The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Election
  • dilip ghosh on minorities in West Bengal election Who will get the Minority Ministry

'अल्पसंख्यकों का विकास हुआ, फिर भी वो क्रिमिनल... ', BJP नेता दिलीप घोष के फिर बिगड़े बोल

West Bengal Election: बीजेपी के सीनियर नेता दिलीप घोष से सवाल किया गया कि बंगाल में बीजेपी की नई सरकार में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़ा मंत्रालय किसे मिलेगा? इस सवाल का जवाब तो उन्होंने नहीं दिया, लेकिन अल्पसंख्यकों को ‘क्रिमिनल’ करार जरूर दे दिया. और क्या कहा उन्होंने?

Advertisement
pic
8 मई 2026 (पब्लिश्ड: 02:32 PM IST)
dilip ghosh on minorities in West Bengal election
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने दिया विवादित बयान. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी पहली सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है. पार्टी ने राज्य में 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है. BJP के जीते हुए विधायकों में कोई भी अल्पसंख्यक चेहरा नहीं है. बीजेपी के सीनियर नेता दिलीप घोष से सवाल किया गया कि बंगाल में बीजेपी की नई सरकार में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़ा मंत्रालय किसे मिलेगा? इस सवाल का जवाब तो उन्होंने नहीं दिया, लेकिन अल्पसंख्यकों को ‘क्रिमिनल’ करार जरूर दे दिया.

पत्रकारों से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि अल्पसंख्यकों का विकास हुआ है. उनका अलग से विकास नहीं होगा. आगे कहा, 

"हम तो सबका साथ सबका विकास करते हैं. बीते 80 सालों से अल्पसंख्यकों का ही विकास हुआ है. फिर भी वो गरीब हैं, वो अशिक्षित हैं, क्रिमिनल हैं, क्यों? अब उन्हें खुद से सवाल पूछना चाहिए और उन पार्टियों से पूछना चाहिए. बीजेपी की कोई जिम्मेदारी नहीं है अल्पसंख्यकों का विकास करने की. वो हमें वोट भी नहीं देते. हां घर और सुविधाएं मिलेंगी. पीएम मोदी ने पहले भी दिया है अब भी देंगे."

इससे पहले दिलीप घोष ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका हिसाब’ वाला नारा दिया था. 'द इंडियन एक्सप्रेस' को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कई मुद्दों पर बात की. नई सरकार के एजेंडे पर बात करते हुए घोष ने कहा,

"सबका साथ, सबका विकास का रास्ता अपनाया जाएगा. लेकिन नई बात होगी सबका हिसाब, जिसमें कानून अपना काम करेगा."

ये भी पढ़ें: 'सबका साथ, सबका विकास, अब होगा सबका हिसाब', दिलीप घोष ने बंगाल में BJP का एजेंडा बता दिया

पश्चिम बंगाल में कौन बनेगा अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री?

BJP के जीते हुए विधायकों में कोई भी अल्पसंख्यक चेहरा नहीं है. ऐसी स्थिति में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (Minority Affairs) के लिए सरकार के पास तीन विकल्प हो सकते हैं.

किसी हिंदू विधायक को प्रभार: मुख्यमंत्री अपनी पसंद के किसी भी हिंदू विधायक को इस विभाग का मंत्री बना सकते हैं. अतीत में कई राज्यों और केंद्र सरकार में भी गैर-अल्पसंख्यक नेताओं ने यह जिम्मेदारी निभाई है. जैसे उत्तर प्रदेश में वर्तमान में ओम प्रकाश राजभर (सुभासपा प्रमुख) अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हैं.

विधान परिषद के जरिए नियुक्ति: BJP ने अपने प्रस्ताव में पश्चिम बंगाल में 'विधान परिषद' के गठन की बात कही है. अगर यह परिषद बनती है, तो पार्टी किसी मुस्लिम चेहरे को मनोनीत कर उसे मंत्री बना सकती है. 

मुख्यमंत्री के पास विभाग: अक्सर अल्पसंख्यक विभाग जैसे संवेदनशील मंत्रालय मुख्यमंत्री स्वयं अपने पास भी रखते हैं, जैसा कि पिछली सरकारों में भी देखा गया है. इससे पहले, ममता बनर्जी खुद अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालती रही हैं.

वीडियो: राजधानी: बंगाल का मुस्लिम वोटर किसके साथ?

Advertisement

Advertisement

()