन ईटर) बताने की कोशिश की जाती है.
ऐसे ही एक भ्रामक मैसेज के बारे में हमने आपको कुछ समय पहले बताया था जिसमें अंतिम संस्कार की एक बौद्ध परंपरा को रोहिंग्या द्वारा नरभक्षण का सबूत बता दिया गया था. वो खबर आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.
 अब ऐसा एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहा है जिसमें एक दुकान पर इंसान का मांस बिकता नज़र आता है. वीडियो में इसानी शरीर के टुकड़े नज़र आते हैं और एक रेट लिस्ट भी लगी है जिसमें मुंडी का रेट 500 रुपए और इंसानी मांस का भाव 1000 रुपए किलो लिखा है. एक आदमी लोगों को मांस खरीदने के लिए बुला भी रहा है. इस वीडियो के साथ ये मैसेज नत्थी है-

*ये है रोहिंग्या मुस्लिम!! देखो कैसे खा रहे हिन्दूओ को.. और हिन्दू अभी सिर्फ पेट्रोल का रोना लेकर सरकार को कोस रहे हैं।

*हिन्दुओं समय रहते रोहिंग्या राक्षसों का समर्थन करने वाले देशद्रोही न्यूज चैनल एवं वोटबैंक के भूखे भारत के भ्रष्ट राजनैतिक दलों के खिलाफ एकजुट हो जाओ।*

*नोट: वीडियो विचलित कर सकता है, कृपया कमजोर दिल वाले ना देखें*

*इसको भेजने के पीछे मकसद आने वाले समय से सावधान करना है। हर हिन्दू और देश की सरकार तक ये संदेश पहुंचना चाहिए।*

*ये बताना है कि जिन्हें देश में शरण दी जा रही है वो लोग नरभक्षी हैं, इसलिए ही उन्हें म्यांमार से निकाला गया है, ये लोग इंसान नहीं राक्षस हैं और इन्हें बसाना कितना ख़तरनाक हो सकता है।*

(इस आर्टिकल में लगी तस्वीरें देखकर विचलित न होइएगा. ये सब फर्जी हैं.)


इंसानी मांस की दुकान!
इंसानी मांस की दुकान!

ये वीडियो देखने में बहुत वीभत्स है. लेकिन शांत चित्त से ध्यान लगाकर यदि इस वीडियो को देखा जाए तो आप वो बातें पकड़ने लगेंगे जिनके आधार पर इस वीडियो को फर्ज़ी कहकर खारिज किया जा सकता है. हम सिलसिलेवार ढंग से आपको वो बातें बताएंगेः
वीडियो की भाषा
रोहिंग्या लोग रोहिंग्या भाषा बोलते हैं. कुछ रोहिंग्या बर्मीज़ भी बोलते हैं जो म्यांमार की भाषा है. म्यामार से जान बचाकर भागने वाले रोहिंग्या हिंदी नहीं जानते. लेकिन वीडियो में रोहिंग्या बताए लोग हिंदी ही बोल रहे हैं. वीडियो में जिस तख्ती पर मांस का रेट लिखा है, वो भी देवनागरी में ही है. एक और बात है. इस वीडियो में हिंदी जिस शैली में बोली जा रही है, माने बोली वो बिहार की लगती है. बिहार में भी दरभंगा - पटना - बिहार शरीफ - वैशाली वाले बेल्ट की. वीडियो में नज़र आ रही तख्ती पर मुड़ी, पचोनी और गोड़ी का रेट लिखा है. मुड़ी इस इलाके में सिर को कहते हैं. और इस इलाके में मांस के साथ अलग से सिर खरीदने का चलन भी है. मछली का धड़ अलग बिकता है और मुड़ी याने कि सिर अलग. पचोनी माने लीवर होता है और गोड़ी माने पैर. ये यूपी-बिहार में इस्तेमाल होने वाले आंचलिक शब्द हैं न कि म्यांमार में.
इस आदमी के पेट पर मिट्टी पड़ी है. इसीलिए लगता है कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं.
इस आदमी के पेट पर मिट्टी पड़ी है. इसीलिए लगता है कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं.

वीडियो में दिख रहा आदमी साबूत है
वीडियो में सबसे विचलित कर देने वाली चीज़ों में से एक है वीडियो में नज़र आ रहा कटा हुआ सिर. इस सिर से थोड़ी दूर पैर पड़े हुए हैं. कोने में एक हाथ भी है. ऐसा लगता है कि किसी आदमी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए हैं. यहां होशियारी की गई है. ध्यान से देखने पर मालूम पड़ता है कि एक आदमी दरअसल ज़मीन पर लेटा हुआ है और उसके पेट पर मिट्टी पड़ी है.
ट्रैक्टर जो म्यांमार का नहीं भारत का है
इस वीडियो की पड़ताल करते हुए हमारे हाथ अंग्रेज़ी बेवसाइट बूम लाइव की एक खबर हाथ लगी. उसमें इसी वीडियो में नज़र आ रहे महिंद्रा ट्रैक्टर का जिक्र था. हमने ध्यान से देखा तो यकीनन ट्रैक्टर महिंद्र का यूवो 275 DI नज़र आया. हमारी जानकारी के मुताबिक महिंद्रा एक भारतीय कंपनी है और इसके ज़्यादातर ट्रैक्टर भारत में ही बिकते हैं. माने उस देश में, जहां रोहिंग्या अभी इस स्थिति में नहीं हैं कि वो इंसान का मांस बेच खाएं और कानून से बच जाएं.
वीडियो में नज़र आ रहा ट्रैक्टर भारत में बनता है, म्यांमार में नहीं.
वीडियो में नज़र आ रहा ट्रैक्टर भारत में बनता है, म्यांमार में नहीं.

ये भी समझें कि खून की तासीर ये होती है कि वो सूखने पर गहरा कत्थई (या काला) हो जाता है. वीडियो में नज़र आ रहा खून चटख लाल है. माने वो खून नहीं, रंग है. और वीडियो में नज़र आ रही दुकान भी दुकान नहीं लगती. वो चारों तरफ से घिरी हुई है. बांस का बाड़ा बना हुआ है. दुकान होती, तो कम से कम एक तरफ से खुली होती.
इन सारी बातों के आधार पर ये कहा जा सकता है कि ये वीडियो यकीनन रोहिंग्या मुसलमानों के नरभक्षण या कैनिबलिज़म का सबूत नहीं है. हमारा अनुमान ये है कि ये किसी देहाती मेले में लगा स्टॉल है. कहां का, हम फिलहाल नहीं जानते. अगर आप जानते हैं, तो हमें lallantopmail@gmail.com पर बताएं. या फेसबुक पर मैसेज कर दें. ताकि हम एक सताई हुई कौम को बदनाम करने की इस साज़िश पर पूरी तरह लगाम लगा सकें.


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