शिवराज सिंह के साले साहब की छीछालेदर
भाजपा से कांग्रेस में गए थे, फिलहाल चौथे नंबर पर हैं.
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संजय मसानी (कांग्रेस)
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1. सीट – वारासिवनी (बालाघाट)
2. चुनने की वजह – यहां शिवराज सिंह चौहान के सामने बड़ी विकट चुनौती है. अपनी पार्टी का कैंडिडेट जिताने के लिए उन्हें पत्नी साधना सिंह के भाई संजय सिंह मसानी को हराना पड़ेगा.
3. चैलेंजर कौन – एक तरफ हैं भाजपा के योगेंद्र निर्मल दूसरी तरफ हैं कांग्रेस के संजय मसानी
4. ट्रिविया -
> वारासिवनी बालाघाट में है. माने मध्यप्रदेश का इकलौता ऐसा ज़िला जो सरकार के कागज़ नक्सल प्रभावित बताते हैं. यहां छिटपुट घटनाएं भी होती रहती हैं.
> शिवराज के साले साहब चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस चले गए थे. बालाघाट के पड़ोस में महाराष्ट्र का गोंदिया है. ये शिवराज की ससुराल है. तो कांग्रेस ने मौका पकड़कर संजय सिंह मसानी को बालाघाट की ही एक सीट पर उतार दिया. बालाघाट कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन का इलाका है. तो वारासिवनी में शिवराज की निजी प्रतिष्ठा के अलावा बिसेन के ज़ोर की भी परीक्षा है.
> संजय सिंह मसानी के सामने भाजपा ने उतारा है योगेंद्र निर्मल को. लेकिन मसानी के आने से कांग्रेस में खुशी की लहर समान रूप से नहीं पसरी. प्रदीप जायसवाल पहले नाखुश हुए और फिर बागी. निर्दलीय पर्चा भर दिया. जायसवाल ने खूब ज़ोर मारा और उन्हीं की वजह से कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेता कहते रहते - चुनाव फंसा हुआ है गुरू.
योगेंद्र निर्मल (विजेता, भाजपा)
5. मुद्दे/फैक्टर
> बालाघाट में चावल खूब होता है. लेकिन चावल की मिलें उतनी नहीं हैं. तो सरकारी खरीद का चावल का कुछ हिस्सा भी मिलिंग के लिए गोंदिया जाता है. वही गोंदिया जहां शिवराज की ससुराल है. तो पब्लिक इस बारे में खूब चटखारे लेकर बात करती है. और ये यहां का एक बड़ा मुद्दा भी है. कि चावल के लिए मिलें हों.
> बालाघाट में तांबे की खदान भी है. लेकिन स्मेल्टर नहीं है. माने वो कारखाना जहां अयस्क से धातु बनाई जाती है.
> बालाघाट ज़िले में लंबे समय से शिक्षा और बेरोज़गारी मुद्दे रहे हैं. दोनों के लिए बालाघाट से बाहर जाना पड़ता है.
> आदिवासी बहुल ज़िला है. ये इलाका विकास में पीछे छूट गया है. इसीलिए शिवराज की छवि का असर थोड़ा कम हो जाता है.
> इस इलाके में बसपा भी दूसरे-तीसरे नंबर पर रही है. सपा की अनुभा मुंजरे ने बालाघाट में तो गौरीशंकर बिसेन को हरा ही दिया था. बमुश्किल 2400 वोट से बिसेन जीत पाए थे. तिस पर इस बार बालाघाट की लगभग सभी सीटों पर कांग्रेस-भाजपा के सामने मज़बूत बागी खड़े हुए हैं.
भाजपा- योगेन्द्र निर्मल-66806
कांग्रेस-प्रदीप अमृतलाल जायसवाल-48868
बसपा-अजब लाल-18992
7. इस बार कौन जीता ?
कांग्रेस से बाग़ी होकर लड़े प्रदीप अमृतलाल जायसवाल लगभग 4 हज़ार की लीड से जीते.
Video देखें -
2. चुनने की वजह – यहां शिवराज सिंह चौहान के सामने बड़ी विकट चुनौती है. अपनी पार्टी का कैंडिडेट जिताने के लिए उन्हें पत्नी साधना सिंह के भाई संजय सिंह मसानी को हराना पड़ेगा.
3. चैलेंजर कौन – एक तरफ हैं भाजपा के योगेंद्र निर्मल दूसरी तरफ हैं कांग्रेस के संजय मसानी
4. ट्रिविया -
> वारासिवनी बालाघाट में है. माने मध्यप्रदेश का इकलौता ऐसा ज़िला जो सरकार के कागज़ नक्सल प्रभावित बताते हैं. यहां छिटपुट घटनाएं भी होती रहती हैं.
> शिवराज के साले साहब चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस चले गए थे. बालाघाट के पड़ोस में महाराष्ट्र का गोंदिया है. ये शिवराज की ससुराल है. तो कांग्रेस ने मौका पकड़कर संजय सिंह मसानी को बालाघाट की ही एक सीट पर उतार दिया. बालाघाट कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन का इलाका है. तो वारासिवनी में शिवराज की निजी प्रतिष्ठा के अलावा बिसेन के ज़ोर की भी परीक्षा है.
> संजय सिंह मसानी के सामने भाजपा ने उतारा है योगेंद्र निर्मल को. लेकिन मसानी के आने से कांग्रेस में खुशी की लहर समान रूप से नहीं पसरी. प्रदीप जायसवाल पहले नाखुश हुए और फिर बागी. निर्दलीय पर्चा भर दिया. जायसवाल ने खूब ज़ोर मारा और उन्हीं की वजह से कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेता कहते रहते - चुनाव फंसा हुआ है गुरू.
योगेंद्र निर्मल (विजेता, भाजपा)5. मुद्दे/फैक्टर
> बालाघाट में चावल खूब होता है. लेकिन चावल की मिलें उतनी नहीं हैं. तो सरकारी खरीद का चावल का कुछ हिस्सा भी मिलिंग के लिए गोंदिया जाता है. वही गोंदिया जहां शिवराज की ससुराल है. तो पब्लिक इस बारे में खूब चटखारे लेकर बात करती है. और ये यहां का एक बड़ा मुद्दा भी है. कि चावल के लिए मिलें हों.
> बालाघाट में तांबे की खदान भी है. लेकिन स्मेल्टर नहीं है. माने वो कारखाना जहां अयस्क से धातु बनाई जाती है.
> बालाघाट ज़िले में लंबे समय से शिक्षा और बेरोज़गारी मुद्दे रहे हैं. दोनों के लिए बालाघाट से बाहर जाना पड़ता है.
> आदिवासी बहुल ज़िला है. ये इलाका विकास में पीछे छूट गया है. इसीलिए शिवराज की छवि का असर थोड़ा कम हो जाता है.
> इस इलाके में बसपा भी दूसरे-तीसरे नंबर पर रही है. सपा की अनुभा मुंजरे ने बालाघाट में तो गौरीशंकर बिसेन को हरा ही दिया था. बमुश्किल 2400 वोट से बिसेन जीत पाए थे. तिस पर इस बार बालाघाट की लगभग सभी सीटों पर कांग्रेस-भाजपा के सामने मज़बूत बागी खड़े हुए हैं.
Video देखें: MP Elections: बालाघाट का नक्सल प्रभावित इलाकाः एक अदृश्य डॉक्टर और 60 सदेह पुलिस वाले6. पिछली बार का नतीजा
भाजपा- योगेन्द्र निर्मल-66806
कांग्रेस-प्रदीप अमृतलाल जायसवाल-48868
बसपा-अजब लाल-18992
7. इस बार कौन जीता ?
कांग्रेस से बाग़ी होकर लड़े प्रदीप अमृतलाल जायसवाल लगभग 4 हज़ार की लीड से जीते.
Video देखें -
बालाघाट वाले क्या बोले कैबिनेट गौरीशंकर के काम के बारे में -


