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बिहार चुनाव नेता पुत्रों का 'लॉन्चिंग पैड' बनेगा, शहाबुद्दीन-पप्पू यादव के बेटे इंतजार में, लिस्ट बहुत लंबी है

Bihar की सियासत में इस बार कई राजनेताओं की अगली पीढ़ी चुनावी राजनीति में लॉन्च होने जा रही है. Shahabuddin के बेटे Osama Shahab का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है. वहीं Pappu Yadav भी अपने बेटे को टिकट दिलाने की सेटिंग कर रहे हैं. इसके अलावा Anand Mohan अब चेतन आनंद के बाद अपने दूसरे बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं.

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pappu yadav anand mohan shahabuddin osama shahab
शहाबुद्दीन, पप्पू यादव और आनंद मोहन (इंडिया टुडे, फाइल फोटो)
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आनंद कुमार
29 अगस्त 2025 (Updated: 29 अगस्त 2025, 10:06 PM IST)
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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की वोटर अधिकार रैली में एक मुलाकात की काफी चर्चा है. पप्पू यादव (Pappu Yadav) और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav). पप्पू यादव लोकसभा चुनाव में महागठबंधन से टिकट नहीं मिलने के बाद से तेजस्वी पर हमलावर रहे थे. लेकिन इस मुलाकात में उनके सुर बदले नजर आए. पप्पू यादव ने उनको जननायक और बिहार की उम्मीद बता दिया. जानकार बता रहे हैं कि पप्पू यादव के बदले सुर के पीछे के कारणों में से एक अपने बेटे की सियासी लॉन्चिंग भी है. 

विधानसभा 2025 में अपने बेटे की लॉन्चिंग की कवायद में जुटे पप्पू यादव अकेले नहीं हैं. उनके पुराने प्रतिद्वंद्वी रहे आनंद मोहन, बीजेपी के कद्दावर नेता अश्विनी चौबे, रामकृपाल यादव, राजद नेता जगदानंद सिंह और कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह समेत लगभग डेढ़ दर्जन नेता इस कतार में शामिल हैं. ये नेता अपने बेटों को टिकट दिलाने के लिए पटना से दिल्ली दरबार तक की हाजिरी लगा रहे हैं.

बेटे को टिकट दिलाने के फिराक में पप्पू यादव

पप्पू यादव अपने बेटे सार्थक रंजन को टिकट दिलाने की कोशिश में जुटे हैं. सार्थक पूर्णिया लोकसभा की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. सार्थक रंजन फिलहाल क्रिकेट खेलते हैं. इन दिनों दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) में खेल रहे हैं. 

वरिष्ठ पत्रकार रमाकांत चंदन ने बताया कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पप्पू यादव का तेजस्वी यादव से सीजफायर के पीछे एक कारण अपने बेटे की ताजपोशी भी है. पप्पू यादव अपने बेटे को चुनाव लड़ाना चाहते हैं. और इसमें उनकी पसंदीदा सीट के लिए तेजस्वी यादव की सहमति भी चाहिए.

आनंद मोहन छोटे बेटे को भी लड़ाना चाहते हैं चुनाव

जदयू नेता आनंद मोहन के बड़े बेटे चेतन आनंद शिवहर विधानसभा सीट से विधायक हैं. वहीं उनकी पत्नी शिवहर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं. खबर है कि अब आनंद मोहन अपने छोटे बेटे अंशुमान को भी चुनाव लड़वाना चाहते हैं. 

अंशुमान अपने पिता आनंद मोहन के साथ 2024 लोकसभा चुनाव के पहले जदयू में शामिल हुए थे. आनंद मोहन उनको टिकट दिलाने के लिए नीतीश कुमार और संजय झा समेत जदयू के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं. सूत्रों के मुताबिक आनंद मोहन मगध प्रमंडल के किसी विधानसभा सीट से अंशुमान को लड़ाना चाहते हैं.

शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा का चुनाव लड़ना तय 

सिवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब भी इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. ओसामा शहाब सिवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. इस सीट से वर्तमान में राजद के टिकट से हरिशंकर यादव विधायक हैं. 

उन्होंने एक कार्यक्रम में पगड़ी बांधकर ओसामा शहाब के लिए सीट छोड़ने का एलान कर दिया. बिहार विधानसभा के पूर्व स्पीकर और सिवान से लोकसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी अवध बिहारी चौधरी ने बताया कि तेजस्वी यादव ने ओसामा शहाब को रघुनाथपुर से चुनाव की तैयारी करने के लिए हरी झंडी दे दी है. 

पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट कटने से नाराज हिना शहाब राजद छोड़कर निर्दलीय सिवान सीट से लोकसभा चुनाव में लड़ीं और दूसरे नंबर पर रहीं. राजद इस चुनाव में तीसरे स्थान पर चली गई. लोकसभा चुनाव के बाद हिना शहाब और उनके बेटे ओसामा ने राजद की सदस्यता ले ली.

अश्विनी चौबे भी बेटे को सेट करने की फिराक में

पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अश्विनी चौबे भी अपने बेटे को टिकट दिलाने के प्रयास में हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में जब बक्सर से उनका टिकट कटा तब भी चौबे बेटे को सेट करने के फिराक में थे. लेकिन बात नहीं बनी.

हाल ही में उन्होंने पटना के गांधी मैदान में सनातन महाकुंभ का आयोजन करवाया था. इसमें उनके बेटे अर्जित शाश्वत भी काफी सक्रिय दिखे थे. अर्जित शाश्वत इससे पहले साल 2015 में भागलपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन उनको कांग्रेस प्रत्याशी अजित शर्मा से हार का सामना करना पड़ा था. 

इसके बाद साल 2018 में भागलपुर में हुए सांप्रदायिक दंगों में भी अर्जित का नाम आया. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनको बेटिकट कर दिया. लेकिन एक बार फिर से अर्जित शाश्वत इस सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं.

रामकृपाल यादव अपने बेटे के लिए टिकट चाहते हैं

पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रामकृपाल यादव अपने बेटे अभिमन्यु यादव को टिकट दिलाना चाहते हैं. रामकृपाल यादव इस बार पाटलिपुत्र लोकसभा से चुनाव हार चुके हैं. उनको मीसा भारती ने शिकस्त दी. रामकृपाल यादव के सांसद रहते भी अभिमन्यु काफी सक्रिय रहे हैं. उन्होंने 'टीम अभिमन्यु' नाम से युवाओं का एक संगठन बनाया है, जो सामाजिक कामों में काफी एक्टिव रहता है. 

रामकृपाल यादव फतुहा सीट से अपने बेटे के लिए टिकट चाहते हैं. इस सीट पर फिलहाल राजद के रामानंद यादव विधायक हैं. बीजेपी ने पिछली बार यहां से सत्येंद्र सिंह को टिकट दिया था. अभिमन्यु यादव ने फतुहा में काफी एक्टिव भी दिख रहे हैं.

जगदानंद सिंह के दूसरे बेटे लड़ सकते हैं चुनाव

लालू यादव के खास सिपहसालार और राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे अजित सिंह एक बार फिर से रामगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. साल 2020 में इस सीट से उनके बड़े भाई सुधाकर सिंह विधायक बने थे. 

सुधाकर साल 2024 में बक्सर से सांसदी जीत गए. उनके खाली करने के बाद साल 2024 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में राजद ने अजित सिंह को टिकट दिया, लेकिन वो हार गए. अब चर्चा है कि राजद एक बार फिर से साल 2025 के विधानसभा चुनाव में उन पर भरोसा जता सकती है.

मदन मोहन झा के बेटे भी रेस में 

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा अभी विधान परिषद के सदस्य हैं. कांग्रेस पार्टी में उनकी अच्छी पकड़ है. पार्टी ने उनको विधानसभा चुनाव में टिकट तय करने के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी में भी जगह दी है. 

मदन मोहन झा के बेटे माधव झा दरभंगा और मधुबनी में काफी एक्टिव हैं. वोटर अधिकार यात्रा के दौरान उन्होंने दरभंगा में राहुल गांधी से भी मुलाकात की है. खबर है कि माधव झा इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. और मदन मोहन झा उनके लिए दरभंगा या फिर मधुबनी की कोई विधानसभा सीट चाहते हैं.

बेटे को लड़वाना चाहते हैं नंद किशोर यादव

नंद किशोर यादव पटना साहिब से विधायक और बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं. ये बिहार सरकार में स्वास्थ्य और पथ निर्माण विभाग जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं. साथ ही पार्टी में कई अहम सांगठनिक पदों पर भी रहे हैं. 

नंदकिशोर यादव की उम्र 70 प्लस हो चुकी है. और उनके बेटे नितिन कुमार उर्फ टिंकू भी राजनीति में एक्टिव हैं. टिंकू बीजेपी व्यवसायी मंच के सह संयोजक हैं. चर्चा है कि इस बार नंदकिशोर यादव अपनी जगह पटना साहिब सीट से अपने बेटे को टिकट दिलवाना चाहते हैं.

विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं अखिलेश प्रसाद के बेटे

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश यादव के बेटे आकाश सिंह इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं. आकाश साल 2024 में महाराजगंज लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे. लेकिन सफलता नहीं मिली. 

इससे पहले साल 2019 के लोकसभा चुनाव में आकाश मोतिहारी सीट से लड़े थे. लेकिन असफल रहे थे. लोकसभा चुनाव में दो बार मिली असफलता के बाद अब अखिलेश सिंह बेटे को विधायकी लड़वाने की तैयारी में हैं. सूत्रों के मुताबिक, आकाश टेकारी या फिर कुर्था विधानसभा सीट से किस्मत आजमा सकते हैं.

बेटे को टिकट दिलाने के लिए अशोक राम ने बदला पाला

कांग्रेस के पुराने नेता अशोक राम जदयू में शामिल हो गए हैं. वह बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं. कांग्रेस पार्टी के बड़े दलित चेहरे के तौर पर उनकी पहचान थी. लेकिन राजेश राम को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे थे. खबर है कि अशोक राम अपने बेटे अतिरेक को चुनाव लड़वाना चाहते हैं. अशोक राम समस्तीपुर और इसके आसपास के इलाके में सक्रिय रहे हैं. इसी इलाके के किसी सीट से उनके बेटे अतिरेक चुनाव लड़ सकते हैं.

वशिष्ठ नारायण सिंह के बेटे भी उतरेंगे चुनावी मैदान में

वशिष्ठ नारायण सिंह जदयू के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. और अभी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भूमिका में हैं. उनके बेटे सोनू सिंह भी जदयू में एक्टिव हैं. वे इस बार शाहाबाद इलाके की किसी सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं.

वशिष्ठ बाबू के अलावा जदयू के एक और सीनियर लीडर हरिनारायण सिंह भी इस बार अपने बेटे की लॉन्चिंग की कोशिश में हैं. सिंह बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. और फिलहाल हरनौत सीट से विधायक हैं. उनकी उम्र 75 साल से ज्यादा हो चुकी है. और कुछ दिन पहले उन्होंने सार्वजनिक तौर पर चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी. उनके इस एलान के बाद चर्चा तेज है कि इस सीट से उनके बेटे अनिल कुमार विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं. 

इस सीट से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी विधायक रह चुके हैं. इसलिए इस सीट से उनके पुत्र निशांत के भी चुनाव लड़ने की चर्चा है. हालांकि अभी तक निशांत या फिर जदयू की ओर से आधिकारिक तौर पर इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है. जदयू के सीनियर नेता केसी त्यागी ने बताया कि कार्यकर्ता निशांत कुमार के चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस पर आखिरी फैसला नीतीश कुमार करेंगे.

अवधेश नारायण सिंह और प्रेम कुमार के बेटे भी रेस में

बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह अपने बेटे आनंद रमण को चुनावी मैदान में उतारना चाहते हैं. आनंद बीजेपी युवा मोर्चा से जुड़े रहे हैं. वह भोजपुर जिले की किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. इनकी पसंदीदा सीट आरा विधानसभा क्षेत्र है.

बीजेपी के सीनियर नेता प्रेम कुमार बिहार सरकार में पर्यावरण मंत्री हैं. इसके अलावा वो कृषि मंत्री और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री भी रह चुके हैं. प्रेम कुमार लगातार 8 बार से गया शहर सीट से विधायक हैं. प्रेम कुमार इस बार अपनी जगह पर अपने बेटे प्रेम सागर को इस सीट से लड़वाना चाहते हैं.

अमरेंद्र प्रताप सिंह, अरुण सिन्हा और आरके सिन्हा के बेटों की भी दावेदारी

बीजेपी नेता और पूर्व कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह आरा विधानसभा सीट से विधायक हैं. अमरेंद्र प्रताप कृषि मंत्रालय समेत पार्टी में कई सांगठनिक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. अमरेंद्र प्रताप भी 75 पार वाले क्लब में पहुंच गए हैं. उम्र की इस दहलीज पर टिकट कटने की संभावना देखकर ये भी अपनी विरासत अपने बेटे को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं. ये अपने बेटे को आरा विधानसभा से चुनाव लड़ाना चाहते हैं.

आरके सिन्हा बीजेपी के सीनियर नेता है. पार्टी उनको राज्यसभा भी भेज चुकी है. उनके बेटे ऋतुराज सिन्हा लंबे समय से पार्टी में एक्टिव हैं. अभी ऋतुराज बीजेपी के नेशनल सेक्रेट्री की भूमिका में हैं. वो लोकसभा चुनाव में पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन टिकट नहीं मिला. अब ऋतुराज पटना शहर की किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.

कुम्हरार से बीजेपी विधायक अरुण सिन्हा भी 70 प्लस के हो चुके हैं. ये 2005 से अब तक लगातार विधायक हैं. सिन्हा विधानसभा में पार्टी के व्हिप की भूमिका निभा चुके हैं. उम्र को देखते हुए इस बार इनका टिकट कट सकता है. सिन्हा की हसरत अपनी जगह पर बेटे आशीष सिन्हा को कुम्हरार सीट से विधानसभा चुनाव लड़ाने की है. आशीष पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं.

मधुबनी के बेनीपट्टी विधानसभा सीट से विधायक  विनोद नारायण झा भी अपने बेटे को टिकट दिलाने की रेस में शामिल हैं. झा नीतीश कुमार सरकार में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता भी रहे हैं. इस बार इनका भी टिकट कटने के चांसेज हैं. विनोद नारायण झा अपनी जगह इस बार अपने बेटे को सेट करना चाहते हैं. उनके बेटे डॉ. विभय कुमार फिलहाल चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी में हैं.

लालमुनि चौबे के बेटे जनसुराज में शामिल

बक्सर से बीजेपी के पूर्व सांसद दिवंगत लालमुनि चौबे के बेटे हेमंत चौबे भी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. हेमंत कुछ दिन पहले प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी में शामिल हो गए हैं. वे कैमूर जिले की चैनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं. 

चैनपुर सीट से वर्तमान में मोहम्मद जमा खान विधायक है. जमा खान बसपा के टिकट पर विधायक बने थे. लेकिन फिर उन्होंने जदयू जॉइन कर लिया था. वे अब बिहार सरकार में मंत्री हैं. पिछली इस सीट से बीजेपी के बृज किशोर बिंद दूसरे नंबर पर आए थे.

बिहार विधानसभा चुनाव में अपने बेटों की सियासी लॉन्चिंग की कोशिशों में जुटे नेताओं की ये लिस्ट फाइनल नहीं है. इनमें से बहुतों को टिकट मिल सकता है, तो कुछ के हाथ निराशा भी आएगी. साथ ही इस लिस्ट में आने वाले वक्त में कुछ और नाम भी शामिल हो सकते हैं. 

वीडियो: तेजस्वी, लालू पर क्या बोले तेज प्रताप यादव? बिहार चुनाव लड़ने पर भी दिया जवाब

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