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Nagina Loksabha Results: लोकसभा आ रहे हैं भीम आर्मी के चंद्रशेखर, नगीना से BJP प्रत्याशी को भारी अंतर से हराया

आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने नगीना लोकसभा सीट से नामांकन कर लड़ाई को दिलचस्प बनाया था.

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4 जून 2024 (अपडेटेड: 4 जून 2024, 06:34 PM IST)
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बीजेपी के उम्मीदवार ओम कुमार नगीना लोकसभा में ही आने वाली नहटौर सीट से मौजूदा विधायक हैं. (फोटो- X)
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उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट (Nagina Lok Sabha) से आजाद समाज पार्टी (ASP) के मुखिया चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad ) ने सबको चौंका दिया है. चंद्रशेखर 1 लाख 51 हजार 473 वोट से जीत गए हैं. उन्हें 5 लाख 12 हजार 552 वोट मिले हैं. भाजपा के ओम कुमार दूसरे नंबर पर रहे. उन्हें 3 लाख 61 हजार 79 वोट मिले. समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार को 1 लाख 2 हजार 374 वोट मिले.

2019 चुनाव के नतीजे

पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 15 लाख 86,117 मतदाता थे. उस चुनाव में BSP प्रत्याशी गिरीश चंद्र को जीत हासिल हुई थी. उन्हें 5 लाख 68,378 वोट हासिल हुए थे. गिरीश को 35.83 प्रतिशत वोट मिले थे. इस चुनाव में BJP प्रत्याशी डॉ. यशवंत सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे. उन्हें 4 लाख 1,546 वोट मिले थे. जो संसदीय सीट के कुल मतदाताओं का 25.32 प्रतिशत था. यानी जीत का अंतर 1 लाख 66,832 रहा था.

2014 चुनाव के नतीजे

साल 2014 में हुए आम चुनाव में कुल 14 लाख 93,419 मतदाता थे. BJP के यशवंत सिंह ने 3 लाख 67,825 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. ये कुल वोटों का 24.63 प्रतिशत था. दूसरे स्थान पर SP के उम्मीदवार यशवीर सिंह रहे थे. उन्हें 2 लाख 75,435 वोट मिले थे. वहीं BSP के गिरीश चंद्र को 2 लाख 45,685 वोट मिले थे. लोकसभा चुनाव 2014 में इस संसदीय सीट पर जीत का अंतर 92,390 था.

नगीना किसी का गढ़ नहीं!

नगीना सीट को किसी भी पार्टी का गढ़ नहीं माना जाता है. यहां से कोई दोबारा सांसद नहीं बनता. पिछली बार के सांसद गिरीश चंद्र इसी वजह से इस बार बुलंदशहर चले गए हैं. उनकी जगह बसपा ने सुरेंद्र पाल सिंह को टिकट दिया. बीजेपी ने ओम कुमार को टिकट दिया जो नटहौर विधानसभा से तीन बार विधायक रह चुके हैं. वहीं सपा ने पूर्व न्यायिक अधिकारी रहे मनोज कुमार को टिकट दिया है.

लेकिन सीट की लड़ाई को दिलचस्प बनाया है आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद से ही चंद्रशेखर ने नगीना में डेरा डाल दिया था. डेढ़ साल की मेहनत के बाद उम्मीद थी कि सपा-रालोद-कांग्रेस के INDIA गठबंधन से उन्हें यहां से दावेदारी मिल जाएगी. लेकिन चुनाव से ठीक पहले जयंत चौधरी बीजेपी के साथ हो लिए. और सपा ने नगीना से अपना उम्मीदवार उतार दिया. 

नगीना से सपा उम्मीदवार घोषित होने के बाद एक चीज जो स्पष्ट हुई वो ये थी कि अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद के बीच नगीना से दावेदारी को लेकर कोई सीधी बात नहीं हुई. कहा गया कि चंद्रशेखर ने सपा से समर्थन नहीं मांगा. इसलिए अखिलेश ने अपना उम्मीदवार उतार दिया.

हालांकि, कहा ये भी गया कि सपा चंद्रशेखर को साइकिल सिंबल से चुनाव लड़ने को तैयार थी लेकिन चंद्रशेखर साइकिल पर सवार होने को तैयार नहीं थे. चंद्रशेखर की सहारनपुर, बिजनौर (नगीना इसी जिले में आता है), मेरठ जैसे दलित बाहुल्य जिलों में तगड़ी पैठ मानी जाती है. दलितों में भी और मुस्लिम समुदाय में भी.

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जातीय समीकरण

सीट पर करीब 21 फीसदी (लगभग 3 लाख) अनुसूचित जाति के वोटर्स हैं, और तकरीबन 50 फीसदी मुस्लिम (लगभग 7 लाख) मतदाता हैं. यहां असल लड़ाई मुस्लिम और दलित मतदाताओं को लेकर थी. जो कि इस चुनाव में तीनों पार्टियों में बंटे दिख रहे थे. बीजेपी के उम्मीदवार ओम कुमार ने चुनाव के दौरान कहा था कि इस बार हिंदू-मुस्लिम की बात नहीं चलने वाली है. वहीं ASP के चंद्रशेखर का कहना था कि वो बहुजनों को सुरक्षा दिलाने के लिए चुनाव में उतरे हैं.

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